दो राज्‍यों को जोड़ती है यह पुल, बनने में लगे 30 साल, बिना उद्घाटन के परिचालन शुरू

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घाघरा नदी पर यूपी-बिहार को जोड़ने वाली पुल को बनाने में 30 साल लग गए। बिना उद्घाटन के ही पुल पर परिचालन शुरू हो गया। स्‍थानीय लोगों ने पुल का नामकरण किया।
सारण । बिहार के सारण जिले के मांझी में घाघरा नदी पर यूपी-बिहार को जोडऩे वाला एनएच-31 पर जयप्रभा सेतु ही एक ऐसा पुल है, जिसका नामकरण आम जनता ने किया है। खास यह भी है इसके निर्माण में लगभग 30 साल का समय लगा।
यूपी-बिहार दोनों सीमा में पडऩे वाले इस सेतु का शिलान्यास कब हुआ, इसका कोई शिलापट्ट किसी भी सिरे पर दिखाई नहीं देता। स्‍थानीय बुजुर्ग लोग बताते हैं कि यूपी के तत्‍कालिन मुख्यमंत्री रामनरेश यादव व बिहार के तत्‍कालिन मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के कार्यकाल में इसका शिलान्यास हुआ था। शिलान्‍यास के मौके पर दोनों दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्री भी मौजूद थे। उसके बाद मंथर गति से इसका काम चलता रहा। पुल निर्माण में देरी दोनों राज्यों में राज्यांश का पेंच का होना भी लोग बताते हैं। निर्माण में काफी विलंब होने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के प्रयासों से इसे केंद्रीय पुल विभाग ने अपने हाथों में लिया। 2005 तक इसके सभी कार्य पूर्ण किए गए और बिना लोकार्पण ही वर्ष 2006 से वाहनों का परिचालन शुरू हो गया।
जयप्रभा सेतु से 30 बोतल अंग्रेजी शराब बरामद
बिहार में चकचक, यूपी में खतरा ही खतरा
जयप्रभा सेतु का एक छोर यूपी में है तो दूसरा बिहार में। अपनी सीमा के हिस्से को बिहार राज्य ने काफी बेहतर बना रखा है। सेतु से कुछ दूरी पर एक स्वागत द्वार बना है, जिस पर यूपी की ओर से जाने पर बिहार में प्रवेश करने से पूर्व लिखा मिलता है-बिहार राज्य में आपका स्वागत है, एवं दूसरी ओर अंकित है, धन्यवाद पुन: पधारें।
यूपी वाले सिरे में केवल पैसे की वसूली के अलग-अलग बैरियर हैं। दोनों तरफ की सड़कें तो अब ठीक हो चली हैं, किंतु सेतु के ऊपर यूपी की सीमा में हर ज्वाइंट पर गड्ढे नजर आ रहे हैं। पुल के ऊपर हर ज्वाइंट के गड्ढे में हर दिन कोई न कोई दुर्घटना का शिकार भी हो रहा है। यह सेतु आवागमन शुरू होने के 12 साल के अंदर ही अपनी मजबूती की पोल क्रमश: खोलने लगा है।

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