UP राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस का बसपा को समर्थन, भाजपा के नौवें प्रत्याशी की राह मुश्किल

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राज्यसभा की दस सीटों के लिए भाजपा के आठ के साथ ही सपा के एक प्रत्याशी की जीत तय मानी जा रही है।
लखनऊ । उत्तर प्रदेश के राज्यसभा की दस सीटों के लिए होने वाले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नौवें प्रत्याशी की राह कठिन करने में कांग्रेस ने नई चाल चली है। कांग्रेस ने आज यहां पर बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी को अपना समर्थन देने की घोषणा की है।
कांग्रेस के विधायक दल के नेता अजय कुमार लल्लू ने आज बहुजन समाज पार्टी विधायक दल के नेता लालजी वर्मा के साथ आज बैठक की। इस बैठक के बाद कांग्रेस ने बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी पूर्व विधायक भीमराव अंबेडकर को अपना समर्थन देने की घोषणा की है। दस राज्यसभा सीटों के लिए बसपा की तरफ से पूर्व विधायक भीमराव अंबेडकर ने पर्चा दाखिल कर दिया है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक सामान्य कार्यकर्ता भीमराव अंबेडकर को मैदान में उतार कर लड़ाई को न सिर्फ रोचक बना दिया है बल्कि एक साथ कई सियासी चाल भी खेली है। भीमराव अंबेडकर 2007 में इटावा से बसपा के टिकट पर विधायक रह चुके हैं।
कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजय कुमार लल्लू ने कहा सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए हम राज्यसभा में बहुजन समाज पार्टी को वोट देंगे। शनिवार को विधायकों की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि केंद्रीय नेतृत्व से बात करने के बाद कांग्रेस विधानमंडल दल ने यह फैसला किया है।
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राज्यसभा की खाली हो रही उत्तर प्रदेश की दस सीट के लिए सियासी हलचल को देखते हुए शनिवार को कांग्रेस ने विधान मंडल दल के नेता लल्लू सिंह ने विधायकों के साथ बैठक करके एलान किया कि वो राज्यसभा चुनाव में बीएसपी के उम्मीदवार को समर्थन देगी। फिलहाल इस एलान के बाद विपक्षी पार्टियों में हलचल तेज हो गई है। सर्वाधिक दस सीटों के लिए उत्तर प्रदेश में चुनाव होने हैं। जिसमें से विधायक संख्या बल के हिसाब से भारतीय जनता पार्टी आठ उम्मीदवारों की जीत तय है। एक सीट सपा के खाते में जाएगी। दसवीं सीट के लिए बसपा ने सपा से समर्थन मांगा है। अब इनको कांग्रेस के सात विधायकों का समर्थन मिल गया है।
राज्यसभा की सीट जीतने के लिए कुल 37 विधायकों का समर्थन चाहिए। ऐसे में समाजवादी पार्टी के दस अतिरिक्त के साथ कांग्रेस के सात विधायकों का साथ मिलने से भीमराव अंबेडकर की राह बेहद आसान होती जा रही है। बहुजन समाज पार्टी के 19 विधायकों के साथ अंबेडकर को सपा के अतिरिक्त दस तथा कांग्रेस के सात वोट पक्के हो गए हैं। आज की बैठक के बाद लालजी वर्मा तथा अजय कुमार लल्लू के कदम से मायावती को यकीन है कि कांग्रेस का हर विधायक उनके प्रत्याशी के लिए राज्यसभा में वोट करेगा।
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भाजपा के नौवें प्रत्याशी की राह मुश्किल
राज्यसभा की दस सीटों के लिए भाजपा के आठ के साथ ही सपा तथा बसपा के एक-एक प्रत्याशी की जीत तय मानी जा रही है। ऐसे में भाजपा अगर नौवां प्रत्याशी उतारती है तो सपा, बसपा व कांग्रेस के तालमेल से उनका खेल बिगड़ सकता है। अभी भाजपा से वित्त मंत्री अरुण जेटली के रूप में सिर्फ एक प्रत्याशी की घोषणा हुई है। माना जा रहा है कि भाजपा यहां पर विपक्ष की चालों को देखते हुए नौ उम्मीदवार उतारेगी। भाजपा और उसके सहयोगी दलों के विधानसभा में 324 विधायक हैं।
राज्यसभा सदस्य चुनाव के लिए एक उम्मीदवार को 37 विधायकों के वोट की जरूरत पड़ेगी। दस सीटों पर हो रहे चुनाव में भाजपा के आठ उम्मीदवारों की जीत पक्की है। नौवें उम्मीदवार के लिए भाजपा के पास 28 विधायकों के वोट हैं। उसे नौ अतिरिक्त वोट की आवश्यकता पड़ेगी। निर्दल विधायक अमनमणि त्रिपाठी, राजा भैया, विनोद सरोज और विजय मिश्रा ने राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा को वोट दिया था। भाजपा ने राज्यसभा चुनाव में भी चारों निर्दल विधायकों के वोट हासिल करने का हर संभव प्रयास शुरू किया है। नौवीं सीट पर जीत के लिए शेष पांच वोट के लिए भाजपा के रणनीतिकार सपा तथा कांग्रेस के विधायकों पर नजरें गड़ाए हैं।

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