कर्नाटक में बजा चुनावी बिगुल, 12 मई को डाले जाएंगे वोट

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नई दिल्ली
कर्नाटक चुनाव का बिगुल बज चुका है। मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने मंगलवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ऐलान किया कि कर्नाटक में 12 मई को चुनाव कराए जाएंगे। यह सिंगल फेज इलेक्शन होगा। इसके साथ ही कर्नाटक में तत्काल प्रभाव से आचार संहिता लागू हो गई। हालांकि मुख्य चुनाव आयुक्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक विवाद भी पैदा हो गया। दरअसल, उनके ऐलान से पहले ही चुनाव की तारीख लीक हो गई।रावत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तारीखों की घोषणा अभी नहीं की थी, इससे पहले ही बीजेपी के आईटी हेड अमित मालवीय ने 12 मई को चुनाव और मतगणना 18 मई को, इस घोषणा के साथ ट्वीट कर दिया। पत्रकारों ने जब प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ही यह मुद्दा उठाया तो मुख्य चुनाव आयुक्त रावत ने साफ कहा कि इस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उधर, विवाद बढ़ने पर अमित मालवीय ने ट्वीट डिलीट कर दिया।
अमित मालवीय का ट्वीट
चुनाव आयोग के मुताबिक 17 अप्रैल 2018 को अधिसूचना जारी होगी। उम्मीदवार 27 अप्रैल तक नाम वापस ले सकेंगे। इसके बाद 12 मई को मतदान होगा और मतगणना 15 मई को होगी।
EVM से कराए जाएंगे चुनाव
मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने बताया कि कर्नाटक में 4 करोड़ 96 लाख वोटर हैं। 97 फीसदी फोटो पहचान पत्र जारी किए गए हैं। चुनाव में 56 हजार पोलिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। महिलाओं और दिव्यांगों के लिए विशेष इंतजाम किए जाएंगे। सभी पोलिंग स्टेशनों पर EVM के साथ VVPAT का भी इस्तेमाल होगा। इलेक्ट्रॉनिक मशीनों के बारे में लोगों को जागरुक किया जा रहा है।
रात में 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर पर बैन
रावत ने बताया कि 28 मई से पहले सभी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएंगी। लाउडस्पीकर का इस्तेमाल रात में 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक नहीं होगा। सुरक्षा के लिए केंद्रीय सुरक्षाबलों की भी तैनाती की जाएगी। चुनावी खर्चे पर नजर रखी जाएगी। एक उम्मीदवार 28 लाख रुपये ही खर्च कर सकता है। बिना दस्तावेज के बड़ी रकम जब्त कर ली जाएगी।
पेड न्यूज पर सख्ती
पेड न्यूज रोकने के लिए उन्होंने कहा कि मीडिया की मॉनिटरिंग की जाएगी। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विज्ञापनों पर भी नजर रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि मीडिया हमेशा से चुनाव आयोग का फ्रेंड रहा है।
कर्नाटक असेंबली में 224 सीटें हैं। इस समय राज्य में कांग्रेस की सरकार है और वह अपने इस आखिरी बड़े राज्य में सत्ता बरकरार रखना चाहेगी। उधर, बीजेपी मोदी मैजिक के सहारे सत्ता हथियाना चाहेगी। हाल ही में पूर्वोत्तर में विजय पताका लहरानेवाली बीजेपी के लिए भी यह चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल है। यही वजह है कि चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी सभाएं करनी शुरू कर दी थीं। हालांकि कांग्रेस पार्टी भी अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ रही है।
कर्नाटक चुनाव को लेकर बीजेपी कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा रहा है कि पार्टी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी प्रचार के लिए मैदान में उतारा है। इस समय बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह खुद 2 दिनों के कर्नाटक दौरे पर हैं।
सीटों का गणित
कुल 224 सीटों में से सरकार बनाने के लिए 113 सीटों की जरूरत होती है। वर्तमान में सत्तारूढ़ कांग्रेस के पास 122 सीटें हैं जबकि बीजेपी के पास 43 और जेडीएस के पास 37 सीटें हैं। आपको बता दें कि कर्नाटक असेंबली का कार्यकाल मई 2018 में समाप्त हो रहा है।
चुनावों के ऐलान से पहले कांग्रेस ने चला दांव
चुनावों से ठीक पहले राज्य की कांग्रेस सरकार ने लिंगायत समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देकर बड़ा दांव चला है। इस प्रस्ताव पर अब केंद्र सरकार को फैसला करना है, ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस के इस दांव का बीजेपी के नेतृत्ववाली NDA सरकार क्या तोड़ निकालेगी, जिससे चुनाव नतीजे भी प्रभावित न हों।

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