हनुमान जयंती: नाम लेने भर से दूर होते हैं सारे कष्‍ट, इन 7 हनुमान मंद‍िरों में दर्शन से म‍िलेगा व‍िशेष लाभ

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देश भर में हुनमान जयंती के द‍िन श्री राम भक्त हनुमान की पूजा-पाठ के आलवा उनके दर्शन के ल‍िए मंद‍िरों में काफी भीड़ है। जगह-जगह भंडारा, प्रसाद व‍ितरण आद‍ि कि‍या जा रहा है। मान्‍यताओं के मुताबि‍क हनुमान जी का नाम लेने भर से रोग और बुरी आत्‍माओं का प्रभाव खत्‍म हो जाता है। ऐसे में आज इस व‍िशेष द‍िन पर देश के इन 7 म‍ंद‍िरों में हनुमान जी के दर्शन से लाभ होगा…
लेटे हुए हनुमान जी:
इलाहबाद में किले से सटा संगम के समीप एक प्राचीन हनुमान मंद‍िर है। यहां हर द‍नि भक्‍त दर्शन के ल‍िए आते हैं लेक‍िन मंगलवार के लि‍ए यहां ज्‍यादा भीड़ होती है। इस मंद‍िर में हुनमान जी एक 20 फीट लम्बी प्रतिमा में लेटी मुद्रा में हैं।
हनुमान धारा:
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में हनुमाना धारा है। यहां पहाड़ के सहारे हनुमानजी की एक विशाल मूर्ति के ठीक सिर के पास दो जल के कुंड हैं ज‍िनमें हमेशा ही जल की धारा बहती रहती है। हनुमानजी को स्पर्श करते हुई जलधार को हनुमान धारा कहते हैं।
उलटे हनुमान जी:
उलटे हुए हनुमान जी का मंद‍िर उज्जैन से केवल 30 किमी दूरी पर स्थित है। यहां पर हनुमान जी की उलटे मुंह वाली सिंदूर से सजी प्रत‍िमा स्‍थापि‍त है। जि‍ससे यह हनुमान जी उलटे हनुमान जी के नाम से जाने जाते हैं।
श्री पंचमुख आंजनेयर हनुमान:
तमिलनाडु के कुम्बकोनम में श्री पंचमुखी आंजनेयर स्वामी जी का मठ है। यहां पर श्री हनुमान जी के ‘पंचमुख रूप’ के दर्शन क‍िए जा सकते हैं। मान्‍यता है कि‍ इस रूप को हनुमान जी ने अहिरावण और महिरावण के वध के ल‍िए धारण कि‍या था।
सालासर बालाजी:
इस ल‍िस्‍ट में सालासर हनुमानजी का यह मंदिर भी शाम‍िल है। यह मंद‍िर राजस्थान के चुरू जिले में है। यहां पर हनुमानजी की यह प्रतिमा बेहद अनोखी है। सालासर बालाजी दाड़ी व मूंछ से सुशोभित हैं। यहां पर दूर-दूर से लोग दर्शन के ल‍िए आते हैं।
श्री संकटमोचन मंदिर:
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में श्री संकट मोचन हनुमान मंद‍िर है। हनुमानजी की यह मूर्ति को लेकर मान्‍यता है क‍ि गोस्वामी तुलसीदासजी के तप एवं पुण्य से प्रकट हुई स्वयंभू मूर्ति है। इस मंदिर के समीप ही भगवान श्रीनृसिंह का मंदिर भी स्थापित है।
हनुमानगढ़ी मंद‍िर:
भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्‍या में भी एक हनुमान मंद‍िर है। जि‍से हनुमान गढ़ी के नाम जाना जाता है। यह मंदिर राजद्वार के सामने ऊंचे टीले पर स्थित है। 60 सीढिय़ां चढ़ने के बाद दर्शन हो पाते हैं। यहां पर भी बड़ी संख्‍या में हनुमान भक्‍त आते हैं।

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