सुप्रीम कोर्टः अब तक चार महाभियोग प्रस्ताव, जानें कब-कब हुआ पेश

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स्वतंत्र भारत के इतिहास में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा महाभियोग का सामना करने वाले पांचवे जज होंगे। उनके पहले भी चार जजों के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव पेश किया गया, लेकिन कोई भी अपने मुकाम पर नहीं पहुंचा। हालांकि, प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही दो जजों ने पद से इस्तीफा दे दिया। ये चार जज हैं
जस्टिस वी रमास्वामी
1993 में महाभियोग प्रक्रिया का सामना करने वाले पहले जस्टिस वी रमास्वामी थी। उनपर 1990 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश रहते हुए सरकारी घर पर अनुचित खर्च का आरोप था। लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव पेश हुआ, लेकिन दो तिहाई बहुमत नहीं मिलने से यह खारिज हो गया।
जस्टिस सौमित्र सेन
2011 में जस्टिस सौमित्र सेन देश के पहले जज थे, जिन्होंने महाभियोग से बचने के लिए प्रस्ताव के आने के बाद इस्तीफा दे दिया। 1983 में सौमित्र वकील थे और अदालत ने उन्हें रिसीवर नियुक्त किया था और उनकी अभिरक्षा में 33.23 लाख रुपये रखे गए थे। इस राशि में गड़बड़ी करने का उन्हें दोषी पाया गया।
जस्टिस पीडी दिनाकरण
सिक्किम हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे पीडी दिनाकरण के खिलाफ 2009 में भ्रष्टाचार के आरोप में राज्यसभा ने महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार किया। 29 जुलाई 2011 में उन्होंने तीन जजों की जांच समिति पर अविश्वास व्यक्त करते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
जस्टिस जेबी पार्दीवाला
गुजरात हाईकोर्ट के जज पार्दीवाला के खिलाफ 2015 में 58 राज्यसभा सदस्यों ने महाभियोग प्रस्ताव लेकर आए। सांसद पार्दीवाला की ओर से एक फैसले में अनुसूचित जाति और जनजाति को मिले आरक्षण के खिलाफ टिप्पणी से नाराज थे। प्रस्ताव पेश होने के बाद पार्दीवाला ने फैसले से टिप्पणी हटा ली।
जस्टिस एस के गंगले
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस एस के गंगले पर 2014 में महिला जज ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। 2015 में 58 सांसदों ने राज्यसभा में महाभियोग का नोटिस दिया गया। दो साल तक उन्होंने जांच समिति का सामना किया। लेकिन आरोप साबित नहीं होने पर प्रस्ताव राज्यसभा में पेश नहीं हो सका।
जस्टिस नागाजरुन रेड्डी
जस्टिस नागाजरुन रेड्डी आंध्रपदेश-तेलंगाना हाईकोर्ट के जस्टिस सी.वी.नागाजरुन रेड्डी पर दलित समुदाय के प्रति पूर्वाग्रह रखने का आरोप लगा।इस आधार पर दिसंबर 2016 और जून 2017 में उनके खिलाफ दो बार महाभियोग प्रस्ताव लाने का प्रयास किया गया।

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