इराकः सुषमा बोलीं- सच नहीं बोल रहा मसीह, बदूश से बरामद किए गए सभी शव

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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मंगलवार को बताया कि इराक में अपहृत हुए भारतीयों को मोसुल से बदूश ले जाया गया, जहां से सभी के शव बरामद कर लिए गए हैं। उन्होंने भारतीयों के अपहरण होने से लेकर जांच तक पूरी घटना बयां की।
कैसे पकड़े गए थे भारतीय
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बताया कि एक कैटरर से पता चला कि आईएस ने इन भारतीयों को दोपहर का खाना खा कर लौटते समय पकड़ा। पहले इन लोगों को मोसुल के एक कपड़ा फैक्ट्री में बंधक बनाकर रखा गया। कैटरर ने बताया कि उसे एक व्यक्ति ने खुद को अली बताते हुए फोन कर कहा कि वह बांग्लादेशी है। उसे आईएस के आदेशानुसार, बांग्लादेश भेजा जाना चाहिए। इस तरह पंजाब का रहने वाला हरजीत मसीह कैटरर द्वारा लाई गई वैन में अली बताकर बच निकला। सुषमा ने आगे बताया, अगले दिन गिनती होने पर एक भारतीय कम मिला तो आईएस ने सभी अपहृत भारतीयों को बदूश भेज दिया।
स्थानीय लोगों ने सुराग दिया
भारतीयों के मारे जाने की खबरों के बीच और मोसुल से आईएस के सफाए के बाद विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह लापता भारतीयों की खोज में वहां गए। कपड़ा फैक्ट्री और कैटरर से सुराग मिलने के बाद सिंह इराक में भारतीय राजदूत तथा एक इराकी अधिकारी के साथ बदूश की जेल में गए।
कब्र खोद शव निकाले
बदूश में कुछ स्थानीय लोगों ने एक सामूहिक कब्र के बारे में बताया। डीप पेनिट्रेशन रडार की मदद से पता लगाया गया कि कब्र में शव हैं। इराकी अधिकारियों की मदद से शवों को खोद कर निकाला गया। बदूश गांव मोसुल शहर के उत्तर पश्चिम में स्थित है।
राज्य सरकारों की मदद
सुषमा ने बताया लापता भारतीय पंजाब, हिमाचल प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के थे। इन राज्यों की सरकारों के सहयोग से, लापता भारतीयों के परिजनों के डीएनए के नमूने बगदाद भेजे गए। पहले शव का डीएनए मैच कर गया। यह शव संदीप नामक व्यक्ति का था।
सबूत जुटाना मुश्किल था
सुषमा ने कहा कि सबूत जुटाना बहुत ही मुश्किल था। एक निर्मम आतंकी संगठन आईएसआईएस और सामूहिक कब्रें….। शवों का ढेर था। इनमें से अपने लोगों के शवों का पता लगाना, उन्हें जांच के लिए बगदाद भेजना आसान नहीं था।
सच नहीं बोल रहा मसीह
सुषमा स्वराज ने कहा कि एक भारतीय हरजीत मसीह किसी तरह बचकर भारत लौट आया था लेकिन उसने जो कहानी सुनाई थी, वह झूठी थी। सुषमा स्वराज ने बताया कि हरजीत मसीह ने अपना नाम बदलकर अली कर लिया और वह बांग्लादेशियों के साथ इराक के इरबिल पहुंचा जहां से उसने फोन किया था। सुषमा ने बताया कि यह कहानी इसलिए भी सच्ची लगती है, क्योंकि इरबिल के नाके से ही हरजीत मसीह ने उन्हें फोन किया था। सुषमा ने आगे बताया, हरजीत की कहानी झूठी इसलिए लगती है क्योंकि जब उसने फोन किया तो मैंने पूछा कि आप वहां (इरबिल) कैसे पहुंचे? तो उसने कहा मुझे कुछ नहीं पता।’ सुषमा ने आगे कहा, ‘मैंने उनसे पूछा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि आपको कुछ भी नहीं पता? तो उसने बस यह कहा कि मुझे कुछ नहीं पता, बस आप मुझे यहां से निकाल लो।
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वीके सिंह की सराहना
लापता भारतीयों की खोज के अथक प्रयासों के लिए विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह की सराहना करते हुए सुषमा ने कहा कि बदूश में तीनों को खोज के दौरान एक छोटे से मकान में जमीन पर सोना पड़ा था।
पहचान के लिए डीएनए परीक्षण
डीएनए परीक्षण रक्त, वीर्य, बाल, विक्षत मृत शरीर के अवशेष, दांत या हड्डी के टुकड़े आदि के माध्यम से व्यक्ति की पहचान की जा सकती है। प्रत्येक व्यक्ति में माता-पिता दोनों के डीएनए होते हैं। व्यक्ति के डीएनए की छाप को उसके माता या पिता की डीएनए छाप से मिलाकर उसकी पहचान की जा सकती है। इसके लिए माता-पिता के खून के नमूने लिए जाते हैं। इस परीक्षण की रिपोर्ट आने में 15 दिन तक का समय लगता है।
भारत में 1989 में हुई शुरुआत
डीएनए की खोज अंग्रेजी वैज्ञानिक जेम्स वॉटसन और फ्रांसिस क्रिक के द्वारा वर्ष 1953 में की गई थी। इस खोज के लिए उन्हें वर्ष 1962 में नोबेल पुरस्कार सम्मानित किया गया। भारत में डीएनए परीक्षणों की शुरुआत 1989 में लालजी सिंह ने हैदराबाद में की थी।

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