फारूक टकला 19 मार्च तक CBI हिरासत में, तीस सालों से दाऊद के साथ कर रहा था काम

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मुंबई: 1993 मुंबई सीरियल बम धमाकों के आरोपी फारूक टकला को मुंबई की टाडा अदालत ने 19 मार्च तक सीबीआई हिरासत में भेज दिया है. अंतर्राष्ट्रीय डॉन दाऊद इब्राहिम के करीबी टकला को गुरुवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था. हिरासत में फारूक से पूछताछ की जाएगी. जहां वह दाऊद इब्राहिम के बारे में कई अहम जानकारियां दे सकता है.मोहम्मद फारुक यासीन मंसूर उर्फ फारूक टकला (57) की गिरफ्तारी के बाद उसे दिल्ली स्थिति सीबीआई हेडक्वार्टर लाया गया. जिसके बाद उसे पेशी के लिए मुंबई लाया गया. सीबीआई की ओर से वकील दीपक साल्वी ने कोर्ट को बताया कि टकला की मुंबई बम धमाकों में अहम भूमिका थी और वो बम धमाके की साज़िश में दाऊद के साथ शामिल था.इंटरपोल ने 1995 में टकला के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था. जानकारी के मुताबिक, फारूक बम धमाके के वक्त मुंबई में नहीं था लोकिन धमाकों से पहले दुबई में दाऊद इब्राहिम, अनीस इब्राहिम, टायगर मेमन की धमाकों की साजिश रचने के लिए जो मीटिंग हुई थी उसमें फारुक भी शामिल था. सीबीआई के अनुसार इस मीटिंग के बाद पाकिस्तान ट्रेनिंग के लिए भेजे गए बम कांड के गुनाहगारों के रहने, खाने से लेकर आने-जाने का सारा इंतजाम फारुक ने ही किया था.फारूक को दाऊद का दाहिना हाथ माना जाता है जो पिछले तीस सालों से दाऊद के साथ काम करता आ रहा है. विशेष सरकारी वकील उज्जवल निकम ने कहा कि फारूक की गिरफतारी ने पहली बार जांच एजेंसी को मौका दिया है कि वे सबूतों के साथ ये साबित कर पाएं कि 1993 बम धमाकों में पाकिस्तान खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ था. अब तक केवल आरोपियों के बयान से ये बात कही जा रही थी. लेकिन फारूक ही पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी और दाऊद के बीच की कड़ी था.फारूक ने ही इस्लामाबाद एयरपोर्ट पर ट्रेनिंग लेने जा रहे आतंकियों को बिना इमिग्रेशन किए (पासपोर्ट पर ठप्पा) पाकिस्तान में दाखिल किया और पाकिस्तान से दुबई भेजा. इसके लिए आईएसआई ने मदद की. हालांकि फारूक के वकील फरहाना शाह और उसके भाई ने सभी आरोपों को बेबुनियाद करार दिया है.सूत्रों के मुताबिक, फारूक पिछले 25 सालों से दुबई और दुसरे देशों में दाऊद का काम संभाल रहा था और वहां बड़े बिजनेसमैन के तौर पर जाना जाता था. बम धमाकों के बाद से फारूक डी गैंग का काम देखता था. 1993 से पहले ये दोनों भाई दाऊद के साथ उसके सभी गैर-कानूनी धंधों में शामिल थे. ये दोनों भाई दाऊद के इतने खास थे कि 1992 दाऊद की बहन हसीना पारकर के पति की मौत का बदला लेने के लिए किए गए जेजे शुटऑट में भी इन्हें आरोपी बनाया गाया था.

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