CAG रिपोर्टः दिल्ली सरकार में ढेरों खामियां,केजरीवाल बोले- दोषियों पर होगी कार्रवाई

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दिल्ली विधानसभा में मंगलवार को उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने नियंत्रक एवं लेखा महापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट पेश की। कैग की रिपोर्ट के अनुसार कई विभागों में अनियमितता की बात सामने आई हैं। सिसोदिया ने बताया कि अगर CAG रिपोर्ट के अनुसार किसी मंत्री या अधिकारी से गड़बड़ी हुई है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं इस रिपोर्ट के सामने आने से सियासत भी शुरू हो गयी है। इन अनियमितताओं को लेकर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने एलजी पर हमला बोला है।
केजरीवाल ने कैग की रिपोर्ट का टुकड़ा ट्वीट करते हुए लिखा, ‘डोर स्टेप राशन डिलीवरी की फ़ाइल रद्द कर एलजी राशन माफियाओं को बचाने की कोशिश कर रहे हैं! पूरा राशन सिस्टम माफियाओं के कब्जे में है जिन्हें राजनीतिक सरंक्षण प्राप्त हक।’
कैग रिपोर्ट स्कूटर, बाइक और तिपहिया वाहनों से राशन सप्लाई करने की बात सामने आई आई है। एक और ट्वीट में केजरीवाल ने कहा कि कैग की रिपोर्ट में जिनके भी नाम सामने आएंगे कोई नहीं बख्शा जाएगा।
भाजपा का हमला
दिल्ली भाजपा ने कैग रिपोर्ट को लेकर केजरीवाल सरकार पर हमला बोला है। दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी की तरफ से प्रेस रिलीज जारी कर कहा गया है कि विधानसभा में प्रस्तुत सी.ए.जी. की रिपोर्ट के बाद यह स्थापित हो गया है कि अरविंद केजरीवाल सरकार दिल्ली के विकास पर बिलकुल ध्यान नहीं दे रही है, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों पर उसके सभी दावे केवल हवा-हवाई तो हैं। इसके साथ ही आयुष और खाद्य सुरक्षा से जुड़े सरकार के कामों में धांधलियां भी चल रही है।
2016-17 के दिल्ली सरकार के कामकाज पर CAG रिपोर्ट
-2,682 डीटीसी बसों का बीमा नहीं होने से टाटा मोटर्स को करोड़ों का फायदा।
-SDMC ने नाले के निर्माण और सुंदरीकरण पर 30.92 करोड़ खर्च किए जाने पर सवाल उठाए।
-नौरोजी नगर और पुष्प विहार में पर्यावरण के मानदंडों की अनुपालना किए बिना नालों को ढकने के कारण 40.58 करोड़ का खर्च।
-खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के अधीन लाभार्थियों के पंजीकरण में कमी।
-तीन मेडिकल कॉलेजों (टिबिया कॉलेज, बीआर सुर होम्योपैथी कॉलेज, चौधरी ब्रह्म प्रकाश चरक संस्थान) में 37 से 52% डॉक्टर, फार्मासिस्ट और नर्स कैडर में कमी।
-दिल्ली में 68 रक्त कोषों में से 32 केंद्र बिना लाइसेंस के ही चल रहे हैं।
-2 अक्टूबर 2014 से भारत सरकार की ओर से शुरू किए गए स्वच्छ भारत मिशन से ढाई साल तक एक भी शौचालय नहीं बना. जबकि इसके लिए 40.31 करोड़ की रकम आवंटित की गई, लेकिन इस्तेमाल नहीं किया गया।
-जल बोर्ड की ओर से खरीदे गए 3.18 करोड़ के उपकरणों का कोई उपयोग नहीं हो सका.
-सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद मयूर विहार में दिल्ली हाट बनाने में 39.66 लाख रुपये का खर्च बेकार हुआ.
-द्वारका-8 डिपो के विकास में निगरानी रखने में डीटीसी विफल रहा जिससे 50.72 लाख रुपये बिजली बिल आया.

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