BJP ने सुलह के लिए शिवसेना को ऑफर की राज्यसभा डेप्युटी चेयरमैन की पोस्ट

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नई दिल्ली
बीजेपी ने अक्सर नाराजगी जताने वाले एनडीए के सहयोगी दल शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को संदेश भेजकर उनके किसी प्रतिनिधि को राज्यसभा के डेप्युटी चेयरमैन बनाने का ऑफर दिया है। ईटी को यह बात मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने दी है। संसद के ऊपरी सदन के उपसभापति का पद खाली होने जा रहा है क्योंकि पीजे कुरियन का कार्यकाल जल्द पूरा हो रहा है और बीजेपी यह पद सदन के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को नहीं देना चाहती।ठाकरे को यह ऑफर ऐसे समय में भेजा गया है, जब यह अफवाह खूब जोर-शोर से फैली है कि बीजेपी यह पद अपने पास ही रखना चाहती है। इसके संभावित दावेदार के रूप में भूपेंद्र यादव के नाम पर चर्चा हो रही है। पता चला है कि शिवसेना ने बीजेपी के ऑफर का जवाब नहीं दिया है क्योंकि यह न्योता ऐसे समय में आया है, जब देश के राजनीतिक हालात संवेदनशील हो गए हैं और इस बारे में बहुत सोच-समझकर फैसला करने की जरूरत होगी। बीजेपी के प्रति काफी आक्रामक रुख अपनाती रही शिवसेना ने अगला चुनाव अलग होकर लड़ने का फैसला किया है।सूत्रों ने बताया कि अगर शिवसेना सुलह का ऑफर मान लेती है तो इसका मतलब यह निकाला जा सकता है कि वह बीजेपी के साथ अपने मतभेद दूर करने को तैयार है। शिवसेना आक्रामक रुख इसलिए अपना रही है कि बीजेपी उसके राजनीतिक स्पेस में बड़े जोर-शोर से घुसपैठ कर रही है। उसे डर है कि अगले चुनाव के लिए होने वाले गठबंधन में बीजेपी की नजर ज्यादा सीटों पर होगी। सूत्रों के मुताबिक ऐसे में अगर सुलह का मामला राज्य सभा के डिप्टी चेयरमैन की पोस्ट से आगे निकल जाता है तो फिर उनको गठबंधन पर भी फैसला करना पड़ जाएगा।बीजेपी की अगुवाई वाली महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार दोनों में शिवसेना के प्रतिनिधि अब भी बने हुए हैं। इससे यह कहा जा सकता है कि शिवसेना ने बीजेपी से गठबंधन तोड़ने पर अब तक कोई फैसला नहीं किया है। अब अगर ठाकरे बीजेपी का ऑफर मान लेते हैं तो राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए नॉमिनेशन से जुड़ा मसला भी बहुत जटिल होगा। पार्टी के सबसे सीनियर लीडर संजय राउत का यह राज्यसभा का तीसरा कार्यकाल है। उनके सहयोगी वेणुगोपाल धूत का भी तीसरा कार्यकाल है जो राजनेता से ज्यादा कारोबारी माने जाते हैं। तीसरे मेंबर अनिल देसाई हैं, जिनका दूसरा कार्यकाल अभी शुरू ही हुआ है।अगर शिवसेना बीजेपी का ऑफर मान लेती है और राज्यसभा के उपसभापति का पद राउत को दे देती है तो उसके दैनिक मुखपत्र सामना के कार्यकारी संपादक को डेप्युटी चेयरमैनशिप पोस्ट की गैर राजनीतिक प्रकृति को देखते हुए अपना सुर नरम करना होगा। राउत अक्सर अखबार के जरिए बीजेपी और केंद्र की नीतियों की आलोचना करते रहते हैं।सरकार से टीडीपी के तीन सांसद हटा लिए जाने के बाद शिवसेना और अकाली दल राज्यसभा में राजग के दूसरे सबसे घटक दल बन गए हैं। दोनों दलों के राज्यसभा में तीन तीन सदस्य हैं। बीजेपी ने AIADMK को अपनी तरफ खींचने के लिए उसको तब डेप्युटी स्पीकर की पोस्ट ऑफर की थी, जब जयललिता पार्टी की जनरल सेक्रटरी थीं।

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