दरभंगा हत्याकांड : पुलिस की जांच पर भी उठे कई सवाल, घटना में घायल शख्स का बयान क्यों नहीं हुआ दर्ज

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पटना: दरभंगा में ‘मोदी चौक’ को लेकर हुई हत्या का मामला भले ही जमीन विवाद में बदलता दिखाई दे रहा हो लेकिन कुछ सवाल अब भी पुलिस के सामने खड़े हैं. मसलन घायल कमलदेव यादव उर्फ भोला यादव के बयान पर प्राथमिकी दर्ज़ न कर पुलिस ने घर की महिला के बयान पर प्राथमिकी दर्ज़ क्यों की? जबकि पीड़ित कमलदेव बोलने की स्थिति में हैं और घटना के समय भी पुलिस को अपना बयान दर्ज़ कराया था. दूसरा सवाल जब घटना के पीछे की वजह साफ नहीं है तो पुरानी जमीन की रंजिश पर पुलिस का ध्यान केंद्रित क्यों हैं? तीसरा सवाल क्या जमीन विवाद रहते उस शख्स की किसी दूसरी वजहों से हत्या नहीं हो सकती? चौथा सवाल, अगर जमीन को लेकक विवाद पुराना था तो हत्या अब क्यों की गई? आखिर हत्या के दिन हुआ क्या था? पांचवा सवाल, घर की महिला के बयान पर प्राथमिकी दर्ज़ क्यों गई जबकि घटना में घायल एक शख्स जिंदा है और बोलने की स्थिति में है.

पुलिस के अनुसार, बिहार के दरभंगा जिले के सदर थाना क्षेत्र में दरभंगा के भदवा गांव निवासी व भाजपा कार्यकर्ता कमलदेव यादव उर्फ भोला यादव ने दो वर्ष पूर्व अपने घर के समीप स्थित एक चौक का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रख दिया और वहां ‘मोदी चौक’ का एक बोर्ड लगा दिया. इससे गांव के ही कुछ लोग नाराज थे. बता दें कि कमलदेव यादव के एक और भाई हैं तेजनारायण यादव हैं, जो अभी पंचायत स्तर के नेता हैं.

आरोप ये लगाया गया कि ‘मोदी चौक’ नाम रखने से नाराज से लाठी-डंडे व तलवार से लैस करीब दो दर्जन लोगों ने गुरुवार की रात कमलेश के घर पर हमला बोल दिया. इस हमले में कमलदेव के पिता रामचंद्र यादव (61) की तलवार से काटकर हत्या कर दी गई, जबकि कमलेश गंभीर रूप से घायल हो गया. पुलिस के मुताबिक, शुक्रवार को बताया कि घायल अवस्था में कमलदेव यादव और रामचंद्र यादव को दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच) में भर्ती कराया गया, जहां रामचंद्र यादव मृत करार दिये गये और कमलदेव उर्फ भोला यादव का इलाज चल रहा है.

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