सीबीएसई पेपर लीक: ऐक्शन में क्राइम ब्रांच, आज हो सकती है स्कूल प्रिंसिपल की गिरफ्तारी

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नई दिल्ली
सीबीएसई पेपर लीक मामले में चंद ‘छोटी मछलियों’ की गिरफ्तारी से पुलिस जांच पर सवाल खड़े होने लगे हैं। यही वजह है कि रविवार को गिरफ्तार आरोपियों का रिमांड लेना मुश्किल हो गया था। कोर्ट ने पुलिस पर सीधे-सीधे सवाल उठाए कि इस मामले की जांच एक दिन पहले लीक हुए पेपर से शुरू हुई थी, लेकिन पुलिस आधे घंटे पहले पेपर लीक करने वालों को पकड़ रही है। वे कौन लोग हैं, जो हाथ से प्रश्न-पत्र लिखकर एक दिन पहले लीक कर रहे थे? अदालत ने सवाल किया कि पुलिस ने पेपर लीक में शामिल दो टीचर तो अरेस्ट कर लिए, लेकिन उसी स्कूल के प्रिंसिपल को क्यों नहीं अरेस्ट किया, जो मुख्य कड़ी है। टीचर तो उनकी शह पर काम कर रहे थे। ऐसी क्या वजह रही कि प्रिंसिपल को छोड़कर सिर्फ टीचर अरेस्ट किए? इन सवालों के चलते कोर्ट ने बड़ी मुश्किल से आरोपियों की 2 दिन की रिमांड मंजूर की थी।
स्कूल प्रिंसिपल की होगी गिरफ्तारी?
पुलिस सूत्रों का कहना है कि कोर्ट की फटकार के बाद पुलिस सोमवार को उस प्रिंसिपल को अरेस्ट कर सकती है। पुलिस अधिकारी उनकी ज्यादा उम्र (लगभग 55 साल) होने का हवाला देकर बचाव कर रहे हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार, बचाव की वजह दूसरी भी हैं। हालांकि अब बताया जा रहा है कि प्रिंसिपल को आज दोपहर पूछताछ के लिए फिर बुलाया गया है। उसके बाद अरेस्ट करना लगभग तय है। जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, इस केस में पुलिस लगातार उलझ रही है। एक तरफ केंद्र का दबाव है कि गुनहगारों तक जल्द पहुंचा जाए। दूसरी ओर पेपर लीक करने वालों की चेन इतनी लंबी है कि पुलिस असली गुनगहारों से बहुत दूर है। यही वजह है कि आधे घंटे पहले पेपर लीक करने वाले कुछ आरोपियों को गिरफ्तार करके ‘केस सॉल्व’ करने का दावा किया जा रहा है।धारा 420 लगाने पर उठाने सवाल
इस मामले में आईपीसी की धारा 420 लगाने पर भी कोर्ट में सवाल उठे। कानून के जानकारों का कहना है कि इस धारा के तहत धोखाधड़ी की परिभाषा यह है कि धोखाधड़ी के चलते किसी का घाटा या किसी का फायदा हुआ हो। पेपर लीक का मामला उस परिभाषा से बिलकुल अलग है। इसलिए अदालत में यह सवाल उठे कि पुलिस इतनी जल्दबाजी में है कि केस में सही सेक्शन तक नहीं लगाए हैं। हड़बड़ी में छोटी मछलियों को अरेस्ट करके अपनी पीठ थपथपाने की कोशिश की गई है।
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हैरानी की बात यह भी है कि पुलिस पर इतने सवाल तब उठ रहे हैं, जब मामले की जांच में खुद जॉइंट सीपी और डीसीपी स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इसके बावजूद कोर्ट में पहली ही स्टेज पर पुलिस जांच पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस मामले में डीसीपी स्तर के अधिकारियों का कहना है कि मीडिया के सामने स्पेशल सीपी (क्राइम) ही पुलिस का पक्ष रखेंगे। ‘सान्ध्य टाइम्स’ ने स्पेशल सीपी (क्राइम) को पुलिस पर उठ रहे सवालों के बारे में डिटेल एसएमएस और वॉट्सऐप करके स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया। कई बार कॉल की, लेकिन उन्होंने न मैसेज का रिप्लाई किया, न कॉल रिसीव की।पेपर लीक मामले में कई सनसनीखेज खुलासे
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब तक की जांच में पता चला है कि एग्जाम से पहले प्रश्न पत्र को सीबीएसई सिंडिकेट बैंक की विभिन्न शाखाओं के लॉकर में जमा कराती है। एग्जाम वाले दिन सुबह-सुबह सीबीएसई के प्रतिनिधि अपने एरिया के बैंक से पेपर कलेक्ट करते हैं और फिर अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले एग्जामिनेशन सेंटर पर पहुंचाते हैं। स्कूल में पेपर पहुंचाने का समय लगभग 10 बजे होता है। लेकिन बवाना के इस निजी स्कूल में ऐसा नहीं हुआ। पुलिस की गिरफ्त में आए तीनों आरोपियों ने कहा है कि सीबीएसई अधिकारी केएस राणा एग्जाम वाले दिन सुबह 9 बजे तक प्रश्न पत्र स्कूल में पहुंचा देते थे। 9 बजकर 5 मिनट पर प्रश्न पत्र के लिफाफे को डी-सील कर दिया जाता था। स्कूल के छात्रों को सुबह 9 बजे बुला लिया जाता था। लगभग एक घंटे के अंतराल में छात्र-छात्राओं को प्रश्नों के उत्तर बता दिए जाते थे। इसके बाद स्कूल से ही एक बस में बैठाकर बच्चों को परीक्षा केंद्र ले जाया जाता था। इस स्कूल का परीक्षा केंद्र लगभग 2 किलोमीटर दूर एक स्कूल में था। इन आरोपों की सच्चाई जांची जा रही है। उस स्कूल प्रिंसिपल की भूमिका की भी जांच की जा रही है क्योंकि जांच में पता चला है कि उस स्कूल के बच्चों का सेंटर बवाना के इस कॉन्वेंट स्कूल में था।
