बीजेपी सांसद साव‍ित्री बाई फुले ने द‍िखाए बागी तेवर, पूछा- मूर्तियां तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं

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लखनऊ
बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले ने लखनऊ के स्मृति उपवन में आयोजित ‘संविधान व आरक्षण बचाओ’ रैली में कहा कि संविधान निर्माता बाबा साहब (डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर) की ही मूर्तियां तोड़ी जा रही हैं। इसके खिलाफ हमें लड़ना होगा। दलितों को सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री या राष्ट्रपति भी बनने का सौभाग्य बाबा साहब की वजह से ही मिला है।साव‍ित्री बाई ने कहा, ‘मैं पूछना चाहती हूं कि जो मूर्तियां तोड़ी जा रही हैं, उन कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? एससी, एसटी और पिछड़ी जातियों की वेकंसी नहीं भरी जा रहीं हैं। कहा जा रहा है कि हम संविधान बदलने आए हैं। कभी कहते हैं कि समीक्षा की जाएगी और आरक्षण खत्म करेंगे।’
आरक्षण बचाने का संकल्‍प
रैली का आयोजन ‘नमो बुद्धाय जन सेवा समिति’ की ओर से किया गया था। सावित्री बाई फुले ने सबसे पहले संविधान और आरक्षण को बचाने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि आप सब लोग कसम खाएं कि बाबा साहब आंबेडकर के संविधान को बचाने के लिए अपनी जान भी गंवानी होगी तो पीछे नहीं हटेंगे।
उन्होंने कहा कि संविधान मूल भावना के अनरूप आज तक लागू नहीं हुआ। देश में 67 करोड़ लोग आज भी गरीब हैं। अनुसूचित जाति और जनजाति के लोग दर-दर की ठोकर खा रहे हैं। पैर छू जाने पर दलितों की पीट-पीटकर हत्या की जा रही है। घोड़े की सवारी करने पर मौत के घाट उतारा जा रहा है।
बागी तेवर के पीछे 2019 का अनुमान
बीजेपी सांसद सावित्री फुले के बगावती तेवरों की वजहें तलाशी जा रही हैं। यह भी सवाल उठ रहे हैं कि उनको अलग से भीड़ जुटाने की जरूरत क्यों पड़ी? कहीं वह 2019 से पहले बीजेपी से हटकर अपना भविष्य तो नहीं तलाश रहीं? सूत्रों के मुताबिक अगले लोकसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने प्रत्याशियों के चयन को लेकर मंथन शुरू कर दिया है।
माना जा रहा है कि बीजेपी कई वर्तमान सांसदों के टिकट काट सकती है। ऐसे में दलितों की भीड़ जुटाकर फुले अपनी ताकत दिखा रही हैं। बीजेपी से टिकट न मिला तो दूसरी पार्टी में जगह बनाने के लिए भी ताकत दिखाना जरूरी है।
फैसला बहुजन समाज के हाथ
इससे पहले रैली के संयोजक अक्षयवर नाथ कनौजिया ने कहा कि बाबा साहब ने जो दिया, उसे आज लोग छीनने का प्रयास कर रहे हैं। वे बाबा साहब के संविधान को बदलना चाहते हैं। आरक्षण खत्म करना चाहते हैं। वे राजतंत्र लाना चाहते हैं। वो राजा रहेंगे और बहुजन प्रजा। अब बहुजन समाज को फैसला करना है। हमने ही गलती की है। अब यह गलती हमें सुधारनी है।

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