नरोदा पाटिया केस पर फैसला : जानें, 28 फरवरी 2002 को कैसे हुई थी 97 लोगों की मौत

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गुजरात में साल 2002 में नरोदा पटिया इलाके में हुए नरसंहार मामले पर हाईकोर्ट ने फैसला सुना दिया है। हाईकोर्ट के फैसले ने पूर्व मंत्री माया कोडनानी को रहत देते हुए बरी कर दिया है और बाबू बजरंगी को उम्र कैद की सजा सुनाई है। बाबू बजरंगी के अलावा इस मामले में हरेश छारा, सुरेश लंगड़ा को भी दोषी करार दिया गया है।
18 फरवरी 2002 में नरोदा पटिया इलाके में हुआ क्या था?
1. अब से 16 साल पहले यानी 2002 में 27 फरवरी को साबरमती एक्सप्रेस जलाए जाने को लेकर गुजरात में दंगे भड़क गए थे।
2. उसके एक दिन बाद यानी 28 फरवरी को अहमदाबाद के नरोदा पटिया इलाके में 97 लोगों की हत्या कर दी गई थी।
3. इस दंगे में 30 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। 27 फरवरी को ट्रेन जलाए जाने के विरोध में विश्व हिंदू परिषद ने बंद का आह्वान किया था। इसी दौरान नरोदा पाटिया में भीड़ हिंसक हो गई और अल्पसंख्यक लोगों पर हमला कर दिया।
4. इस केस में 11 मुस्लिमों की भी हत्या हुई थी।
5. मामले में मुकदमा साल 2009 में शुरू हुआ और करीब 62 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए गए। इसी बीच सुनवाई के दौरान एक अभियुक्त विजय शेट्टी की मौत हो गई।
6. अदालत ने इस मामले में 327 लोगों के बयान दर्ज किए। जिसमें पत्रकार, कई पीड़ित, डॉक्टर, पुलिस अधिकारी और सरकारी अधिकारी भी शामिल थे। 7. अगस्त 2012 में एसआईटी मामलों के लिए विशेष अदालत ने बीजेपी विधायक और राज्‍य की नरंद्र मोदी सरकार में पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बाबू बजरंगी को हत्या और षड्यंत्र रचने का दोषी पाया। इसके अलावा 32 अन्‍य को भी दोषी ठहराया गया। वहीं नि‍चली अदालत ने सबूतों के अभाव में 29 अन्य लोगों को बरी कर दिया।
8. इस केस में अमित शाह ने माया कोडनानी के पक्ष में गवाही दी थी। शाह के अनुसार दंगे के दौरान माया कोडनानी विधानसभा में थीं।
9. यह मामला गुजरात दंगों से जुड़े नौ मामलों में से एक है, जिनकी जांच एसआईटी ने की है।
10. इस मामले में माया कोडनानी ने कहा था कि जिस वक्त नरोदा में दंगे हो रहे थे, उस वक्त वह अमित शाह के साथ अहमदाबाद की शोला सिविल अस्पताल में मौजूद थीं। कोडनानी के इसी बयान के आधार पर कोर्ट ने अमित शाह को बतौर गवाह बयान देने के लिए हाजिर होने के लिए कहा था।

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