कटकमसांडी : सरहुल के पूर्व संध्या बेस के सरना धर्मावलम्बियों को सदर विधायक ने दिया तोहफ़ा

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नई दिल्ली
जेएनयू छात्र संघ की पूर्व सदस्य शहला रशीद ने विरोध-प्रदर्शन के दौरान एक घायल बच्चे को इलाज के लिए न जाने के आरोप वाली वायरल पोस्ट पर सफाई दी है। शहला ने ट्विटर पर कई ट्वीट कर आरोपों को नकारते हुए इन्हें झूठ करार दिया है। बता दें कि यौन शोषण के आरोपी प्रफेसर की गिरफ्तारी के लिए प्रदर्शन के दौरान शहला और प्रदर्शनकारी छात्रों पर आरोप है कि उन्होंने एक महिला को उसके खून बह रहे बच्चे के साथ होने पर भी जाने नहीं दिया।फेसबुक पर निकिता सारा नाम की एक महिला की पोस्ट वायरल है। निकिता ने दावा करते हुए लिखा है, ‘मैंने ट्रैफिक जाम में फंसे एक बेहोश बच्चे को देखा, जो मां की गोद में था और जिसके शरीर से खून बह रहा था। कार में बैठी मां ट्रैफिक जाम से निकलने के लिए लोगों से गुहार कर रही थी लेकिन हर कोई रास्ता ढूंढने में था। मैंने देखा जेएनयू के छात्र ढपली पर आजादी के गाने गा रहे थे और डांस कर रहे थे। मैंने बताया कि ये एक मात्र रोड है जिससे लोग करीब के तीन बड़े अस्पताल पहुंच सकते हैं। मैंने वहां शहला रशीद को मीडिया को इंटरव्यू देते देखा। मैंने इंटरव्यू को रोककर उनको समस्या बताने की कोशिश की। शहला रशीद बस मुझसे ये पूछती रही कि क्या मैं कभी कॉलेज पढ़ने के लिए गई हूं या नहीं?’इस आरोप के जवाब में शहला रशीद ने ट्विटर पर लगातार कई ट्वीट किए। उन्होंने कहा, ‘निकिता सारा जिस घटना का जिक्र कर रही हैं, मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। मैंने अपने आसपास कई और छात्रों से भी चर्चा की, लेकिन किसी को भी ऐसी किसी घटना के बारे में पता नहीं है। अगर ऐसा कुछ होता तो हम जरूर महिला और बीमार बच्चे की सहायता करते।’ शहला ने अपने दावे के समर्थन में एक साथ कई ट्वीट किए और उन्होंने कुछ और लोगों के किए ट्वीट को भी रीट्वीट किया।शहला ने एक ट्वीट में बिना किसी का नाम लिए यह भी कहा कि मुझे पता है कि बीजेपी के लोग हम पर प्रदर्शन करने के बदले में हमलावर होंगे, लेकिन उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी ऐसा करेंगे।

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