आसाराम को सलाखों तक पहुंचाने के लिए इस लेडी पुलिस ऑफिसर ने झोंक दी पूरी ताकत

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नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के मामले में आसाराम को अदालत ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुना दी है। लेकिन उन्हें सलाखों तक पहुंचाने के लिए एक लेडी पुलिस ऑफिसर ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। एक वेबसाइट से बात करते हुए पुलिस ऑफिसर चंचल मिश्रा ने बताया कि इस केस की जांच करते हुए उन्हें कई बार धमकियां दी गईं।चंचल ने बताया कि 6 नवंबर 2013 को उन्होंने केस की चार्जशीट फाइल कर दी। इसके बाद विरोधी 55 अलग-अलग आवेदन लगाकर किसी तरह से पेशी टलवा देते थे। लेकिन फिर तत्कालीन जज भगवानदास ने केस की जांच में चंचल का बहुत साथ दिया। पुलिस ऑफिसर ने बताया कि इस केस की तफ्दीश के दौरान उन्हें महीनों तक छुट्टी नहीं मिली थी। इसकी ट्रायल बहुत लंबी चली थी। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की तरफ से ऐसे सवाल किए जाते थे जो गुमराह करते थे, लेकिन कई परेशानियों के बावजूद ना वो पीछे हटीं ना डरीं।
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उन्होंने बताया कि तत्कालीन डीएसपी अजयपाल लांबा ने आसाराम को पकड़ने के लिए एक लंबी टीम बनाई थी। इस टीम का नेतृत्व वो ही कर रही थीं। उनकी टीम में पांच पुलिस अधिकारी और जवान थे। आसाराम को पकड़ने टीम 31 अगस्त को इंदौर पहुंच गई। चंचल ने बताया कि जब आसाराम के खंडवा रोड पर बने आश्रम के पास पहुंचे तो वहां मौजूद भक्त उन्हें रोकने के लिए सड़क पर दरियां बिछाकर लेट गए। ताकी उनकी गाड़ी बाबा के आश्रम तक ना पहुंच पाए।जब वो आगे पहुंचीं तो उन्हें भटकाने के लिए कहा जा रहा था कि बाबा अभी सत्संग कर रहे हैं, कभी पूजा तो कभी दवा लेने के बहाने बनाए गए। इतनी भीड़ देखकर वो समझ चुकी थीं आश्रम के अंदर जाना बहुत मुश्किल था। वहां मौजूद भक्त इतने गुस्से में थे कि वो कभी भी हमला कर सकते थे। तभी वहां इंदौर पुलिस के ही एक जवान ने उन्हें आसाराम की कुटिया का दूसरा गेट बताया, इस गेट से लोग तो निकल सकते थे लेकिन गाड़ी नहीं। तब तत्काल जेसीबी लगाकर उन्होंने दीवार तोड़ी और आसाराम को उठाकर ले गए।बुधवार जब आसाराम की सजा का ऐलान हुआ उस वक्त चंचल लंच के लिए बाहर निकली थीं। उन्होंने वापस आकर देखा तो बलात्कारी बाबा को उम्र कैद की सजा सुनाई जा चुकी थी। इसके बाद चंचल के पास उनकी मां का फोन आया और बधाई दी। कई सीनियर ऑफिसर्स ने भी चंचल को उनकी निडरता के लिए बधाई दी।

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