सबकी आलोचना सुननी चाहिए, इसलिए पिता की भी सुनता हूं- जयंत सिन्हा

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केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा विदेश में पढ़े, वहां करियर भी शानदार बनाया, फिर पिता यशवंत सिन्हा की तरह नौकरी छोड़कर लौट आए और राजनीति में कदम रखा। झारखंड के हजारीबाग से पहले चुनाव में ही सांसद बने और फिर केंद्र में राज्य मंत्री। भारतीय विमानन सेवा और राजनीति के सवालों पर हिन्दुस्तान, रांची के राजनीतिक संपादक चंदन मिश्र ने उनसे लंबी बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के अंश-
’एअर इंडिया को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी चल रही है। इसके बाद एअर इंडिया का विकल्प क्या होगा?
यह तो सबको मालूम है कि एअर इंडिया के विनिवेश की प्रक्रिया चल रही है। यह एक गोपनीय प्रक्रिया है। इसे हम निजी क्षेत्र के हवाले कर देंगे। यूपीए सरकार के दौर में इस शानदार महाराजा को भिखारी बना दिया गया। महाराजा को हमलोग अब शानदार युवराज बनाएंगे। हवाई सेवा में रफ्तार और गति की जरूरत होती है। अब यह सरकार की जिम्मेदारी नहीं है कि वह विमान सेवा के क्षेत्र में काम करे। सरकार की जिम्मेदारी लोगों को सड़क, शिक्षा और बिजली देना है। इसलिए जब एअर इंडिया का विनिवेश होगा, तो हम इसे प्रतिष्ठित एयरलाइन्स की तरह दुरुस्त बनाएंगे। विदेशी एयरलाइन्स से मुकाबला कर सके, ऐसा बनाएंगे। यूपीए सरकार ने तीन बड़ी गड़बड़ियां कीं। पहली, एअर इंडिया और इंडियन एयरलाइन्स का विलय किया, जिसके कारण घाटा हुआ। दूसरी, बहुत सारे हवाई जहाज खरीदे। जब वित्तीय नजरिए से विमानन कंपनियों की हालत नाजुक थी, तब बहुत बड़ा लोन लेना पड़ा। तीसरी, भ्रष्टाचार चरम पर था, जिसने एअर इंडिया को कमजोर किया। एअर इंडिया से कई रूट छीन लिए गए, जबकि उससे उसे काफी मुनाफा होता था। इस तरह, महाराजा को भिखारी बना दिया। यूपीए सरकार से तुलना करें, तो ऑपरेटिंग परफॉर्मेस में हमने बड़ा परिवर्तन किया है। इसे ‘टर्न अराउंड’ कह सकते हैं। मैनेजमेंट को प्रोफेशनल बनाया है। हमने सही निर्णय लिए हैं और भ्रष्टाचार से दूर रहकर काम किया है।
’आपका दावा है कि देश में हवाई जहाज का सफर ऑटो रिक्शा से भी सस्ता है। इस दावे में कितना दम है?
आज के समय में हवाई सफर सचमुच काफी सस्ता है। सच तो यह है कि ऑटो के सफर से भी ज्यादा सस्ता हवाई सफर है। ऑटो के प्रति किलोमीटर से तुलना करेंगे, तो हजार किलोमीटर की हवाई यात्र आपको सस्ती नजर आएगी।
’घरेलू उड़ानों में यात्री तो बढ़े, पर कंपनियां बेहतर सेवा नहीं दे पा रहीं। यात्रियों के साथ अभद्र व्यवहार की शिकायतें बढ़ रही हैं। इसे कैसे सुधारेंगे?
