आरुषि हत्याकांड: हाईकोर्ट के फ़ैसले को सीबीआई ने दी चुनौती

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आरुषि हत्याकांड मामले में बृहस्पतिवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने तलवार दंपति को बरी किए जाने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है.पांच महीने पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2008 में 14 साल की आरुषि और हेमराज की हत्या के मामले में सबूतों के अभाव में राजेश तलवार और नुपुर तलवार को बरी कर दिया था.एडिशनल सोलिसिटर जनरल पी नरसिम्हा से सलाह करने के बाद अब सीबीआई ने देश की सर्वोच्च अदालत में हाईकोर्ट के फ़ैसले को चुनौती दी है.
सीबीआई का कहना है कि हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में गाज़ियाबाद ट्रायल कोर्ट के “तर्कसंगत” फ़ैसले को ठीक से नहीं देखा है.ये फ़ैसला तलवार दंपति को दोषी ठहराने के पीछे ‘परिस्थितिजन्य साक्ष्य’ के आधार पर दिया गया था और इसमें “सबसे आख़िर में आरुषि को किसके साथ देखा गया” के संबंध में मिली जानकारी को सैद्धांतिक आधार बनाकर तलवार दंपति को दोषी माना गया था.
‘आख़िर आरुषि तलवार को किसने मारा?’सीबीआई ने कहा कि इस मामले में कोई चश्मदीद गवाह ना होने के कारण परिस्थितिजन्य साक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण हैं जिन्हें हाईकोर्ट ने अपने आदेश में नज़रअंदाज़ किया है. सीबीआई का कहना है हाईकोर्ट ने हत्या का पता चलने के तुरंत बाद “माता-पिता के आचरण” के संबंध में दी जानकारी को खारिज कर दिया जो इस मामले में उनके शामिल होने की ओर संकेत था.
सीबीआई ने कहा कोर्ट ने घर में तलवार दंपति के व्यवहार के बारे में उनके घर पर काम करने वाली उनकी नौकरानी का बयान और तलवार दंपति के दावे के विपरीत नौकरानी का घर के बाहर से बंद नहीं होने के बारे में दिये गये बयान को खारिज कर दिया है.इससे पहले बीते साल 12 अक्तूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस बहुचर्चित डबल मर्डर केस में ट्रायल कोर्ट का फ़ैसला पलट दिया था और तलवार दंपति को बरी कर दिया था. कोर्ट का कहना था कि जो सबूत पेश किए गए हैं वो तलवार दंपति को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं हैं और तलवार दंपति को संदेह का लाभ मिलना चाहिए.इलाहाबाद कोर्ट के इस फ़ैसले के साथ तलवार दंपति को 9 साल तक चले हत्या के इस मामले में कुछ राहत मिली थी. गाज़ियाबाद सीबीआई कोर्ट ने 26 नवंबर 2013 को तलवार दंपति को दोषी करार देते हुए आजीवन करावास की सज़ा सुनाई थी.बीते साल दिसंबर में हेमराज की पत्नी ने तलवार दंपति के संबंध में आए हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था.डेंटिस्ट राजेश तलवार की 14 साल की बेटी आरुषि तलवार और उनके नौकर हेमराज की हत्या 15-16 मई 2008 की दरमियानी रात नोएडा के जलवायु विहार स्थित उनके घर पर हुई थी.
Image caption हेमराज की ये तस्वीर दिल्ली पुलिस ने उपलब्ध कराई थी आरुषि अपने कमरे में मृत पाई गई थी. पुलिस का पहला शक घर में काम करने वाले हेमराज पर था जो घर से ग़ायब था लेकिन अगले दिन हेमराज का शव छत पर मिला.शुरुआत में उत्तर प्रदेश पुलिस ने केस सुलझाने का दावा किया और राजेश तलवार के नौकरों को संदिग्ध माना. इसके बाद पुलिस ने कहा कि राजेश तलवार ने कथित तौर पर आरुषि और हेमराज को आपत्तिजनक स्थिति में देखा और गुस्से में दोनों की हत्या कर दी.मामला सीबीआई के पास पहुंचा. 26 नवंबर 2013 को सीबीआई की अदालत ने तलवार दंपति को दोषी करार दिया. तलवार दंपति सभी आरोपों से इनकार करते रहे हैं.30 महीने की जांच के बाद सीबीआई ने दिसंबर 2010 में अदालत में क्लोज़र रिपोर्ट पेश की और कहा कि पर्याप्त साक्ष्य ना होने के कारण वो इस मामले में हत्या का आरोप किसी पर नहीं लगा सकते. हालांकि सीबीआई कोर्ट ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि फ़ैसला सुनाने के लिए पर्याप्त परिस्थितिजन्य साक्ष्य मौजूद हैं.मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और इसके आदेश पर फिर से मामला शुरू हुआ और सीबीआई अदालत ने तलवार दंपत्ति को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई.
इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ तलवार दंपति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की थी.

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