इंडिया टुडे कॉन्क्लेव LIVE: देश में नौकरियां हैं लेकिन अच्छी नौकरी की जरूरत

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इंडिया टुडे समूह के चेयरमैन अरुण पुरी ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव की शुरुआत करते हुए कहा कि पूरी दुनिया इस वक्त बड़े उलटफेर के दौर से गुजर रही है.
अरुण पुरी ने कहा कि दुनियाभर में नए तरीके का नेतृत्व देखने को मिल रहा है. कनाडा से लेकर ग्रीस तक और मेक्सिको से लेकर भूटान तक नए विचार दुनिया के सामने रखे जा रहे हैं. अरुण पुरी ने कहा कि दि ग्रेट चर्न में 5 अहम विरोधाभास देखने को मिल रहा है. इस कनेक्टेड दुनिया में नैशनलिज्म की वापसी देखने को मिल रही है, लोकतंत्र के सामने खतरा दिखाई दे रहा है, दुनिया के कई क्षेत्रों में तानाशाही प्रवृत्ति दिखाई दे रही है.
अरुण पुरी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से मीडिया को इंटरव्यू देने से परहेज कर रहीं कांग्रेस की पूर्व-अध्यक्ष सोनिया गांधी इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के 17वें संस्करण के मंच पर देश और दुनिया से रूबरू हो रही हैं. 19 साल तक कांग्रेस का नेतृत्व करने वाली सोनिया गांधी हाल ही में राहुल गांधी को पार्टी की कमान सौंपने के बाद पहली बार किसी बड़े मंच पर शिरकत करेंगी. हालांकि यह कोई पहला मौका नहीं है जब सोनिया गांधी इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में शिरकत करने जा रही हैं. इससे पहले सोनिया ने 2004 में दिल्ली में आयोजित कॉन्क्लेव में शिरकत की थी. बाद में उनके नेतृत्व में कांग्रेस और यूपीए ने लगातार दो बार लोकसभा चुनावों में जीत हासिल कर केंद्र में सरकार बनाई.इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2018 के पहले अहम सत्र डेमोक्रेसी, डेमोग्राफी, डिमांड: मिस्ट्री ऑफ मिसिंग जॉब्स में केन्द्रीय मंत्री जयंत सिन्हा, कांग्रेस नेता सचिन पायलट, कोटक प्रमुख उदय कोटक, अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया और सेंटर फॉर पॉलिसी ऑल्टरनेटिव मोहन गुरुस्वामी ने शिरकत की. इस सत्र का संचालन राजदीप सरदेसाई ने किया.इस सत्र के दौरान राजदीप ने पूछा कि आखिर देश इतनी अच्छा आर्थिक रफ्तार के साथ भाग रहा है तो नौकरियां कहां है. जयंत सिन्हा ने कहा कि देश में बेरोजगारी इतनी बड़ी समस्या नहीं है जितना कांग्रेस दावा कर रही है. सचिन पायलट ने कहा कि बीजेपी का यह दावा कि देश में कई ऐसे क्षेत्र में नौकरियां आई हैं जिसे आंकड़ों में नहीं दर्शाया जा सका है पूरी तरह गलत है. पायलट ने कहा कि पूरी ग्रोथ सिर्फ आंकड़ों में है लेकिन नई नौकरियों को लाने की कोशिश करने की जरूरत है.
पायलट ने कहा कि केन्द्र सरकार को यह मानने की जरूरत है कि देश में रोजगार बड़ी चुनौती है क्योंकि इसे नकार कर कोई फायदा नहीं होगा.इस सत्र के दौरान उदय कोटक ने कहा कि एजुकेशन और हेल्थकेयर के क्षेत्र में बड़ी नौकरियां आ सकती हैं. कोटक ने कहा कि 60 के दशक में भारत और चीन में लगभग एक समान जीडीपी थी. लेकिन फिर 70, 80 और 90 के दशक में चीन इतना आगे निकल गया कि हमें अगले कई दशक लगाने होंगे उसकी बराबरी करने के लिए.अरविंद पनगढ़िया ने कहा कि जॉबलेस ग्रोथ की पूरी डीबेट पूरी तरह बकवास है. अरविंद ने कहा कि यदि विकास दर बढ़ रही है तो जाहिर है कि लोगों को रोजगार मिल रहा है. अरविंद ने कहा कि कई सेक्टर में आ रही नई नौकरियों को आंकड़ों में शामिल नहीं किया जा रहा है. लिहाजा देश में बेरोजगारी से बड़ी समस्या अर्ध-बेरोजगारी की है. देश में लोगों के लिए नौकरियां हैं लेकिन जरूरत अच्छी नौकरियों की है.मोहन गुरुस्वामी ने कहा कि बीते 17 वर्षों में बेरोजगारी अपने न्यूनतम स्तर पर है लिहाजा मौजूदा सरकार इस बात को मान नहीं रही है कि देश में बेरोजगारी खतरनाक स्तर पर है. सच्चाई यही है कि देश में इकोनॉमी बढ़ रही है लेकिन फायदा सिर्फ 1 फीसदी लोगों को हो रहा है. इसका नतीजा है कि देश में नई नौकरी नहीं पैदा हो रही है.उदय कोटक ने कहा कि देश में नौकरी देने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं है. नीजि क्षेत्र को इस काम में ज्यादा अहम भूमिका निभाने की जरूरत है. वहीं सचिन पायलट ने कहा कि सबसे पहले यह पोलिटिकल क्लास और खास तौर पर सत्तारूढ़ क्लास की जिम्मेदारी है कि उनकी नीतियों से देश में रोजगार के नए संसाधन पैदा हों.की-नोट एड्रेस: सोनिया गांधी
सोनिया गांधी ने कहा कि पब्लिक स्पीकिंग मेरे लिए बहुत स्वाभिक नहीं है लिहाजा मैं पढ़ने में ज्यादा समय देती हूं. अब मैं एक सामान्य कांग्रेस कार्यकर्ता के तौर पर पार्टी में हूं. सोनिया गांधी ने कहा कि वह देश से पूछना चाहती हैं कि क्या मई 2014 से पहले देश एक ब्लैकहोल था और सिर्फ इस तारीख के बाद ही देश ने सबकुछ किया है.
