पहली छमाही में सरकार जुटाएगी कम उधारी, बॉन्ड बाजार में आएगी रैली

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नई दिल्ली, मुंबई
बॉन्ड बाजार में शॉर्ट टर्म रैली की संभावना बनी है क्योंकि सरकार ने बाजार से उधारी जुटाने की अपनी योजना में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ट्रेंड से उलट फिस्कल इयर 2018-19 के लिए तय उधारी का दो तिहाई टारगेट पहली छमाही में पूरा नहीं करेगी। इससे अगले कुछ ट्रेडिंग सेशन में बॉन्ड यील्ड में 15-20 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आ सकती है क्योंकि इन्वेस्टर्स का मूड सुधरने पर खरीदारी जोर पकड़ेगी। 100 बेसिस पॉइंट्स 1 पर्सेंटेज पॉइंट के बराबर होता है।सरकार नए फिस्कल इयर में अप्रैल से सितंबर के बीच पूरे साल के लिए तय उधारी के आधे से थोड़ी कम जुटाएगी। इससे इकॉनमिक ग्रोथ में तेजी के बीच डेट मार्केट में उथल-पुथल कम होगी, बॉन्ड यील्ड और इंटरेस्ट रेट से दबाव घटेगा। सरकार ने फिस्कल इयर 2018-19 की पहली छमाही में 2.88 लाख करोड़ रुपये जुटाने का प्लान बनाया है। पिछले फिस्कल इयर की पहली छमाही में सरकारी बॉन्ड्स से 3.72 लाख करोड़ रुपये की उधारी जुटाई गई थी। सरकार की विज्ञप्ति के मुताबिक, ‘नए फिस्कल के टारगेट के हिसाब से यह 47.5% होता है जो पहले के वर्षों में 60 से 65% था।’फिस्कल डेफिसिट कम करने के लिए सरकार अब स्मॉल सेविंग्स स्कीमों से ज्यादा रकम जुटाने पर फोकस करेगी। फंड सप्लाइ बढ़ाने के लिए वह सरकारी सिक्यॉरिटीज में फॉरन इन्वेस्टमेंट लिमिट भी बढ़ाना चाहती है। इन उपायों से सरकार की फंड की मांग घटेगी, इंटरेस्ट रेट और बॉन्ड यील्ड पर दबाव घटेगा। हाल के महीनों में इंटरेस्ट रेट और बॉन्ड की यील्ड में बढ़ोतरी का रुझान बना था। यील्ड में कमी आने से सरकार को यह फायदा होगा कि उसे स्मॉल सेविंग्स स्कीमों का रेट बढ़ाना नहीं पड़ेगा। इससे बैंकों को भी डिपॉजिट रेट बढ़ाना नहीं पड़ेगा और लेंडिंग रेट भी कम रहेगा।ईटी ने खबर दी थी कि सरकारी सिक्यॉरिटीज के बेंचमार्क वाले स्मॉल सेविंग्स रेट्स अगले क्वॉर्टर में मामूली तौर पर बढ़ सकते हैं। सरकार ने रिजर्व बैंक के साथ सलाह-मशविरा करके अपना उधारी कैलेंडर तैयार किया है। सरकार के बयान के मुताबिक, ‘1 अप्रैल 2018 से एफपीआई लिमिट बढ़ाने को लेकर सरकार और आरबीआई की बातचीत अंतिम दौर में पहुंच गई है।’ नए फिस्कल की पहली छमाही में बाजार से कम उधारी जुटाने की सरकार की योजना से दूसरे बॉरोअर्स को वाजिब रेट पर फंड जुटाने के पर्याप्त मौके मिलेंगे।इकॉनमिक अफेयर्स सेक्रेटरी सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा, ‘हम डेट मार्केट से लोड घटाना चाहते हैं।’ सरकार के कम उधारी जुटाने से बॉन्ड मार्केट में वोलैटिलिटी घटेगी और यील्ड पर दबाव कम होगा। सोमवार को 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 6 बेसिस पॉइंट्स चढ़कर 7.62% हो गई, जो शुक्रवार को 7.56% थी।दरअसल, बाजार मान रहा था कि सरकार पहली छमाही में भारी भरकम रकम जुटाएगी, लेकिन हुआ इसका उलटा। गौरतलब है कि पिछले साल जुलाई में सरकारी बॉन्ड्स की यील्ड 6.41% पर पहुंच गई थी। डीलरों का कहना है कि महंगाई नरम पड़ने पर बॉन्ड की यील्ड 7% की तरफ बढ़ती नजर आ सकती है।

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