SC से केंद्र ने कहा- SC/ST एक्‍ट पर फैसले से कमजोर हुआ कानून

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नई दिल्‍ली। एससी/एसटी एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को लेकर केन्द्र सरकार ने फैसले के रिव्यू में लिखित दलीलें दाखिल की हैं। अपनी दलीलों में केंद्र ने कहा है कि कोर्ट के फैसले के चलते कानून कमजोर हुआ है। केंद्र ने यह भी कहा है कि कानून में शामिल अग्रिम जमानत न देने के प्रावधान को खत्म नही किया जा सकता। कानून समाज की जरूरत है। कोर्ट के आदेश से देश को नुकसान हुआ है।
दरअसल, जब से सुप्रीम कोर्ट ने एससी एसटी एक्‍ट पर अपना एक फैसला सुनाया है, तब से इस पर राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस, भाजपा पर दलितों के अधिकारों का हनन करने का आरोप लगा रही है। लेकिन भाजपा ने साफ कर दिया है कि वह दलितों के साथ खड़ी है। इसलिए भाजपा ने एससी एसटी एक्‍ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की है।ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट ने एससी एसटी अत्याचार निरोधक कानून में तत्काल एफआइआर दर्ज करने और गिरफ्तारी पर रोक लगा दी, जिस पर पूरे देश में राजनीति गरमाई हुई है। सरकार ने फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की।सुनवाई में अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि फैसले से एससीएसटी कानून कमजोर हुआ है। इस वर्ग के लोग सैकड़ों वर्षों से सताए हुए हैं। कोर्ट के आदेश में तत्काल एफआईआर पर रोक लगाई गई है, ऐसे मे पुलिस मामले टालने लगेगी। केस दर्ज ही नहीं होंगे।सुप्रीम कोर्ट ने एससी एसटी एक्ट में तत्काल एफआइआर और गिरफ्तारी की मनाही करने वाले अपने फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने फैसले के खिलाफ केन्द्र सरकार की पुनर्विचार याचिका विचारार्थ लंबित रख ली, लेकिन 20 मार्च के फैसले पर अंतरिम रोक की मांग खारिज कर दी।कोर्ट ने फैसले से एससी एसटी कानून कमजोर होने की दलीलें ठुकराते हुए कहा कि इससे कानून कमजोर नहीं हुआ है, बल्कि बेगुनाहों को संरक्षित किया गया है। कोर्ट की सोच है कि लोग इस कानून से आतंकित न हों और निर्दोष सलाखों के पीछे न जाएं। कोर्ट कानून के खिलाफ नहीं है, बल्कि बेगुनाहों को गिरफ्तारी से बचाने के लिए फैसले में संतुलन कायम किया गया है।

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