बिहार कांग्रेस में भूचाल: अशोक चौधरी सहित चार MLC ने छोड़ी पार्टी, JDU में शामिल

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बिहार में पूर्व प्रदेश अध्‍यक्ष अशोक चौधरी सहित चार कांंग्रेस एमएलसी पार्टी से बगावत कर मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के साथ चले गए हैं। कांग्रेस ने उन्‍हें निष्‍कासित कर दिया है।
अशोक चौधरी का फिर छलका दर्द, स्टार प्रचारकों में नाम शामिल नहीं
पटना । होली के ठीक पहले बिहार कांग्रेस में बड़ी टूट हुई। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. अशोक चौधरी समेत कांग्रेस के चार विधान पार्षदों (एमएलसी) ने पार्टी को अलविदा कह जदयू का दामन थाम लिया। इससे पहले अशोक चौधरी गुट ने बुधवार की देर शाम विधान परिषद के उपसभापति हारुण रशीद को आवेदन देकर सदन में अलग गुट के रूप में मान्यता देने का आग्रह किया।
चौधरी गुट का यह फैसला सार्वजनिक होने के साथ ही बिहार कांग्रेस के प्रभारी अध्यक्ष कौकब कादरी ने चारों नेताओं अशोक चौधरी, दिलीप चौधरी, रामचंद्र भारती और तनवीर अख्तर को पार्टी से निष्कासित कर दिया।
कांग्रेस छोडऩे का फैसला लेने के बाद देर रात अपने सरकारी आवास 1, पोलो रोड में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में डॉ. चौधरी ने कहा कि मैंने अध्यक्ष पद संभालने के बाद बिहार में कांग्रेस को खड़ा किया। विधान परिषद में कांग्रेस के छह सदस्य बने। चार विधायक वाली पार्टी को 27 विधायक तक पहुंचाया। पर मेरे साथ क्या हुआ किसी से छिपा नहीं। मुझे हर तरह से अपमानित किया गया। यहां तक की विधायक दल की बैठक में मुझ पर आरोप लगाए गए कि मैं भभुआ प्रत्याशी को हराने के लिए काम कर रहा हूं।
इतने आरोप और बेइज्जती के बाद कांग्रेस छोडऩे के सिवा मेरे पास दूसरा विकल्प नहीं था। डॉ. चौधरी ने बताया कि वह और तीन अन्य पार्षद कांग्रेस छोड़ जदयू की सदस्यता लेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से आज ही मेरी बात हुई। मैंने उनसे आग्रह किया कि हमें जदयू में शामिल किया जाए। उनकी रजामंदी के बाद मैंने विधान परिषद में अलग गुट की मान्यता के लिए आवेदन दिया है।
डॉ. चौधरी ने कहा नीतीश कुमार पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं। न ही वे जाति की राजनीति में विश्वास करते हैं। उनका ध्येय राज्य का विकास करना है। इस वक्त उनके जैसा दूसरा कोई राजनेता नहीं। उन्होंने कहा जदयू में जाने के पीछे पद जैसी कोई लालसा मेरी नहीं है। पार्टी मुझे जो दायित्व सौंपेगी उसका मैं निर्वहन करुंगा।
जीतन राम मांझी से जुड़े एक सवाल पर डॉ. चौधरी ने कहा कि यह तो जनता तय करेगी कि दलित का बड़ा नेता कौन है? मांझी अपना खुद का चुनाव नहीं जीत सकते ऐसे में वे दलितों के कितने बड़े नेता हैं, इसका सहज आकलन किया जा सकता है। एक अन्य सवाल पर उन्होंने कहा आगे देखिए, अभी कांग्रेस को और लोग भी अलविदा कहेंगे। प्रेस कांफ्रेंस में पार्टी छोडऩे वाले पार्षद रामचंद्र भारती, दिलीप चौधरी, तनवीर अख्तर के साथ ही पूर्व सचिव रंजीत झा सुमन कुमार मलिक, संजय सिन्हा के अलावा दूसरे कई नेता मौजूद रहे।

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