राम मंदिर को लेकर सुलह की कोशिशें फिर शुरू, PM मोदी से मिलेंगे पक्षकार

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रामजन्मभूमि पर निर्मोही अखाड़ा के स्वामित्व की लड़ाई लड़ रहे नाका हनुमानगढ़ी के पूर्व महंत भाष्कर दास के उत्तराधिकारी महंत रामदास ने बुधवार को मस्जिद के लिए गोण्डा के तरबगंज तहसील के अन्तर्गत रामापुर भगाही स्थित जमीन देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उनके गुरु के स्थान पर उन्हें पक्षकार के रूप में मान्यता दे दी है, इसलिए वह छह अप्रैल को होने वाले सुनवाई के लिए दिल्ली जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि पक्षकार आपस में सुलह करना चाहते हों तो उन्हें कोई एतराज नहीं है। इसलिए कोर्ट के बाहर सुलह की कोशिशें एक बार फिर से शुरू की गयी हैं।उन्होंने बताया कि इसी सिलसिले में वह एमआईटी विश्वशांति विश्वविद्यालय, पुणे के शिक्षाविदों के साथ प्रधानमंत्री से भी भेंट कर उन्हें ज्ञापन सौंपेंगे। यह ज्ञापन रामजन्मभूमि के प्रश्नगत भूमि पर विश्वधर्मी श्रीराम मानवता भवन निर्माण के लिए दिया जाएगा। इसके लिए प्रधानमंत्री कार्यालय से मिलने के लिए समय मांगा गया है।उन्होंने कहा कि बहैसियत पक्षकार वह एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनीवर्सिटी के अध्यक्ष डॉ. विश्वनाथ दा. कराड की ओर से किए गए प्रस्ताव का समर्थन करते हैं। उन्होंने बताया कि सम्बन्धित प्रस्ताव में रामजन्मभूमि के प्रश्नगत भूमि पर रामलला के भव्य मंदिर निर्माण के साथ ही अधिग्रहीत परिसर में सभी धर्मों के लिए उपासना स्थल का निर्माण का प्रस्ताव शामिल है।उन्होंने कहा कि देश में शांति और सदभाव के लिए जरूरी है कि राम मंदिर विवाद का समाधान आपसी बातचीत से ही हो। उन्होंने कहा कि इस दिशा में केन्द्र सरकार को पहल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनीवर्सिटी के अध्यक्ष डॉ. कराड़ देश के विख्यात शिक्षाविदों एवं विभिन्न धर्मों के उलेमाओं व समाजसेवियों के साथ लगातार वार्तालाप कर रहे हैं और उनकी कोशिशें रंग ला रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि केन्द्र सरकार का भी सहयोग मिला तो मामला आपसी सुलह से अवश्य ही निपट जाएगा।

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