डीजल या पेट्रोल, अपने लिए चुनें कौन सी कार? एक्सपर्ट से समझिए

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नई दिल्ली (अंकित दुबे)। पेट्रोल और डीजल की कीमतें डी-रेग्युलेट होने के बाद इनके बीच का अंतर लगातार कम होता जा रहा है। देश के चार बड़े महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में महज 10 रुपये प्रति लीटर का फर्क है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि फिर डीजल गाड़ियां खरीदना कितना फायदा का सौदा रह गया है? क्योंकि डीजल गाड़ियां एक तो महंगी होती हैं और लंबे समय में इनकी सर्विस का खर्चा भी पेट्रोल गाड़ियों से ज्यादा होता है। अपनी इस खबर में हम आपको एक्सपर्ट की मदद से यह बता रहे हैं कि आप कार खरीदते समय यह कैसे चुने कि पेट्रोल कार लेना आपके लिए फायदे का सौदा है या डीजल।
क्या कहते हैं ऑटो एक्सपर्ट?
ऑटो एक्सपर्ट रंजॉय मुखर्जी का मानना है कि नई कार अगर खरीद रहे हैं और आपका रोज का अप-डाउन 50 किलीमीटर है तो आपके लिए पेट्रोल इंजन वाली कार ही बेहतर होगी। वहीं, अगर आप रोजाना 50 से 100 किलोमीटर का सफर करते हैं तो आपके लिए डीजल विकल्प सही रहेगा।
डीजल कार की जगह पेट्रोल कार खरीदने का यह है सबसे बड़ा कारण- आसान शब्दों में समझिए नोएडा में रहने वाला कोई खख्स अगर दिल्ली में नौकरी करता है और उसके घर से ऑफिस की दूरी तकरीबन 25 किलोमीटर है तो ऐसे में उसकी कार रोज 50 किलोमीटर ही चलती है। अगर वह शख्स 25 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देने वाली डीजल कार खरीददा है तो उसकी कीमत करीब 6.40 लाख रुपये होगी। दिल्ली में इस वक्त डीजल के दाम 63.82 रुपये प्रति लीटर है, यानी रोजाना शख्स उस कार में दो लीटर डीजल फूंकेगा जिसकी कीमत 127.64 रुपये होगी। इस हिसाब से महीने का खर्च 3829 रुपये आएगा।
– अगर यही शख्स डीजल कार ना खरीदते हुए नॉर्मल पेट्रोल कार खरीदता है तो उसकी कीमत 5.40 लाख रुपये होगी जो कि डीजल वेरिएंट से करीब 1 लाख रुपये सस्ती है। इस वक्त दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 72.96 रुपये है और पेट्रोल कार 50 किलोमीटर का सफर तय करने में ढाई लीटर पेट्रोल फूंकेगी और रोजान खर्च इसका 182 रुपये होगा। यानी महीने में पेट्रोल कार चलाने वाले व्यक्ति को 5472 रुपये खर्च करने होंगे। यह डीजल कार की तुलना में 1643 रुपये ज्यादा हैं।
ऊपर दिए गए उदाहरण से आप समझ ही गए होंगे कि डीजल कार खरीदने पर आपकी सिर्फ 1643 रुपये महीने की बचत है। ऐसे में अगर आप 1 लाख रुपये महंगी डीजल कार खरीद रहे हैं तो आपको 1 लाख रुपये वसूलने में पूरे 5 साल लग जाएंगे। यहां ये याद रखना भी जरूरी है कि महानगरों में ट्रैफिक जाम और सड़कों की स्थिति को देखते हुए कार का माइलेज भी काफी कम हो जाता है।
अगर आप इन 1 लाख रुपये को 5 साल के लिए 10 फीसद सालाना ब्याज दर के हिसाब से फाइनेंस भी कराते हैं तो आपकी मासिक किश्त करीब 2500 रुपये रुपये पड़ेगी और दो कि डीजल कार में बच रहे हर महीने 1643 रुपये से भी ज्यादा है। इतना ही कार खरीदने के बाद पेट्रोल कारों के मुकाबले डीजल कारों का मेंटीनेंस भी थोड़ा महंगा साबित होता है। हालांकि ऑटो एक्सपर्ट मानते हैं कि नई टेक्नोलॉजी के चलते यह अब बराबर होता जा रहा है।
पुरानी गाड़ी में डीजल या पेट्रोल इंजन में से कौन बेहतर?
रंजॉय मुखर्जी ने बताया कि अगर आप 5 साल पुरानी गाड़ी भी खरीद रहे हैं तो उसमें भी पेट्रोल विकल्प ही चुनें क्योंकि डीजल कार भले ही पेट्रोल वेरिएंट से थोड़ी सस्ती मिल जाए मगर वह गाड़ी काफी ज्यादा चली होती हैं। इतना ही नहीं पुरानी डीजल गाड़ियों का पेट्रोल के मुकाबले मेंटेनेंस भी ज्यादा होता है और पेट्रोल गाड़ियों में आने वाले समय में CNG किट का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

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