हमने इसके लिए बहुत उपाय किए हैं। कई नियम बनाए गए हैं। किसी पैसेंजर के साथ र्दुव्‍यवहार और उसकी सुरक्षा को लेकर कस्टमर सर्विस के तहत नो फ्लाई लिस्ट की व्यवस्था की है। यह सेवा सिर्फ भारत में है, किसी और देश में नहीं। यात्रियों की सुविधा के लिए पैसेंजर चार्टर बना रहे हैं। फ्लाइट लेट होने, सामान गुम होने और यात्रियों के साथ र्दुव्‍यवहार जैसे मामलों को इसमें शामिल किया गया है। यह नियम सबको मानना पड़ेगा। दूसरी बात, एयर सेवा सबके लिए होगी। प्रधानमंत्री कहते हैं, हवाई चप्पल वाले हवाई जहाज पर बैठ रहे हैं। आज छोटे-छोटे शहरों से लोग दिल्ली-मुंबई, चेन्नई जैसे महानगर हवाई जहाज से जा रहे हैं।
’झारखंड में रांची छोड़कर कहीं किसी शहर में ऐसा हवाई अड्डा नहीं है, जहां बड़े विमान उतर सकें।हम जब सत्ता में आए, तब हमारे यहां 75 ऑपरेशनल एयरपोर्ट थे। आज की तारीख में 100 एयरपोर्ट हैं। हमारी सरकार ने चार साल में 25 एयरपोर्ट जोड़े। 75 साल के इतिहास में 75 एयरपोर्ट बने। हम 2019 तक 110 से 120 एयरपोर्ट तक पहुंच जाएंगे। 25 से 50 एयरपोर्ट का निर्माण हमारे एक साल का लक्ष्य है। हमने भविष्य की जो योजना बनाई है, उसके लिए 100 से 200 एयरपोर्ट बनाने होंगे। 90 प्रतिशत भारतीयों को एयरपोर्ट तक लाने के लिए 200 एयरपोर्ट की जरूरत होगी। जहां तक झारखंड का सवाल है, तो यहां हजारीबाग में एयरपोर्ट बनेगा। इस पर 280 करोड़ रुपये की लागत आएगी। दुमका एयरपोर्ट का विस्तार हो रहा है। जमशेदपुर हवाई अड्डे में अभी काफी परेशानी है। उसमें निर्माण कार्य कराना होगा। धालभूमगढ़ में नया एयरपोर्ट बनाने की योजना है। बोकारो, धनबाद और गिरिडीह में भी हवाई अड्डा निर्माण की योजना है। झारखंड के दुमका, हजारीबाग और डालटनगंज को हवाई सेवा से जोड़ेंगे। रांची हवाई अड्डे से पहले 12 फ्लाइट उड़ान भरती थीं, अब 28 फ्लाइट हो गई हैं। झारखंड में यात्रियों की संख्या 2014 में पांच लाख थी, जो अब बढ़कर 15 लाख हो चुकी है, यानी तीन गुनी वृद्धि हुई है। रांची में अब अंतरराष्ट्रीय स्तर का टर्मिनल बनाना पड़ेगा। 28 एकड़ जमीन के लिए काम चल रहा है। जमीन मिलते ही काम शुरू हो जाएगा। रांची एयरपोर्ट उद्योग जगत के लिए केंद्रबिंदु बनेगा। गुजरात में 11 व पंजाब में छह एयरपोर्ट बन रहे हैं। सिक्किम, गंगटोक, शिलांग, अरुणाचल में भी हम एयरपोर्ट बनाने वाले हैं।’बिहार के प्रसिद्ध तीर्थस्थल गया में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। झारखंड का देवघर भी अंतरराष्ट्रीय तीर्थस्थल है। क्या वहां भी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा की कोई योजना है?हां, मैं यह तो बताना भूल ही गया था। देवघर में भी एयरपोर्ट का निर्माण होना है। 325 करोड़ रुपये की लागत से वहां एक बड़ा एयरपोर्ट बनेगा। देवघर आस्था का बड़ा केंद्र है। गया के बाद दरभंगा के हवाई अड्डे में भी काम होना है। पटना एयरपोर्ट का भी विस्तार किया जाना प्रस्तावित है’अमेरिका-चीन की तुलना में भारतीय विमानन बाजार कहां ठहरता है? कब तक इनके मुकाबले खड़ा हो पाएगा?सही बात तो यह है कि हमारा घरेलू विमानन बाजार आज नंबर तीन की स्थिति में है। घरेलू और विदेशी बाजार को जोड़ लें, तो हम पांचवें स्थान पर हैं। लेकिन जिस गति से हम बढ़ रहे हैं, हम बहुत जल्दी विश्व में नंबर तीन के स्थान पर पहुंच जाएंगे। अमेरिका आज इस मामले में नंबर एक पर है और 90 करोड़ यात्र तक पहुंच चुका है। चीन 60 करोड़ यात्रओं के साथ दूसरे नंबर पर है। हम अभी 20 करोड़ यात्र पर हैं, लेकिन हमारा लक्ष्य आने वाले समय में 100 करोड़ यात्रओं का है।’संसदीय राजनीति के लिए आपने हजारीबाग को ही क्यों चुना? पिता की राजनीतिक विरासत आगे बढ़ाने के लिए या पिता की छवि का सियासी लाभ लेने के लिए?
