ड्रोन उड़ाना अब सिर्फ शौक ही नहीं करियर ऑप्शन भी बनेगा

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बेंगलुरु
ड्रोन उड़ाना पहले सिर्फ शौक तक ही सीमित हुआ करता था लेकिन धीरे-धीरे इसमें करियर ऑप्शन भी तैयार हो रहा है। कर्नाटक के वेस्टर्न घाट पर खेती करने वाले वसंत भाट अपनी फसलों की निगरानी और उनमें दवाओं के छिड़काव के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनकी कंपनी अब ड्रोन पायलट्स की हायरिंग भी कर रही है।
इस बारे में वसंत कहते हैं, ‘ड्रोन की मदद से इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल की मात्रा कम हो जाती है क्योंकि हमें वहीं छिड़काव करना पड़ता है, जहां इसकी जरूरत होती है। ये ड्रोन एक दिन में 12-13 एकड़ की फसल कवर कर लेते हैं और किसी अतिरिक्त मजदूर की जरूरत भी नहीं पड़ती है।’एक अनुमान के तहत, देश में लगभग 40,000 यूएवी हैं और इसमें से ज्यादातर प्राइवेट ओनर्स के पास हैं। आजकल ड्रोन्स का इस्तेमाल वेडिंग फटॉग्रफी, रेलवे ट्रैक की मैपिंग, सोलर प्लांट के लिए सर्वे और मिलिट्री-पुलिस सर्विलांस के लिए किया जाने लगा है। ऐसे में ड्रोन फ्लाइंग अब ड्रोन उड़ाने वाले युवाओं के लिए एक तेजी से उभरता करियर ऑप्शन बनता जा रहा है। यह भी उम्मीद की जा रही है कि एक ड्रोन पायलट को शुरुआत में 30000 से 40000 रुपये मिल सकेंगे।भारत में फिलहाल ड्रोन उड़ान के लिए डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन या स्थानीय प्रशासन की मंजूरी जरूरी है लेकिन उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में इसके लिए नई और आसान नीतियां बनाई जाएंगी। हालांकि, ड्रोन पाइलट ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट्स में ट्रेनिंग लेने वाले स्टूडेंट्स की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।

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