जेसिका के इंसाफ के लिए सड़क पर आ गया था देश,

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1999 में हुए जेसिका हत्याकांड के दोषी मनु शर्मा को जेसिका की बहन सरबीना लाल ने माफ कर दिया है। ऐसा खुद सरबीना ने तिहाड़ जेल प्रशासन को लिखे खत में कहा है। सरबीना ने खत में लिखा है कि वो अब जिंदगी में आगे बढ़ना चाहती हैं। उन्होंने मनु शर्मा को माफ कर दिया है। उनके दिल में अब मनु के लिए कोई गुस्सा नहीं है।इसलिए अगर जेल प्रशासन मनु को रियायत बरतना चाहता है, उसे आजाद करना चाहता है तो कर सकता है। सरबीना चावला ने इतने सालों बाद भले की मनु शर्मा को माफ कर दिया हो लेकिन उसे जेल की सलाखों तक पहुंचाने के लिए उन्होंने बहुत लंबी लड़ाई लड़ी थी। जेसिका मर्डर केस एक ऐसा केस था जिसमें इंसाफ के लिए पूरा देश एकसाथ आ गया था।क्या था वो कैस और 1999 में हुआ क्या था विस्तार से पढ़ें :
29 अप्रैल 1999 की रात थी, सोशल वर्कर बीना रमानी ने दिल्ली के महरौली स्थित टैमरिंड कोर्ट रेस्टोरेंट में पार्टी दी थी। इस पार्टी में राजधानी की कई नामी हस्तियों ने शिरकत की जिसमें मनु शर्मा भी शामिल था। हाई क्लास पार्टी में मॉडल जेसिका लाल शराब सर्व कर रही थी। रात के दो बजे थे और शराब सर्व करने का टाइम खत्म हो चुका था। तभी मनु शर्मा ने जेसिका से शराब मांगी। लेकिन जेसिका ने शराब सर्व करने से मना कर दिया। मनु के जिद करने पर भी जेसिका ने शराब नहीं सर्व की। जिसके बाद मनु को गुस्सा आ गया और उसने पिस्तौल निकालकर पहली गोली डराने के लिए हवा में चलाई और दूसरी गोली जेसिका के सिर में मार दी। उसके वो अपने दोस्तों के साथ फरार हो गया।
बयान से मुकर गए गवाह :
मौके पर पहुंची पुलिस ने इस केस में 101 गवाह बनाए जिसमें श्यान मुंशी और बीना रमानी आदि प्रमुख थे। श्यान मुंशी मामले का शिकायती बना और उसी के बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज हुई। लेकिन सुनवाई के दौरान श्यान मुंशी समेत अन्य लोग अपने बयान से मुकर गए। श्यान मुंशी ने बयान दिया कि मनु शर्मा वो आदमी नहीं है जिसने गोली चलाई थी। उसने यह भी कहा कि गोलियां एक पिस्तौल से नहीं बल्कि दो पिस्तौल से चली थीं। हालांकि बीना रमानी, उनकी बेटी मालिनी रमानी और उनके परिवार के लोगों ने मनु शर्मा की पहचान की और पुलिस की जांच में सहयोग किया।जेसिका के इंसाफ के लिए एकसाथ सड़क पर आया देश :
बीना रमानी ने बयान दिया कि काउंटर पर मनु शर्मा खड़ा था। तभी उन्होंने एक के बाद एक दो गोली चलने की आवाज सुनी। उन्होंने देखा कि जेसिका जमीन पर गिरी है। श्यान को पुलिस को फोन करने को कहा और मनु शर्मा को वहां रोककर कहा कि उसने क्यों मारा? बाद में वह वहां से भाग गया। मामले की लंबी सुनवाई के दौरान मनु को जमानत मिल गई थी। इस केस की सुनवाई करीब सात साल तक चली और 21 फरवरी 2006 को पटियाला हाउस कोर्ट ने मामले के सभी आरोपियों को बरी कर दिया।आरोपियों के बरी होने के बाद जेसिका की बहन सबरीना लाल ने इस केस को मीडिया में उठाया। पुलिस ने हाईकोर्ट में अपील की। मीडिया ने इस पूरे मामले को उठाया तो पूरा देश इंसाफ के लिए सड़क पर आ गया। जनता का दबाव बढ़ते देख जेसिका के केस को दोबारा खोलना पड़ा। केस फास्टट्रैक कोर्ट में चला और अंततः हाई कोर्ट से जेसिका के हत्यारे मनु शर्मा को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।हाईकोर्ट के इस फैसले को मनु शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। ये केस देश के जाने-माने वकील राम जेठमलानी ने लड़ा। उनकी तरफ से दलील दी गई कि इस मामले में मनु शर्मा को फंसाने की कोशिश की गई है। 19 अप्रैल, 2010 को सुप्रीम कोर्ट ने मनु शर्मा की दलीलों को खारिज करते हुए हाई कोर्ट के उम्रकैद के फैसले को बरकरार रखा। बाद में पुनर्विचार याचिका भी खारिज कर दी गई।

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