बैंक घोटाले में अमरिंदर के दामाद का नाम अाने से विपक्ष हुआ हमलावर

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बैंक घोटाल में पंजाब के मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह के दामाद का नाम आने के बाद पंजाब के विपक्षी दल उनपर हमलावर हो गए हैं। कैप्‍टन अमरिंदर ने विपक्ष के आरोप को नकारा है।।
जेएनएन, चंडीगढ़। नीरव मोदी और विक्रम कोठारी के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के दामाद गुरपाल सिंह के बैंक घोटाले में शामिल होने को लेकर विपक्ष हमलावर हो गया है। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष सुखपाल सिंह खैहरा ने कहा कि इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल गुरपाल का मामला नहीं हैं, अगर देश भर में सीबीआइ बड़े नेताओं की पड़ताल करेगी, तो तमाम और घोटाले सामने आएंगे। सीबीआइ को इस मामले में गंभीरता के साथ जांच करनी चाहिए।
दामाद का नाम आने पर आप और भाजपा ने की जांच की मांग
दूसरी आेर, भाजपा के पूर्व प्रदेश प्रधान कमल शर्मा ने कहा है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के दामाद बैंकों व किसानों का करोड़ों रुपये डकार गए। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। शर्मा ने कहा कि बिना राजनीतिक शह के यह घोटाला संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि नैतिक आधार पर मुख्यमंत्री व कांग्रेस पूरे मसले पर जवाब दें।
बैंक घोटाले पर विपक्ष ने कैप्टन को घेरा
उन्‍होंने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो की ओर सिंभावली शुगर्स लिमिटेड के चेयरमैन गुरमीत सिंह मान, उप प्रबंध निदेशक गुरपाल सिंह और अन्य को लगभग 200 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले का आरोपी बनाया है। बैंक के डिप्टी एमडी गुरुपाल सिंह मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के दामाद हैं।
कमल शर्मा ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि इस घोटाले को भाजपा के सिर मढ़ने के चक्कर में बिना जांच के ट्वीट कर कांग्रेस ने देश में अपनी हास्यास्पद छवि बना ली और शर्मसार हो कर अपना ट्वीट वापस लेना पड़ा। शर्मा ने बताया कि नीरव मोदी से लेकर ललित मोदी, विजय माल्या और अब दामाद घोटाला सभी की जननी कांग्रेस पार्टी ही है
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यह है मामला
2011 में रिजर्व बैंक की गन्ना किसानों के लिए लाई गई योजना के तहत सिंभावली शुगर्स लिमिटेड ने 97.85 करोड़ का लोन लिया था। इस रकम को गन्ना किसानों को वित्तीय मदद के रूप में बांटना था, लेकिन कंपनी ने फर्जीवाड़ा करके इस रकम को अपने काम के लिए खर्च कर लिया।
31 मार्च 2015 को यह लोन एनपीए बन गया, जिसके बाद कंपनी ने पिछले लोन चुकाने के लिए 110 करोड़ रुपये का नया लोन लिया। नोटबंदी के 20 दिन बाद 29 नवंबर 2016 को एनपीए घोषित कर दिया गया। यह बैंक से 97.85 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला है और 109.08 करोड़ रुपये का लोन डिफॉल्ट हुआ है।
सीबीआइ ने दर्ज किया केस
गौरतलब है कि रविवार को सीबीआइ ने उत्तर प्रदेश की सिंभावली चीनी मिल के प्रबंधकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इसी सिलसिले में मिल के चेयरमैन गुरमीत सिंह मान, डिप्टी चेयरमैन गुरपाल सिंह और अन्य को नामजद किया गया था।
तथ्यहीन आरोपों की राजनीति न करे विपक्ष, मेरे दमाद के पास केवल 12.5 फीसदी शेयर: कैप्टन
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ओरियंटल बैंक ऑफ कामर्स में हुए करीब 200 करोड़ रुपये के घोटाले में उनके दमाद गुरपाल सिंह पर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को लेकर कहा है कि विपक्ष पूरे मामले में बिना जानकारी के तथ्यहीन आरोपों की राजनीति न करे।
उन्‍हाेंने सिंभावली शुगर मिल में गुरपाल केवल 12.5 फीसद के शेयरहोल्डर हैं। उनके पास जो जानकारी है, उसके अनुसार पूरे मामले की सुनवाई कर्ज वसूली ट्रिब्यूनल की अदालती कार्रवाई के तहत की गई है। बैंक ने ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की थी। गुरपाल कानून की पालना करने वाले हैं। उन्होंने पर्सनल गारंटी पर कर्ज लेने संबंधी किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था।
कैप्टन ने कहा कि भाजपा गुरपाल को जानबूझ कर केवल इसलिए बदनाम कर रही है कि क्योंकि बैंक के डायरेक्टर के साथ उनके निजी रिश्ते हैं। उन्होंने कहा कि गुरपाल पर लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद और तथ्यों की जांच के बिना लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले की पड़ताल के बाद ही गुरपाल पर आरोप लगाए जाएं। साथ ही मीडिया से अपील की है मीडिया पूरे मामले की छानबीन के बाद ही गुरपाल पर आरोप लगाए। गुरपाल बेकसूर हैं।

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