आसाराम रेप केस: जांच कर रहे पुलिस अधिकारी को भेजी गई थीं 2000 से अधिक धमकी वाली चिट्ठियां

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आसाराम रेप केस की पड़ताल के दौरान सीनियर पुलिस अधिकारी अजय पाल लाम्बा को 2000 से ज्यादा धमकी वाले पत्र मिले और सैकड़ों फोन कॉल्स किए गए। बुधवार को जोधपुर कोर्ट ने आसाराम को नाबालिग से साल 2013 में अपने जोधपुर आश्रम में दुष्कर्म के केस में दोषी करार दे दिया है। इस मामले में आसाराम को 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा सुनाई जा सकती है। हालांकि अदालत को अभी इस केस में फैसला सुनाना बाकी है।इस केस के बारे में बात करते हुए लाम्बा कहते हैं कि उन्हें 20 अगस्त 2013 को यह हाई प्रोफाइल केस सौंपा गया था। आसाराम से जुड़ा यह केस लगातार सुर्खियों में रहा है। इस केस में गवाहों की हत्याओं की खबरें आईं थी। इसके अलावा आसाराम के समर्थकों द्वारा जांच अधिकारियों को धमकियां मिलने की खबरें भी आती थी। उस समय मैं जोधपुर वेस्ट का डिप्टी कमिश्नर था।मुझें मिलने वाली चिट्ठियों में अभद्र भाषा के प्रयोग के साथ-साथ मुझे और मेरे परिवार को मारने की धमकियां लिखी होती थी। मेरे फोन पर लगातार कॉल आते रहते थे। ये सारे ही फोन अनजान नंबरों से आते थे। जब तक मैं उदयपुर नहीं गया, तब तक यह सिलसिला जारी रहा।लाम्बा बताते हैं कि कुछ समय के लिए उन्होंने अपनी बेटियों का स्कूल जाना बंद करा दिया था और साथ ही उनकी पत्नि भी घर से बाहर नहीं निकलती थीं। वे आगे कहते हैं कि इस केस में गिरफ्तार किए गए एक आरोपी ने यह कबूल किया था कि उसका अगला निशाना चंचल मिश्रा थीं, जो उस समय जोधपुर की सुप्रीटेंडेंट थीं और इस केस की जांच कर रही थीं।आपको बता दें कि पीड़िता की उम्र अगस्त 2013 में 16 साल थी, जब आश्रम में आसाराम ने उसके साथ दुष्कर्म किया था। पीडिता के परिवार ने 20 अगस्त 2013 को दिल्ली में केस दर्ज कराया था। इसके बाद आसाराम पर रेप, शारीरिक प्रताड़ना, आपराधिक गतिविधियों में लिप्त होने जैसे कई मामलों में केस दर्ज किए गए और केस को जोधपुर ट्रांसफर कर दिया गया था।
लाम्बा ने यह भी कहा कि इस केस में किसी भी तरह का राजनीतिक दवाब नहीं था। केस से जुड़े सभी पहलुओं पर जांच में हुई देरी के चलते केस में काफी समय लगा।

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