केंद्र का दावा- आधार डेटा पूरी तरह सुरक्षित, SC ने पूछा NRI पेंशनर्स का कैसे बनेगा आधार?

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नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट में आधार मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा है कि आधार के लिए लिया जाने वाला डेटा पूरी तरह सुरक्षित है। जिस सेंटर (बिल्डिंग) में इसे रखा गया है, वह 13 फीट ऊंची और पांच फीट चौड़ी दीवार से घिरा है। इसके अलावा केंद्र ने यह भी दलील दी कि सही लोगों के पास सरकारी सुविधाओं का लाभ पहुंचे इसलिए आधार जरूरी है। इस बात में वजन देने के लिए मौजूदा एनडीए सरकार ने कांग्रेस + के पूर्व पीएम राजीव गांधी के एक कथन का इस्तेमाल किया। केंद्र ने कहा, ‘जब एक रुपये भेजे जाते हैं तो जरूरतमंदों के पास सिर्फ 15 पैसे पहुंच पाते हैं। सही लोगों तक पूरा फायदा पहुंचाने के लिए आधार जरूरी है।’
केंद्र ने कहा, ‘नैशनल फूड सिक्यॉरिटी का लाभ जरूरतमंदों को मिलना चाहिए और आधार इस उद्देश्य को पूरा करता है। कुल 35 मंत्रालय और विभाग की 144 योजनाओं के लिए आधार को लागू किया जा रहा है। देखा गया था कि बीपीएल को भेजे जाने वाले अनाज में 58 फीसदी अनाज नहीं पहुंच पाता था। 1 करोड़ 93 लाख बोगस राशन कार्ड बने हुए थे। साथ ही मनरेगा के लिए 12 फीसदी बोगस अकाउंट खुले हुए थे। इन तमाम चीजों पर आधार के कारण रोक लगी है। आधार से सरकारी योजनाओं का लाभ उसके असली हकदारों के पास पहुंच पा रहा है।’
केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने कहा, ‘आधार के जरिए सरकार गंभीर प्रयास कर रही है कि लोगों को सेफ किया जा सके। कई देशों ने इस तरह के पहचान शुरू किए हैं। यूआईडीएआई के सीईओ को कोर्ट में इस पूरे मामले को बताने की इजाजत दी जानी चाहिए। वह तमाम तकनीकी, डेटा सिक्यॉरिटी, सर्विलांस आदि के मुद्दे पर प्रजेंटेशन दे सकते हैं।’ इसके बाद चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि अगर जरूरी हुआ तो उन्हें बुलाया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने पूछे कई सवाल
कोर्ट का सवाल: याचिकाकर्ता ने कहा है कि आधार निजता के अधिकार का उल्लंघन है। इससे डेटा का सुरक्षा पर भी खतरा है?
केंद्र का जवाब : एक मामला निजता के अधिकार का है और दूसरा बिना भूख के लोगों को जीने का अधिकार देना है। आधार के जरिये लोगों को फायदे और सब्सिडी दी जा रही है। जो लोग समाज में हाशिये पर हैं उन्हें भोजन, शेल्टर और आजीविका दी जा रही है। ये जीवन का अधिकार है, जो कि निजता के अधिकार पर भारी है। जीवन के अधिकार सबसे बड़ा है।
विदेश गए पेंशनर के बारे में कोर्ट का गंभीर सवाल
दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट + ने केंद्र से एक गंभीर सवाल किया। कोर्ट ने कहा, ‘कई लोग ऐसे हैं जो नौकरी के बाद विदेश अपने बच्चों के पास चले जाते हैं। एनआरआई के लिए आधार का प्रावधान नहीं है। ऐसे में पेंशनर जो विदेश में रहते हैं, उन्हें पेंशन कैसे मिल पाएगा। पेंशनर को आधार न होने के कारण पेंशन से वंचित होना पड़ा है। पेंशन न तो लाभ है, न सब्सिडी है और न ही सेवा है। सरकार को इस मामले में उपाय करना चाहिए। आधार ऐक्ट की धारा-3 कहती है कि जो रेजिडेंट्स नहीं है उसे आधार नहीं मिलेगा।’

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