नामी व महंगे स्कूल में ब्रेकफस्ट खाकर बीमार पड़े 200 बच्चे

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नोएडा
शहर के सबसे महंगे स्कूलों में से एक सेक्टर-132 स्थित स्टेप बाई स्टेप स्कूल में गुरुवार को ब्रेकफस्ट के बाद करीब 200 बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। आनन-फानन में स्कूल की ओर से पैरंट्स को मेसेज भेजे गए और छुट्टी से पहले ही बच्चों को घर भिजवा दिया गया। यहां पढ़ने वाले बच्चों को रोजाना स्कूल की ओर से ब्रेकफस्ट और लंच दिया जाता है। हालांकि, स्कूल ने सिर्फ 20 बच्चों के ही बीमार होने की पुष्टि की है। इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी स्कूल मैनेजमेंट ने जिला प्रशासन की टीम को कैंपस के अंदर तक नहीं जाने दिया। वहीं, सिटी मैजिस्ट्रेट के अनुसार 100 से अधिक बच्चे अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। इसके अलाव कुछ का इलाज घर पर हो रहा है।जानकारी के अनुसार, स्कूल में ब्रेकफस्ट के बाद बच्चे पेट में दर्द, उल्टी, चक्कर आने की शिकायत करने लगे। सुबह 9 बजे बच्चों को नाश्ते में आलू की सब्जी और अजवायन का परांठा दिया गया, जिसे खाते ही बच्चे बीमार होने लगे। करीब 12:30 बजे पैरंट्स के मोबाइल पर मेसेज आ गया कि बच्चों की तबीयत बिगड़ रही है। उन्हें स्कूल आकर ले जाओ। स्कूल में फूड पॉयजन की घटना ने पैरंट्स हैरान हैं।अभिभावकों का कहना है कि करीब चार लाख सालाना एक बच्चे की पढ़ाई का खर्च होने के बाद भी इतनी घटिया क्वॉलिटी का खाना दिया गया कि उसे खाते ही बच्चे बीमार हो गए। इस स्कूल में 2300 बच्चे पढ़ते हैं। हर महीने खाने के लिए 5 हजार रुपये चार्ज किया जाता है। उसके बाद भी बच्चे बीमार हो गए। इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी स्कूल ने जिला प्रशासन की टीम को कैंपस में नहीं घुसने दिया।
परेशान है मेरा पूरा परिवार
सेक्टर-15ए में रहने वाली वंदना शर्मा ने बताया कि उनके तीन बच्चे इस स्कूल में पढ़ते हैं। करीब 13 लाख रुपये सालाना का खर्च है। 5 हजार रुपये महीना खाने का चार्ज जाता है। कभी घर का खाना देना हो तो स्कूल से अनुमति लेनी पड़ती है। गुरुवार को बच्चे की हालत देखकर मेरी तबीयत खराब हो गई। पूरा घर परेशान है।
दूसरे दिन ही बीमार हुए बच्चे
अपोलो में भर्ती युवीर और वीरव के पैरंट्स ने बताया कि उनके बच्चों का गुरुवार को दूसरे दिन था। दोनों बच्चे जुड़वां हैं। नर्सरी में ऐडमिशन लिया है। हम तो बुरी तरह घबरा गए। अब तो इस स्कूल में बच्चों को भेजते हुए डर लग रहा है। अब बिल्कुल भी स्कूल का खाना नहीं खाने देंगे।
करीब 6-7 अस्पतालों में बच्चे भर्ती होने की मेरे पास सूचना है। 100 से भी ज्यादा बच्चे अस्पतालों में भर्ती हुए हैं और काफी बच्चों का घर पर भी इलाज हुआ है। स्कूल प्रबंधन ने न तो इस मामले की सूचना जिला प्रशासन को दी और न ही घटना होने के बाद कॉपरेट किया। खुद मुझे और फूड सेफ्टी विभाग की टीम को 2 घंटे गेट के बाहर खड़े रहना पड़ा। उसके बाद भी गेट नहीं खोला। यह स्कूल की गंभीर लापरवाही और मनमानी है। निश्चित तौर पर स्कूल के खिलाफ ऐक्शन होगा।

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