बिहार में कक्षा आठ तक के दो करोड़ स्‍कूली बच्‍चों की वार्षिक परीक्षा आरंभ

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बिहार के सरकारी व सहायता प्राप्‍त सरकारी स्‍कूलों में कक्षा आठ तक के दो करोड़ स्‍कूली बच्‍चों की वार्षिक परीक्षा सोमवार को आरंभ हुई। पहले दिन हिंदी व उर्दू की परीक्षा है।
पटना । बिहार के सरकारी और सहायता प्राप्त प्रारंभिक स्कूलों में वार्षिक मूल्यांकन परीक्षा सोमवार से आरंभ हो गई है। पहले दिन प्रथम पाली में कक्षा एक से पांच तथा दूसरी पाली में कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। प्रथम पाली की परीक्षा सुबह 10:00 से 12:00 बजे तथा दूसरी पाली दोपहर 1:00 से 3:00 बजे के बीच है। आज पहले दिन हिंदी व उर्दू की परीक्षा है।
वार्षिक मूल्यांकन में कक्षा एक से आठ तक के लगभग दो करोड़ विद्यार्थी शामिल हैं। सभी जिलों में एक ही शिड्यूल और पैटर्न से मूल्यांकन कार्य संपन्न कराना है। पटना जिले में 6,95,178 विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। इनमें शहरी क्षेत्र के 70,067 तथा ग्रामीण क्षेत्र के 6,25,111 छात्र-छात्राएं हैं।
पटना के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (सर्वशिक्षा) रामसागर प्रसाद सिंह ने बताया कि सभी स्कूलों में बिहार शिक्षा परियोजना परिषद् द्वारा जारी शिड्यूल के अनुसार परीक्षा संचालित की जा रही है। 16 मार्च को मकतव, मदरसा और उर्दू विद्यालयों को छोड़कर सह शैक्षिक गतिविधियों का अवलोकन किया जाएगा। अन्य विद्यालयों के शैक्षणिक गतिविधियों का अवलोकन 18 को होगा।
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परीक्षा को लेकर विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावकों की सबसे बड़ी परेशानी है कोर्स का पूरा नहीं होना। विद्यार्थियों की मानें तो आधा से अधिक सिलेबस जैसे तैसे पूरा किया गया, बावजूद इसके कोर्स अधूरा है। शिक्षकों ने बताया कि आधे विद्यार्थियों को किताबें अक्टूबर में मिलीं। दिसंबर में शुकराना महोत्सव, जनवरी में ठंड के कारण छुट्टी, फरवरी में इंटर और मैट्रिक परीक्षाओं में शिक्षकों की ड्यूटी के कारण कक्षाएं ज्यादातर दिन स्थगित रहीं।
बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष ब्रजनंदन शर्मा का कहना है कि जब तक शिक्षकों के कार्यदिवस का दुरुपयोग नहीं रुकेगी, कोर्स पूरा करना संभव नहीं है। अधूरे कोर्स के बावजूद परीक्षा की जानकारी सरकार और विभाग दोनों को है। सरकारी स्कूल में पढऩे वाले बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।

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