बिहार दिवस: उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने नीतीश के विकास मॉडल को सराहा, बोले- गांधीजी के विचारों पर चलें

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पटना
उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा है कि जाति, धर्म और परिवारवाद के आधार पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की संस्कृति वसुधैव कुटम्बकम की रही है। यहां रहने वाले सभी धर्म व जाति के लोग भारतीय हैं। सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने से ही देश और समाज का विकास संभव है। पटना के गांधी मैदान में गुरुवार को बिहार दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने सीएम नीतीश कुमार के विकास मॉडल की भी जमकर सराहना की।
बिहार दिवस समारोह के उद्घाटन के मौके पर उपराष्ट्रपति नायडू ने नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा, ‘नीतीश ने राजनीति का अजेंडा बदल दिया है और बिहार में विकास की राजनीति की शुरुआत की है, जो सराहनीय है।’ उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि देश में जाति के आधार पर राजनीति नहीं होने दें। उन्होंने कहा कि सिद्धांतविहीन राजनीति करने वालों का साथ मत दीजिए।
‘विकास के साथ सुशासन जरूरी’
उपराष्ट्रपति ने कहा कि राजनीति में जितना जरूरी सिद्धांत है, उतना ही आचरण भी जरूरी है। विकास के साथ सुशासन जरूरी है। सबका साथ-सबका विकास के तर्ज पर ही देश का विकास हो सकता है। गांधीजी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपिता ने समाज को बदलने का जो संदेश दिया था, आज बिहार में उसे लागू करने का प्रयास किया जा रहा है।
‘दहेजप्रथा और शराबबंदी सराहनीय कदम’
उन्होंने नीतीश कुमार द्वारा दहेजप्रथा, बाल विवाह और शराबबंदी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों की प्रशंसा की। उपराष्ट्रपति ने कहा कि गांधीजी ने महिलाओं को सम्मान देने की आवश्यकता बताई थी और आज महिलाएं अपनी पहचान खुद बना रही हैं। उन्होंने कहा कि बिहार की धरती को महापुरुषों की धरती बताते हुए उन्होंने कहा कि अहिंसा की शुरुआत बिहार की धरती से हुई थी।

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