यूपीः बवाल के बाद बदला अंबेडकर की मूर्ति का रंग, भगवा से अब हुआ नीला

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उत्तर प्रदेश के बदायूं में कुंवरगांव क्षेत्र के दुगरैया गांव में बाबा साहेब की भगवा रंग से रंगी नई मूर्ति का अनावरण कर बसपाई को बसपा सुप्रीमों की नाराजगी झेलनी पड़ी। मायावती की नाराजगी के बाद 24 घंटे बाद ही बाबा साहेब की भगवा रंग की मूर्ति को नीला रंग दिया गया। जिले में बाबा साहेब की भगवा मूर्ति की स्थापना को लेकर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सियासत गर्म हो उठी थी।सात अप्रैल को शरराती तत्वों ने दुगरैया गांव में लगी बाबा साहेब की मूर्ति को क्षतिग्रस्त कर दिया था। मूर्ति टूटी देख लोगों में नाराजगी थी, हाईवे जाम करने की मंशा से लोग सड़कों पर भी उतरे। समय रहते पुलिस ने हालात संभाले और 24 घंटे के भीतर आगरा से नई मूर्ति मंगवाकर यहां पर स्थापित करावा दी गई। नौ अप्रैल को विधिवत जब मूर्ति का अनावरण हुआ तो लोग चौंक पड़े। अंबेडकर की मूर्ति का रंग भगवा होने पर यह चर्चा जिले से निकलती हुई लखनऊ और फिर दिल्ली तक पहुंची। इसके बाद बसपा सुप्रीमो ने यहां के बसपाइयों से नाराजगी जताई। बसपा सुप्रीमो की नाराजगी के बाद बसपाइयों ने मंगलवार को आनन-फानन में पेंटर बुलाकर प्रतिमा का रंग भगवा से नीला करवाया। इस मामले में बसपा जिलाध्यक्ष से लेकर ग्राम प्रधान बोलने को तैयार नहीं हैं।योगी के आते ही यूपी में भगवाकरण
योगी आदित्यानाथ के यूपी का सीएम बनने के बाद से ही प्रदेश में सरकारी इमारतों और अन्य विभागों में भी भगवा रंग दिखने लगा है। इसी कड़ी में पुलिस थानों को, नेम प्लेटों, इमारतों को और यहां तक की हज हाउस से लेकर नगरपालिका तक की दीवारों को भगवा रंग दिया गया था। अब इस हालिया मामले में अंबेडकर भी भगवा हो चले थे।विवाद बढ़ने के बाद यूपी के राज्यपाल राम नाइक ने कहा था कि मैं एक मराठी हूं, बाबा साहेब भी मराठी थे। हिंदी भाषी राज्य अभी तक उनका नाम गलत तरीके से लिखते थे, जिसे उन्होंने ठीक करवाया है। इसके अलावा उन्होंने ये भी कहा कि बाबा साहेब जो अपने हस्ताक्षर करते थे, उसमें भीमराव रामजी अंबेडकर ही लिखते थे। क्या था पूरा मामला
कुंवरगांव के दुगरैया स्थित गांव में बीते शुक्रवार की रात तोड़ी गई डॉ. अंबेडकर की नई मूर्ति नीले रंग की लाने की जगह भगवा रंग की लाई गई थी। रविवार को समाज के लोगों व पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में अनावरण किया गया। पहली बार बाबा साहेब की प्रतिमा के भगवा रंग को देख लोगों को आश्चर्य भी हुआ।
आम तौर पर बाबा साहेब की प्रतिमा नीले रंग में देखने को मिलती है। भगवा रंग में रंगी मूर्ति को देखकर सियासी हवा तेज हो गई थी।

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