सोनिया गांधी ने कहा कि सत्तारूढ़ सरकार की तरफ से उन्मादी बयान जानबूझ कर दिए जा रहे हैं और इसके गलत परिणाम हमारे सामने होंगे. मौजूदा समय में खुद के विषय में सोचने पर भी हमला किया जा रहा है. धार्मिक तनाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है. दलितों और महिलाओं पर सुनियोजित हमला किया जा रहा है. ऐसी स्थिति में उस भारत का क्या हुआ जो हम बनाना चाहते थे.हमें तेज चलने की जरूरत है लेकिन इतना तेज भी नहीं कि बड़ी जनसंख्या पीछे छूट जाए. सोनिया गांधी ने कहा कि मैक्सिमम गवर्नमेंट का क्या मतलब है जब देश में लोगों को नौकरी नहीं दी जा सकती है. सोनिया गांधी ने कहा कि नोटबंदी ने किस तरह अर्थव्यवस्था को पीछे ढ़केल दिया यह पूरा देश जानता है. वहीं किसानों की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है. सोनिया ने कहा कि हमें चीजों को उसी तरह देखने की जरूरत है जैसी वह वास्तविकता में हैं न कि उसे पैकेज करके.अब सोनिया गांधी दूसरी बार इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के मंच पर ऐसे समय पर आ रही हैं जब विपक्ष में बैठी कांग्रेस 2019 की जंग में जाने के लिए राहुल गांधी के नेतृत्व में तैयार हो रही है. वे इंडिया टुडे कॉन्क्लेव की इस साल की थीम दि ग्रेट चर्न- ट्रायंफ्स एंड ट्रिब्यूलेशन्स पर कीनोट एड्रेस (9 मार्च) देंगी.सोनिया गांधी ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ने के बाद अब उनके पास अधिक समय है. लिहाजा इस समय में वह राजीव गांधी से जुड़े पुराने दस्तावेजों को पढ़ने और परिवार की जिम्मेदारी निभाने में लगा रही है. अरुण पुरी ने पूछा कि क्या पार्टी का पद छोड़ने के साथ उनका राजनीतिक सफर खत्म माना जाए. सोनिया ने कहा कि वह राहुल के साथ पार्टी के मामलों पर लगातार बातचीत करती रहती हैं. वहीं सोनिया ने कहा कि उनकी कोशिश है कि वह देश में एक सेक्युलर फ्रंट को तैयार करने में भूमिका अदा करें जिससे देश की राजनीति को अच्छी दिशा मिलती रहे.राहुल गांधी को सलाह के मुद्दे पर सोनिया ने कहा कि वह अपना मत किसी पर थोपने की कोशिश नहीं करती है. लिहाजा यह जरूरी कि उन्हें उनका काम करने की पूरी स्वतंत्रता रहे. सोनिया ने कहा कि पार्टी के सभी नेताओं का काम करने का अपना तरीका है. राहुल की भी अपनी स्टाइल है. राहुल की कोशिश रही है कि कांग्रेस में नई जान फूंकने के कदम उठाए जाएं, हालांकि इस कोशिश में वरिष्ठ नेताओं को भूलने की नहीं बल्कि युवाओं को उनके साथ आगे लाने की है.सोनिया ने कहा कि कांग्रेस की लगातार 10 साल तक सरकार रही लिहाजा 2014 में कुछ एंटीइन्कम्बेंसी थी. इसके साथ ही कांग्रेस को नरेन्द्र मोदी के सामने मार्केटिंग में मात खानी पड़ी. लिहाजा, सोनिया ने कहा कि कांग्रेस को आम आदमी से कनेक्ट करने के लिए नई स्टाइल की जरूरत है. इसके साथ ही कांग्रेस को अपने प्रोग्राम और पॉसिलीज को नए तरीके से पेश करने की जरूरत है.2014 के आमचुनावों में भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा बना लेकिन यह मुद्दा गलत आंकड़ों और दावों पर तैयार किया गया था. सीएजी की भूमिका भी इस मुद्दे को बढ़ाने में अहम थी. उस वक्त गुजरात में गैस के मुद्दे पर भी सीएजी ने सवाल उठाया था लेकिन अब उस मुद्दे को उठाने की आजादी नहीं है वहीं मौजूदा सरकार इस मामले में कुछ नहीं कर रही है.मैं मोदी को नहीं जानती. बतौर प्रधानमंत्री उन्हें संसद में अथवा देश और दुनिया में अलग-अलग कार्यक्रमों में जरूर देखती हूं. लेकिन निजी तौर पर मैं उन्हें नहीं जानती. सोनिया ने कहा कि बीजेपी के सपोर्टर अब संसद में उनका विरोध कर रहे हैं. टीडीपी, शिवसेना जैसी पार्टियां भी अब उनका विरोध कर रही हैं.सोनिया ने कहा कि 2019 में मुख्य मुद्दा बीजेपी द्वारा बीते 5 साल के दौरान किए गए वादे होंगे क्योंकि पूरा कार्यकाल खत्म होने के बाद भी उनके सारे वादे सिर्फ सुनहरे वादे ही रह गए. मुझे पूरा भरोसा है कि बीजेपी के अच्छे दिन एक बार फिर उनके लिए शाइनिंग इंडिया बनने जा रहा है.

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