16 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं स्कूल में
पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस स्कूल में 16 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। सीसीटीवी का डीवीआर जब्त कर लिया गया है। फुटेज खंगाली जा रही है। जिस कमरे में प्रश्नपत्र डी-सील किए जाते थे, वहां कोई सीसीटीवी नहीं लगा था। इसलिए पुलिस स्कूल रिसेप्शन, गेट व ग्राउंड में लगे कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि यह पता चल सके कि बच्चे कितने बजे स्कूल में आते थे और फिर वहीं से बस में सवार होकर परीक्षा केंद्र के लिए जाते थे।
स्कूल प्रिंसिपल के साथ साथ कुछ अन्य टीचरों पर भी तलवार
पुलिस सूत्रों के अनुसार सीबीएसई के नियमों के अनुसार हर परीक्षा केंद्र में कमिटी बनाई जाती है, जिसमें उस स्कूल का प्रिंसिपल व कुछ टीचरों को शामिल किया जाता है। यह कमिटी ही सुबह लगभग 10 बजे सीबीएसई से आए प्रश्न-पत्रों के लिफाफे को डी-सील करते हैं और अलग अलग क्लास रूम में भिजवाती है। डी-सील करते समय लिफाफे पर टाइम भी डाला जाता है और हर सदस्य उस पर हस्ताक्षर करता है। फिर उसका फोटो लेकर वाट्सऐप के माध्यम से सीबीएसई को भेजा जाता है। लेकिन इस मामले में काफी गड़बड़ी पाई गई है। अब तक की जांच में यह पता चला है कि प्रश्न-पत्रों को सुबह 9 बज कर 5 मिनट तक डीसील कर दिया जाता था लेकिन कमिटी लिफाफे पर टाइम 10 बजे का डालती थी, जिस पर प्रिंसिपल व कमिटी के अन्य सदस्य हस्ताक्षर करते थे।
बेहतर रिजल्ट के लिए किया जा रहा था पेपर लीक
दिल्ली पुलिस सूत्रों के अनुसार पेपर लीक कराने का मुख्य मकसद पैसा कमाना नहीं, बल्कि स्कूल की रेपुटेशन बढ़ाना था। स्कूल के लिए कहा जाता है कि यहां पढ़ने वाला बच्चा अव्वल अंक लाता है और डीयू में उसका दाखिला लगभग पक्का है। अब जांच चल रही है और उसके तार स्कूल के मालिक तक पहुंच रहे हैं कि क्या उन्हें इस कारगुजारी की भनक थी या नहीं? इस जांच की वजह यह कि स्कूल की रेपुटेशन का मुख्य लाभ स्कूल के मालिक को पहुंचता है। पुलिस सूत्रों ने यह भी बताया कि स्कूल के मालिक हरियाणा पुलिस से रिटायर्ड अधिकारी हैं, जिनके दिल्ली में तीन स्कूल हैं। तीनों बाहरी दिल्ली में, हरियाणा बॉर्डर से सटे इलाकों में स्थित हैं।
आरोपियों के मोबाइल में भी मिला है मैथ्स का हैंड रिटर्न प्रश्न पत्र
पुलिस सूत्रों ने दावा किया है कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों के मोबाइल से भी 10वीं क्लास का मैथ्स का पेपर मिला है। यह वही पेपर है, जो हैंड रिटन है और एक रात पहले ही वाट्सऐप के माध्यम से लीक कर दिया गया था। आरोपियों से इस संबंध में भी पूछताछ जारी है।सीबीएसई अधिकारी की भी गिरफ्तारी संभव
क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सीबीएसई के अधिकारी एसके राणा की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। शनिवार देर रात जॉइंट कमिश्नर आलोक कुमार खुद प्रीत विहार स्थित सीबीएसई के मुख्यालय गए थे और वहां जाकर राणा की भूमिका के बारे में सीबीएसई के वरिष्ठ अधिकारियों को बताया था। उसी का नतीजा है कि रविवार को राणा को निलंबित कर दिया गया। राणा को आज पूछताछ के लिए बुलाया गया है। उससे पूछा जाएगा कि जब पेपर सुबह 10 बजे सेंटर पर पहुंचाने होते हैं तो क्यों 9 बजे तक पहुंचा दिए गए। इसी तरह के कई सवाल राणा से किए जाएंगे। कुछ पुख्ता सामने आया तो गिरफ्तारी के भी चांस हैं। वैसे सीबीएसई की ओर से भी राणा के खिलाफ जांच शुरू करा दी गई है।

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