अब रेल यात्रियों को मिलेंगे मुलायम और हल्के कम्बल, महीने में दो बार होगी धुलाई

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रेल यात्रियों की पुराने और बदबूदार कम्बल मिलने की दशकों पुरानी समस्या समाप्त होने जा रही है। अब उन्हें साफ, मुलायम और हल्के कम्बल ओढ़ने को मिलेंगे। रेलवे बोर्ड ने पुराने कम्बल को हटाकर नए कम्बल खरीदने के निर्देश दिये हैं। नए मानक में कम्बल को माह में दो बार धोया जाएगा, जिससे यात्रियों की गंदे और बदबूदार कम्बल के देने की शिकायत दूर हो जाएगी।रेलवे बोर्ड ने 8 मार्च को सभी जोनल रेलवे के महाप्रबंधकों को निर्देश जारी कर दिये हैं। इसमें एसी श्रेणी में वितरित होने वाले कम्बल को लेकर नए मानकों का उल्लेख किया गया है। कम्बल की लंबाई, चौड़ाई, ऊन-नायलॉन का रेशियो, उसका वजन आदि के नए मानक बनाए गए हैं। रेल अधिकारियों का कहना है कि नए मानक से कम्बल का वजन घटकर 460 ग्राम रह जाएगा। जबकि पुराना कम्बल लगभग दो किलो का होता है। पुराने कम्बलों को दो माह में एक बार धोने का प्रावधान था, हालांकि इसका पालन नहीं किया जाता था।बताया जाता रहा कि ऊनी कंबल बार-बार धोने से उसकी गुणवत्ता खराब हो जाती थी। इस कारण कम्बलों को दो माह में धोया नहीं जाता था, जिस कारण चादर लगाने के बाद भी बदबू की शिकायतें बढ़ने लगी थी। रेलवे ने 120 रुपये में रेडिमेड कंबल खरीदने की योजना लागू की थी। लेकिन यात्रियों ने इसे पंसद नहीं किया जिस कारण इसे बंद कर दिया गया। अब यह समस्या स्थायी रूप से समाप्त हो जाएगी।

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