मक्का मस्जिद फैसला: सुब्रमण्यन स्वामी बोले-चिदंबरम पर दर्ज हो केस, ओवैसी-कांग्रेस ने NIA पर उठाए सवाल

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नई दिल्ली
मक्का मस्जिद ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत से स्वामी असीमानंद समेत सभी 5 आरोपियों के बरी हो जाने पर सियासत शुरू हो गई है। कांग्रेस और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने इसको लेकर NIA पर हमला बोला है। ओवैसी ने NIA को बहरा और अंधा तोता करार देते हुए केस में राजनीति दखल का आरोप लगाया।दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी जांच एजेंसी पर सवाल उठाए।
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कांग्रेस और ओवेसी को अपनी शंकाओ का समाधान करने किये पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम से सवाल करना चाहिये जिन्होने हिन्दू आतंक शब्द को गढ़ा था.
Narendra Mertia
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वहीं, बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने यूपीए सरकार के कार्यकाल में ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द गढ़ने को लेकर पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम को निशाने पर लिया। उन्होंने चिदंबरम पर केस दर्ज करने की मांग की है। सभी आरोपियों के बरी होने के बाद NIA भी सवालों के घेरे में हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर ब्लास्ट के पीछे फिर कौन था और इसमें मारे गए 9 लोगों की हत्या का असली गुनहगार कौन है।

इस फैसले पर ट्वीट करते हुए ओवैसी ने कहा कि NIA ने मामले की सही पैरवी नहीं की। उन्होंने कहा, ‘जून 2014 के बाद मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस मामले में अधिकतर गवाह अपने बयान से पलट गए। NIA ने केस की पैरवी उम्मीद के मुताबिक नहीं की या फिर ‘राजनीतिक मास्टर’ द्वारा उन्हें ऐसा करने नहीं दिया गया। आपराधिक मामले में जबतक ऐसी पक्षपाती चीजें होती रहेंगी तबतक न्याय नहीं मिलेगा।’
ओवैसी बोले-NIA बहरा और अंधा तोता
ओवैसी यहीं नहीं रुके और NIA को बहरा और अंधा तोता तक बता डाला। उन्होंने कहा, ‘न्याय नहीं हुआ है। NIA और मोदी सरकार ने आरोपियों को मिली बेल के खिलाफ भी अपील नहीं की। यह पूरी तरह से पक्षपाती जांच थी। इससे आतंक के खिलाफ हमारी लड़ाई कमजोर हुई है।’

ओवैसी ने कहा, ‘NIA एक बहरा और अंधा तोता है। एजेंसी ने आरोपियों के बेल के खिलाफ अपील नहीं की। गवाह अपने बयान से पलट गए। यह पीड़ितों के लिए नुकसान की बात रही। आज के फैसले के बाद आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई कमजोर हुई है।’

हिंदू टेरर शब्द के लिए चिदंबरम पर हो केस दर्ज: स्वामी
स्वामी ने हमारे सहयोगी चैनल टाइम्स नाउ से बातचीत में कहा कि इस मामले में चिदंबरम पर मामला दर्ज करना चाहिए। स्वामी ने कहा कि हिंदू टेरर थिअरी के लिए पूर्व गृह मंत्री पर केस होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदू टेरर शब्द के जरिए हिंदुओं पर सवाल उठाए। स्वामी ने कहा, ‘इसके पीछे बड़ी साजिश थी। इस मामले में शामिल लोगों को सजा मिलनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि हिंदू टेरर शब्द का प्रयोग कर वे RSS को निशाना बनाना चाहते थे और उसे बैन करना चाहते थे।

भगवा आतंकवाद पर चिदंबरम ने क्या कहा था
पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने अगस्त 2010 में पुलिस अधिकारियों के एक सम्मेलन के दौरान कहा था,’देश के कई बम धमाकों के पीछे भगवा आतंकवाद का हाथ है। भगवा आतंकवाद देश के लिए नई चुनौती बनकर उभर रहा है।’ चिदंबरम के इस बयान पर उस समय विपक्ष में रही बीजेपी-शिवसेना ने संसद में भी हंगामा किया था। तब यूपीए चीफ सोनिया गांधी के करीबी महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने चिदंबरम को जुबान संभालकर बोलने की नसीहत देते हुए कहा था कि आतंक का भगवा या हरा रंग नहीं होता सिर्फ काला रंग होता है।

हालांकि इसके बाद चिदंबरम ने कहा था कि भगवा आतंकवाद पर किसी का पेटेंट नहीं है। वह इसके जरिए जो संदेश देना चाहते हैं वह देश भर में चला गया है। उन्होंने तब दावा किया था कि देश के कुछ बम धमाकों के पीछे कट्टरपंथी दक्षिणपंथियों का हाथ है।

कांग्रेस ने NIA जांच को बताया पक्षपाती
कांग्रेस ने NIA की जांच को पक्षपाती बताया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सभी जांच एजेंसी केंद्र सरकार की कठपुतली बन गई है। इस मामले की जांच कोर्ट की निगरानी में हो। उन्होंने कहा कि NIA बीजेपी सरकार के अंदर काम करती है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि वह ट्रायल कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। यहां आगे फिर से अपील की जा सकती है। इस मामले में दर्जनों गवाह अपने बयान से मुकर गए। इस पर सवाल तो खड़े होते ही हैं। इसकी जांच होनी चाहिए। ओवैसी का सवाल पर चिंता तो पैदा करता ही है।

गौरतलब है कि 18 मई 2007 को हुए इस ब्लास्ट में 9 मारे गए थे जबकि 58 घायल हुए थे। बाद में प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस फायरिंग में भी कुछ लोग मारे गए थे। आपको बता दें कि एनआईए मामलों की चतुर्थ अतिरिक्त मेट्रोपोलिटन सत्र सह विशेष अदालत ने केस की सुनवाई पूरी कर ली थी। आपको बता दें कि इस मामले में 10 आरोपियों में से आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। कोर्ट ने अपने फैसले में सभी पांच आरोपी देवेंद्र गुप्ता, लोकेश शर्मा, स्वामी असीमानंद उर्फ नबा कुमार सरकार, भारत मोहनलाल रत्नेश्वर उर्फ भारत भाई और राजेंद्र चौधरी को कोर्ट ने बरी करने का फैसला सुनाया। इन सभी को मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में गिरफ्तार किया गया था और उनपर ट्रायल चला था।

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