नवी मुंबई अंतरराष्‍ट्रीय हवाई अड्डा के सामने संकट, नहीं हुए गांव खाली

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नवी मुंबई
नवी मुंबई के प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से विस्थापित हो रहे कुछ ग्रामीणों ने अपनी मांगों के पूरा न होने तक अपना गांव छोड़कर जाने से साफ इनकार कर दिया है। ग्रामीणों की इस मांग पर ‘सिडको’ने भी अपना रुख सख्त कर लिया है।
ग्रामीणों के विस्थापन और पुनर्वास में तेजी लाने के लिए‘सिडको’ने ‘सर्वाधिक प्रोत्साहन भत्ता’ का अनुदान घोषित कर रखा है। नवी मुंबई में बन रहे हवाईअड्डे के निर्माण के लिए राज्य सरकार ने ‘सिडको’को बतौर नोडल-एजेंसी नियुक्त कर रखा है। तीन चरणों में घोषित इस भत्ते के प्रथम चरण की अवधि इसी 31 मार्च को समाप्त हो रही है। सर्वाधिक प्रोत्साहन भत्ते की यह धनराशि राज्य सरकार द्वारा घोषित एकमुश्त मुआवजे की योजना से अतिरिक्त है।
अपनी मांग पर अड़े ग्रामीण
राज्य सरकार और सिडको दोनों के ही कई प्रयासों के बावजूद चार गांवों के कई ग्रामीण अपनी कुछ मांगों के न माने जाने तक अपने गांव वाले घर से हटने के लिए तैयार नहीं हैं। इन गांवों में उलवे, कोंबडभुजे, गणेशपुरी, तरघर व कुछ उपगांव (पुरवा) शामिल हैं। नवी मुंबई में बनाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की परियोजना और उससे जुड़ी अन्य सुविधाओं के निर्माण के लिए स्थानीय ग्रामीणों को स्थानांतरित किया जा रहा है। जिस जमीन को हवाईअड्डे के निर्माण के लिए चुना गया है, वहां कई गांव बसे हुए हैं। इन गांवों के स्थानीय निवासियों को क्रमबद्ध तरीके से पुनर्वसित किया जा रहा है। इस पुनर्वसन के लिए राज्य सरकार ने पहले से ही कई मुआवजों व अनुदानों की घोषणा कर रखी है।
निर्माण में आ सकती है बाधा
अगर स्थानीय ग्रामीण अपने मूल गांव से जल्द ही नहीं हटे तो इसका असर हवाई अड्डे के निर्माण की गति पर पड़ेगा। नवी मुंबई के अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के निर्माण के लिए निर्धारित अवधि को कई बार आगे बढ़ाया जा चुका है। अब सिडको ने इसके लिए वर्ष 2019 के आखिर तक पहली उड़ान की तिथि निर्धारित कर रखी है। ऐसे में सिडको के लिए एक-एक दिन बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। फिलहाल इस समय हवाई अड्डा निर्माण क्षेत्र में निर्माण कार्य से जुड़ी पूर्व की तैयारियां चल रही हैं। इनमें उलवे की पहाड़ी की ऊंचाई को छांटकर छोटा करने, गाढ़ी नदी के एक हिस्से के मूल प्रवाह की धारा की दिशा को मोड़ने, मैन्ग्रोव के पुनर्रोपण, निर्माण क्षेत्र में मिट्टी व पत्थर की भराई तथा निर्माण क्षेत्र में आसमान से होकर गुजरे अति उच्च दाब वाले बिजली के तारों को भूमिगत करने जैसे काम शामिल हैं।
1 जून के बाद कोई भत्ता नहीं
अपना पुराना घर व गांव जल्द से जल्द हस्तांतरित करने के लिए सिडको ने ‘सर्वाधिक प्रोत्साहन भत्ते’ की योजना लागू कर रखी है। सिडको ने स्पष्ट किया है कि इस योजना के प्रथम चरण के लिए ग्रामीणों के आवेदन सिर्फ 31 मार्च तक ही स्वीकार किए जाएंगे। इस अवधि के भीतर आवेदन पत्र देने वाले सभी ग्रामीणों को 500 रुपये प्रति वर्गफुट की दर से प्रोत्साहन भत्ता दिया जाएगा, 29, 30 व 31 मार्च को सार्वजनिक छुट्टियों के दिन भी सिडको आवेदन पत्र स्वीकार करेगा। इस अवधि की समाप्ति के बाद इस साल 30 अप्रैल तक स्थानांतरण का आवेदन पत्र देने वाले ग्रामीणों को 300 रुपये प्रति वर्ग फुट तथा 31 मई तक आवेदन पत्र देने वाले ग्रामीणों को मात्र 100 रुपये प्रति वर्गफुट का प्रोत्साहन भत्ता दिया जाएगा।
इन मांगों को लेकर अड़े हैं ग्रामीण
•उनके नए घरों के निर्माण के लिए 1000 रुपये प्रति वर्गफुट की दर से निर्माण खर्च दिया जाए
•सड़क, बिजली व पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं को अग्रिम रूप से उपलब्ध कराया जाए
•उनके गांव के पुराने मंदिरों को नए मंदिरों में स्थानांतरण किया जाए। साथ ही खेल के मैदान, स्कूल व अस्पताल की सुविधाओं को अग्रिम रूप से उपलब्ध कराया जाए
•ग्रामीणों की मौजूदा जमीन से तीन गुना अधिक कार्पेट क्षेत्र वाला भूखंड दिया जाए
•उनके नए घरों के बन जाने तक अथवा 18 महीने तक रहने के लिए घरों का बाजार भाव दर से किराया अदा किया जाए•हवाई अड्डे के लिए चिह्नित जमीन पर बसे हैं 4 गांव
•गांवों के विस्थापितों को किया जाना है पुनर्वसित
•ग्रामीण चाहते हैं अधिक भत्ता और सुविधाएं
•विस्थापितों पर ‘सिडको’ का रुख भी हुआ सख्त
नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के सामने संकट बरकरार, खत्म होने को है सर्वाधिक प्रोत्साहन भत्ता की अवधि

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