8 दिन पहले ट्रैफिक लाइट पर शुरू हुआ झगड़ा, अब आपातकाल में बदला

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श्रीलंका के कैंडी शहर में बौद्धों और अल्पसंख्यक मुस्लिमों के बीच सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई। इसके बाद तनाव को देखते हुए सरकार ने मंगलवार को पूरे देश में 10 दिन के लिए आपातकाल लगा दिया है। श्रीलंका में इससे पहले अगस्त 2011 में आपातकाल लगाया गया था।
इस आपातकाल की जड़ पिछले कुछ दिनों में हुई कई घटनाओं को माना जा रहा है। पर श्रीलंका मीडिया के मुताबिक मुख्य वजह 27 फरवरी को श्रीलंका के पूर्वी प्रांत के अंपारा कस्बे में हुई हिंसा है। यहां ट्रैफिक रेड लाइट पर हुए झगड़े के बाद कुछ मुसलमानों ने एक सिंहली बौद्ध युवक की पिटाई कर दी थी। तभी से वहां तनाव बना हुआ है। इसके अलावा कैंडी जिले के थेल्डेनिया इलाके में सोमवार को एक बौद्ध की मौत के बाद एक मुस्लिम व्यापारी को आग लगा दी गई। फिर सिंहली बौद्धों आैर अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच हिंसा भड़क गई। इसके चलते इलाके में कर्फ्यू लगाना पड़ा। श्रीलंका पुलिस के अनुसार कैंडी जिले में रविवार को भी हिंसा और आगजनी की कुछ घटनाएं हुई थीं। इसके अलावा हिंसा के पीछे कई वजहें और भी हैं। श्रीलंका में सात साल में दूसरी बाद इमरजेंसी लगानी पड़ी है। 2009 में तमिल विद्रोहियों के खात्मे के बाद 2011 में इमरजेंसी लगाई गई थी।
श्रीलंका में 70% बौद्ध, 9.7% मुस्लिम, 12.6% हिंदू और 7.6% ईसाई आबादी रहती है
कैंडी में कई मुस्लिम बस्तियों में दंगाइयोंंंेे ने आग लगा दी। इसके बाद इन इलाकों में सेना तैनात की गई है।
वजह सिंहली बौद्ध, मुस्लिमों को मानते हैं खतरा
श्रीलंका सरकार तमिल विद्रोहियों से भले ही निपटने में कामयाब रही हो, पर देश में सिंहली बौद्धों का एक बड़ा वर्ग है, जो गैर-सिंहली मूल के लोगों और मुस्लिमों को अपने लिए खतरे के तौर पर देखता है। 2014 में भी श्रीलंका में बड़े पैमाने पर दंगे हुए थे। उस हिंसा में 8,000 मुस्लिमों को विस्थापित होना पड़ा था।
आरोपमुस्लिम संगठन बौद्धों का धर्म परिवर्तन करा रहे
श्रीलंका में बौद्ध समुदाय का आरोप है कि मुस्लिम संस्थाएं और इनसे जुड़े लोग जबरन धर्म परिवर्तन करा रहे हैं। कुछ बौद्ध संगठन रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देने का विरोध भी कर रहे हैं। बौद्ध सिंहलियों का मानना है कि रोहिंग्या मुस्लिमों ने म्यांमार में उनके समुदाय के लोगों पर जुल्म ढाए और परेशान किया।
बौद्ध संगठनों को मुस्लिमों की बढ़ती आबादी से परेशानी
श्रीलंका में मुसलमानों का मांसाहार या पालतू पशुओं को मारना बौद्ध समुदाय के लिए एक विवाद का मुद्दा रहा है।
कट्टरपंथी बौद्ध संगठन बोदू बाला सेना सिंहली बौद्धों का राष्ट्रवादी संगठन है। ये संगठन मुसलमानों के खिलाफ मार्च निकालता है। इस संगठन को मुसलमानों की बढ़ती आबादी से भी शिकायत है।
बौद्धों के प्राचीन स्थलों को भी तोड़ने का आरोप
बौद्ध समुदाय का आरोप लगाया है कि मुस्लिम उनके पुरातात्विक स्थलों को तोड़ रहे हैं। मुस्लिमों का आरोप है कि बौद्ध दंगाइयों ने 10 मस्जिदों, 75 दुकानों अौर 32 मकानों में तोड़फोड़ और आगजनी की है। उधर, पुलिस को आशंका है कि युवक को बदले की भावना के चलते आग के हवाले कर दिया गया है।
मुस्लिम भीड़ ने सिंहली युवक की पिटाई कर दी थी
दंगाइयों ने 10 मस्जिदों, 75 दुकानों में तोड़फोड़ की
2.12 करोड़ श्रीलंका की अाबादी, इनमें सिंहली सबसे ज्यादा हैं
श्रीलंका की कुल आबादी 2 करोड़ 12 लाख है। कैंडी शहर की आबादी 1.25 लाख है। बौद्ध आबादी 70%, हिंदू 12.6%, मुस्लिम 9.7% और 7.6% ईसाई हैं। 2012 की जनगणना के मुताबिक देश में सिंहली 75%, तमिल 11.1%, मूर 9.3% और इंडियन तमिल 4.1% हैं।
कट्‌टर बौद्ध संगठन बोदु बाला सेना का हिंसा के पीछे हाथ
श्रीलंका में कट्टर बौद्ध संगठन बोदु बाला सेना को भी ऐसी हिंसा के लिए जिम्मेदार माना जाता है। इस बार भी हिंसा के पीछे उनके हाथ होने की संभावना जताई जा रही है। संगठन के महासचिव गालागोदा अक्सर कहते रहे हैं कि मुस्लिमों की बढ़ती आबादी देश के मूल सिंहली बौद्धों के लिए खतरा है।
6 साल से देश में तनाव बरकरार
श्रीलंका में 2012 से ही सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी हुई है। पिछले दो महीने के भीतर गॉल में मस्जिदों पर हमले की 20 से ज्यादा घटनाएं हो चुकी हैं। 2014 में कट्टरपंथी बौद्ध गुटों ने तीन मुसलमानों की हत्या कर दी थी, जिसके बाद गॉल में दंगे भड़क गए थे। 2013 में कोलंबो में सांप्रदायिक हिंसा हुई थी।

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