आंखों देखी: जानलेवा यमुना एक्सप्रेस वे की एक रात- सड़क पर बिखरा कांच, फंसी हुईं गाड़ियां, बिलखतीं महिलाएं

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आगरा
यमुना एक्सप्रेस वे पर रविवार को हुए एक भीषण हादसे में एम्स के तीन डॉक्टरों की मौके पर मौत हो गई थी। इसके दो दिन बाद मंगलवार देर रात उसी जगह से करीब 50 गज की दूरी पर एक और ऐक्सिडेंट हुआ। यह भिड़ंत एक ट्रक और चार कारों के बीच हुई थी। हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया के संवाददाता 30 मिनट के अंदर घटनास्थल पर पहुंच गए और वहां का आंखों-देखा हाल बयां किया।
यमुना एक्सप्रेस वे स्थित एक ढाबे में हम हेड कॉन्स्टेबल सुरेश चंद्रा के इंटरव्यू की तैयारी कर रहे थे। तभी अचानक उनका स्मार्टफोन बजा, यह यूपी पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल के लिए ड्यूटी कॉल थी। करीब 13 किलोमीटर दूरी पर एक ऐक्सिडेंट हुआ था। उन्होंने फोन पर पूछा, ‘मेजर है या माइनर?’ ऐसा लग रहा था कि यह बड़ा ऐक्सिडेंट है। सुरेश चंद्रा ने लोकेशन पूछी तो बताया गया- ‘एलएचएस 88।’
यमुना एक्सप्रेस वे पर पुलिस, जेपी के गश्त इकाइयों के साथ मिलकर काम करती है। जेपी समूह ने ही एक्सप्रेस वे का निर्माण और प्रबंधन किया है। साथ काम करने के लिए दोनों ने अपना कम्यूनिकेशन कोड भी तैयार किया है। आगरा साइड एलएचएस (लेफ्ट हैंड साइड) कहलाती है और नोएडा साइड आरएचएस (राइट हैंड साइट) है। वहीं 88 का मतलब दिल्ली से जगह की दूरी है। सुरेश चंद्रा के पास डायल 100 लिखी हुई ब्लैक इनोवा कार है, वह उसी से घटनास्थल का रुख करते हैं। हम भी उनके साथ जाते हैं।
ऐक्सीडेंट के बाद का हालमथुरा सड़क हादसा: जन्मदिन का जश्न ही बन गया डॉ.हर्षद और उनके साथियों की मौत की वजह
ऐक्सिडेंट की जगह वहां से सिर्फ 50 गज की दूरी पर थी, जहां पिछले रविवार को ही दुर्घटना में एम्स के तीन डॉक्टरों की मौत हो गई थी और पांच बुरी तरह घायल हो गए थे। उस जगह को जेपी की रूट पट्रोल यूनिट ने नारंगी कोन रखकर घेर लिया था, और चंद्रा को मौके पर फोन किया था। ऐक्सिडेंट स्थल पर पहुंचे तो वहां का नजारा काफी भयावह था।सभी गाड़ियां एक दूसरे में फंसी हुई थीं
फ्रोजन हरी मटर ले जा रहा एक मिनी ट्रक सड़क पर एक ओर उलटा पड़ा था। दर्जनों बोरियां सड़क पर गिरी हुई थीं और उनसे मटर निकलकर बिखरे हुए थे। चार दूसरी गाड़ियां- आई20, वैगनआर- अर्टिगा, और इकोस्पोर्ट, ट्रक और एक दूसरे में घुसी हुई थीं जिनमें से दो बुरी तरह क्षतिग्रस्त थीं। कुछ बदहवास महिलाओं और लड़कियों का समूह सड़क किनारे पर बैठा हुआ था। कुछ रो रही थीं और ज्यादातर डरी हुईं और कुछ असमंजस में थीं। उनमें से एक जमीन पर लेटी हुई थी, उसका सिर किसी की गोद में था। एक भी खून का छींटा नहीं था लेकिन यह काफी हैरान करने वाला था।
हादसे से डरीं महिलाएं
इतना भीषण ऐक्सिडेंट और किसी को नुकसानचार में से तीन कारें दिल्ली में रहने वाले टेलिकॉम बिजनसमैन राजविंदर सिंह सेंगर की थीं। उन्होंने बताया, ‘शाम करीब 8 बजे जालौन में मेरी मां का निधन हो गया। पूरा परिवार अंतिम संस्कार के लिए वहां जा रहा था। यह वाकई जादू है कि इतने भीषण ऐक्सिडेंट में किसी को नुकसान नहीं पहुंचा।’ इस पर कॉन्स्टेबल ने उनसे कहा, ‘शायद यह आपकी मां की आपके परिवार के लिए दुआ का असर था।’ कार में लगे एयरबैग्स ने भी अपना काम दिखाया। पीछे सीट पर बैठे कुछ लोगों को थोड़ी बहुत चोटें आईं।
लापरवाही ने बनाया हादसों का एक्सप्रेसवेघायल ने बताया कि जेपी पट्रोल यूनिट 20 मिनट पर यहां पहुंच गई थी। 10 मिनट बाद ऐंबुलेंस आ गई। घायलों को मेडिकल वैन से मथुरा अस्पताल ले जाया गया जो वहां से 15 मिनट की दूरी पर था। जेपी पट्रोल ऑफिसर ने बताया, ‘घायल हमारी प्राथमिकता हैं। अगर कोई गंभीर रूप से घायल होता है तो हम उसे ऐंबुलेंस आने से पहले अस्पताल छोड़कर आते।’

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