यह तो जनता ही तय करती है। मुङो तो यह देखकर अच्छा लगता है कि पूरे इलाके में परिवर्तन नजर आ रहा है। यहां नई रेल लाइन शुरू हुई है। मेडिकल कॉलेज खुलने वाले हैं। गौरियाकरमा में विष शोध संस्थान, पतरातू में एनटीपीसी के बड़े पावर प्लांट का निर्माण चल रहा है। कोयला आधारित ऐसा प्लांट कहीं और नहीं बन पाएगा। बड़े काम हो रहे हैं। बुनियादी सुविधाएं बहाल हुई हैं। सत्ता से मेरा कोई मोह नहीं है। पिता से सेवा भाव मिला। राष्ट्रवाद की सोच मिली। मैंने बेहतर शिक्षा, अच्छा करियर और नौकरी प्राप्त की। अपने पर पूरा विश्वास है। मुङो सेवा का मौका दिया जाए, तो जनता को लगेगा कि मैं सेवा से प्रेरित हूं। देश की सेवा करने आया हूं। जो मैं प्राप्त करना चाहता था, मैंने प्राप्त कर लिया है। उन्होंने (पिता ने) देश का निर्माण किया है, विकसित बनाया है। मैंने उनसे सभी तरह के गुण हासिल किए हैं।
’आपके पिता जब वर्तमान केंद्र सरकार के कामकाज पर टिप्पणी करते हैं, तब आप कैसा महसूस करते हैं?लोकतंत्र में यह बहुत बड़ी खूबी है। सबको बोलने, समीक्षा करने और अपनी बात रखने का अधिकार है। सबसे सीखना चाहिए। वरिष्ठ, स्थापित राजनेता हों या छोटे से छोटा व्यक्ति, सबकी आलोचना को सुनना चाहिए। सबकी बात सुनता हूं और जो बेहतर हो, वही करता हूं।’आप विदेश में पढ़े। वहां नौकरी की। फिर सब कुछ छोड़कर हजारीबाग आ गए। दोनों में कितना अंतर पाते हैं?दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है। इंग्लैंड, अमेरिका जैसे देशों में मैं रहा। वहां नौकरी की। विश्व की नामी-गिरामी कंपनियों का कंसल्टेंट रहा। आज लौटकर हजीराबाग के गांवों में घूम रहा हूं। यह मेरी जन्मभूमि है। मेरी पैदाइश यहां हुई है। बाहर मैं अपने काम में माहिर था। आज जब यहां हूं, तो अपने इस काम में माहिर हूं। 22-23 साल अमेरिका में रहा, तो एक शब्द हिंदी का नहीं बोलना पड़ता था। लेकिन मेरे परिवार में मेरी मां, मेरे पिताजी ने हिंदी की अच्छी सेवा की है। मेरी मां ने कई किताबें लिखी हैं। हमारे परिवार की एक भाषा परंपरा है, जिसका मैं भी निर्वहन कर रहा हूं।
’वर्ष 2019 के बाद आप राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका कहां देखते हैं?
मैं एक राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी का वफादार कार्यकर्ता हूं। पूरी मेहनत और सेवा भाव से काम करना चाहता हूं। देश को विकसित बनाना चाहता हूं। इसे विश्वगुरु बनते देखना चाहता हूं। मैं राजनीति में लेने नहीं, देने आया हूं।
’देश में जातीय गोलबंदी जिस ढंग से सामने आने लगी है, आपको क्या लगता है, देश किस दिशा में बढ़ रहा है?देश में चुनावी माहौल बन रहा है। जनता के सामने विकल्प है। भाजपा विकास की राजनीति में विश्वास करती है, जबकि विपक्ष विनाश की राजनीति करता है। क्षेत्रवाद, जातिवाद की बात उठेगी, लेकिन भाजपा का नारा- ‘सबका साथ, सबका विकास’ होगा। समाज में जिन्हें कोई सुविधा नहीं मिली है, जो उपेक्षित-वंचित हैं, उन गरीबों को हमारी सरकार प्राथमिकता दे रही है। जन-धन योजना, उज्‍जवला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे कार्यक्रम समाज के अंतिम व्यक्ति के लिए बने हैं। यही हमारा अटूट विश्वास भी है। हमारी राजनीति सबका साथ, सबका विकास से आगे बढ़कर सबका विश्वास की हो चुकी है। इस चट्टान के सामने विपक्ष की विनाश की राजनीति टूट जाएगी। जनता को हम पर पूरा विश्वास जो है।

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