जया बच्चन का समाजवादी पार्टी से राज्यसभा जाने का रास्ता साफ, नरेश अग्रवाल का टिकट कटा

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लखनऊ. समाजवादी पार्टी से राज्यसभा भेजे जाने में जया बच्चन और किरनमय नंदा का नाम चर्चा में हैं। वहीं सपा से मिली जानकारी के अनुसार से वरिष्ठ नेता नरेश अग्रवाल का टिकट काट दिया गया हैं। यूपी में समाजवादी पार्टी से पूर्व अभिनेत्री जया बच्चन को दोबारा उम्मीदवार राज्यसभा जाना तय माना जा रहा है। बता दें, समाजवादी पार्टी किसी एक को ही उम्मीदवार को राज्य सभा भेज सकती है। फिलहाल अभी सपा की तरफ से किसी ने जया बच्चन और किरणमय नंदा में से राज्यसभा भेजे जाने की पुष्टि नहीं की हैं।

टिकट काटे जाने की चल रही थीं खबरें
-कुछ दिन पहले तक मीडिया में ऐसी खबरें थी कि यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव और पार्टी के कुछ नेता जया बच्चन के रवैये से खुश नहीं हैं और पार्टी उनका टिकट काट सकती है।
-अब उन सभी अटकलों पर लगता है औपचारिक ऐलान के बाद विराम लग जाएगा। इस खबर पर एसपी के पूर्व नेता और कभी बच्चन परिवार के करीबी रहे अमर सिंह ने कहा, ‘जया बच्चन समाजवादी पार्टी के लिए वफादार रही हैं। वह नरेश अग्रवाल से बेहतर उम्मीदवार साबित होंगी।’
दोबारा बनेंगी राज्यसभा सदस्य, एक बार दिया था इस्तीफा
-समाजवादी पार्टी की सांसद रहते उन्हें 2005 में उस वक्त सदस्यता छोड़नी पड़ी थी, जब उन पर लाभ के पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगा था।
-जया बच्चन पर 2005 में आरोप था कि सांसद होने के साथ ही जया उत्तर प्रदेश फिल्म विकास परिषद की अध्यक्ष भी थीं। लिहाजा उन्हें अपनी सदस्यता से इस्तीफा देना पड़ा था। 2012 में जया बच्चन को एक बार फिर पार्टी ने अपने टिकट पर राज्यसभा भेजा।
एक सदस्य भेज सकती हैं सपा ये है मज़बूरी
-बता दें कि उत्तर प्रदेश में 23 मार्च को राज्य की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने वाले हैं। समाजवादी पार्टी के पास इस वक्त 403 में से 47 विधायक हैं।
-जबकि एक राज्यसभा सीट पर जीत के लिए 38 विधायक होने जरूरी हैं। संख्या बल को देखते हुए जया बच्चन की जीत तय मानी जा रही है।
-निर्वाचन के बाद वे दूसरी बार समाजवादी पार्टी से राज्यसभा का प्रतिनिधित्व करेंगी। कहा जाता है कि अमर सिंह ने उन्हें राजनीति में दाखिल कराया था।
-जिसके बाद वे समाजवादी पार्टी से पहली बार राज्यसभा सांसद बनीं थीं, बाद में अमर सिंह और बच्चन परिवार में दूरियां भले बढ़ गईं, मगर समाजवादी पार्टी और मुलायम परिवार से रिश्ते पहले जैसे ही रहे।

बसपा कैंडिडेट ने किया नामांकन,मायावती के सच्चे सिपाही है
-बसपा से भीमराव आम्बेडकर ने बुधवार को राज्यसभा का नामांकन दाखिल किया हैं। इस दौरान उनके साथ राज्य सभा सदस्य सतीश मिश्र मौजूद रहे।
-अम्बेडकर ने कहा, देश में भगवा आतंक को पनपने नही दिया जाएगा ,बहन मायावती जी के नेतृत्व में ही देश का कल्याण हो सकता है।
-हम 25 साल से बसपा में कार्यकर्ता के रूप में काम कर रहे है, हमने मायावती जी के चरणों में रहकर काम किया है।
-ये व्यवस्था परिवर्तन का मूवमेंट है, देश की जनता मायावती जी को देश का प्रधानमंत्री बनाना चाहती है। हम मायावती के सच्चे सिपाही है, उनके लिए अपनी जान दे सकते है।
-वहीं सतीशचंद्र मिश्रा ने कहा राज्यसभा चुनाव के लिए सपा से सहमति है।बसपा उम्मीदवार को जीतने के लिए पर्याप्त वोट मिलेंगे।
-उपचुनाव पर कहा कि इसे 2019 के लोकसभा चुनाव से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।फिलहाल उपचुनाव में बसपा ने भाजपा को हराने के लिए सपा उम्मीदवार को समर्थन दिया है।
-बता दें, बीएसपी ने मंगलवार शाम को सभी विधायक की बैठक के बाद प्रत्याशी भीम राव आंबेडकर का नाम घोषित किया था।

क्या है राज्यसभा का गणित?

– यूपी में विधानसभा की 403 और राज्यसभा के लिए 31 सीटें हैं। 2017 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को 325, सपा के 47, बसपा 19 और कांग्रेस के 7 सदस्य हैं।
– राज्यसभा सदस्य के निर्वाचन का अधिकार विधानसभा सदस्य को होता है। यूपी में 403 विधानसभा सीटें हैं और राज्यसभा के चुनाव 10 सीटों के लिए होना है।
– राज्यसभा चुनाव का फॉर्मूला है- (खाली सीटें + एक) कुल योग से विधानसभा की सदस्य संख्या से भाग देना। इसका जो जवाब आए उसमें भी एक जोड़ने पर जो संख्या होती है। उतने ही वोट एक सदस्य को राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए चाहिए।
– यूपी की सदस्य संख्या 403 है। खाली सीट 10+1= 11। 403/ 11= 36.63। 36.4 +1= 37.63। यूपी राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए एक सदस्य को औसतन 37 विधायकों का समर्थन चाहिए।
– इस आकड़े की बात करें को बीजेपी के खाते में 8 जबकि सपा के खाते में एक सीट जा रही है क्योंकि सपा के पास 47 विधायक हैं। सपा की बची 10, बसपा की 19 कांग्रेस की 7 सीटें और 1 रालोद की सीट मिलाकर ही बीएसपी अपना उम्मीदवार राज्यसभा भेज सकती हैं।

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