चीन और पाकिस्तान संग मालदीव की दोस्ती से भारत के लिए पैदा होगा खतरा

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मालदीव में अब्दुल्ला यामीन ने आपातकाल को बेशक वापस ले लिया है लेकिन उनके कुछ फैसले भारत को नाराज कर सकते हैं। इसकी वजह है मालदीव सरकार द्वारा ना केवल चीन को बल्कि पाकिस्तान को भी तवज्जो देना। हालिया मामला भारत को दरकिनार करते हुए पाकिस्तान के सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा को बातचीत के लिए बुलाने का है। इस बारे में भारत सरकार को कोई जानकारी नहीं दी गई।
इंडिया फर्स्ट की नीति होने के बावजूद पहले कि सरकारों की तरह वर्तमान सरकार ने भारत के अहम मुद्दों पर चर्चा करके उसे विश्वास में नहीं लिया। इन मामलों में भारत की नाक के नीचे मालदीव में चीन को ओसिएन ऑबजर्वेटरी बनाने की अनुमति देना और देश में निवेश करना शामिल है।मालदीव में पाकिस्तान सेना प्रमुख बाजवा के दौरे को लेकर जब एक भारतीय अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कहा- वर्तमान मालदीव सरकार चीन और पाकिस्तान से बातचीत को लेकर काफी गोपनीयता बनाए हुए है। जबकि इससे पहले की सरकारों में ऐसा नहीं होता था। वे सरकारें ऐसे किसी भी मामले में पहले भारत को विश्वास में लिया करती थीं। उन्होंने कहा कि भारत बाजवा की 31 मार्च को होने वाले मालदीव दौरे पर नजदीक से नजर बनाए हुए है।बता दें कि पिछले महीने ही खबर आई थी कि चीन ने मालदीव को आधिकारिक रूप से उत्तरी मालदीव में स्थित माकुनुधु के पश्चिमी एटोल पर जॉइंट ओशियन ऑब्जर्वेशन सेंटर के रूप में वर्णन किया है, जो लक्षद्वीप से दूर नहीं है। यहां तक कि मालदीव ने इसके लिए भारत से कहा था कि ऑब्जर्वेटरी की कोई मिलिट्री योजना नहीं है। मालदीव सरकार ने ऑब्जर्वेटरी के अग्रीमेंट की कॉपी भी भारत के साथ साझा करने से मना कर दिया था।

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