हाई कोर्ट का आदेश, यूपीपीसीएस-प्री 2017 का संशोधित परिणाम घोषित करे आयोग

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इलाहाबाद
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की पीसीएस-प्री परीक्षा 2017 परिणाम के पुनर्मूल्यांकन का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि नए सिरे से परीक्षा कराना सही नहीं होगा। कोर्ट ने चार सवालों को रद्द करने, चार सवालों के सी और डी दोनों उत्तर विकल्पों को सही मानने और चार सवालों के डी विकल्प भरने वालों के उत्तर सही मानकर परिणाम घोषित करने को कहा है। कोर्ट ने कहा है कि पुनर्मूल्यांकन में असफल होने वाले अभ्यर्थियों का परिणाम रद्द समझा जाएगा। यह आदेश जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस सरल श्रीवास्तव की खंडपीठ ने दिया है।
राहुल सिंह और दर्जनों अन्य परीक्षार्थियों की याचिकाओं को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। परीक्षा में सवालों के उत्तर विकल्प गलत होने के आधार पर परिणाम को चुनौती दी गई थी। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने पीसीएस प्री 2017 के पांच प्रश्नों के गलत उत्तरों को चुनौती देने वाली याचिकाएं निस्तारित कर दीं। कोर्ट ने लोक सेवा आयोग को फिर से मूल्यांकन का निर्देश दिया। कहा कि ए, बी, सी और डी सीरीज के प्रश्न संख्या 67, 140, 44 और 106 को डिलीट किया जाए। ए, बी, सी व डी सीरीज के प्रश्न संख्या 121, 44, 98 व 10 में जिन अभ्यर्थियों ने सी या डी उत्तर दिया है, उन्हें पूरे अंक दिए जाएं। साथ ही ए, बी, सी व डी सीरीज के प्रश्न संख्या 56, 129, 33 व 105 में जिन अभ्यर्थियों ने डी उत्तर दिया है, उन्हें पूर्ण अंक दिए जाएं।
कोर्ट ने कहा कि, पुनर्मूल्यांकन की इस प्रक्रिया के बाद जो अभ्यर्थी क्वालीफाई करें, उन्हें मुख्य परीक्षा में शामिल किया जाए। साथ ही पहले के नंबरों से सफल जो अभ्यर्थी पुनर्मूल्यांकन में असफल हो जाएंगे, उन्हें मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं किया जाए। पीसीएस प्री का रिजल्ट 19 जनवरी 2018 को घोषित हुआ था। इसमें 14032 अभ्यर्थियों को लोक सेवा आयोग ने मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया था। प्री परीक्षा 24 सितम्बर 2017 को हुई थी। पीसीएस के 677 पदों के लिए 455297 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था और 246654 अभ्यर्थी पीसीएस प्री में शामिल हुए थे।

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