कर्नाटक चुनाव: भाजपा को तटीय क्षेत्र में बढ़त का पूरा भरोसा

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तटीय कर्नाटक में भाजपा अमूमन मजबूत नहीं रही है। लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी लहर के असर में भाजपा को इस क्षेत्र में 17 सीटों पर बढ़त मिली थी। इसी आधार पर उसको भरोसा है कि वह इस बार यहां निर्णायक बढ़त बनाने में सफल होगी। साल 2008 में जब पहली बार भाजपा सरकार बनी थी, तब पार्टी को यहां 19 में से 10 सीटें मिली थीं। हालांकि 2013 में वह तीन पर सिमट कर रह गई थी।लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान मिली बढ़त ने उसका भरोसा बढ़ा दिया है। कांग्रेस भी पिछले प्रदर्शन के आधार पर क्षेत्र में इस बार भी अपनी जीत मान कर चल रही है। वह पिछली बार क्षेत्र के मुस्लिमों का ज्यादातर वोट अपने पक्ष में करने में कामयाब रही थी।
जनसंघ की पहली जीत
तटीय कर्नाटक की उडुपी नगरपालिका में पहली बार 1968 में भाजपा की पूर्ववर्ती पार्टी भारतीय जनसंघ ने जीत दर्ज की थी। यह दक्षिण भारत में किसी हिंदूवादी पार्टी की पहली जीत थी। आरएसएस के युवा कार्यकर्ता वी.एस. आचार्य की अगुआई में यह जीत मिली थी।
मुस्लिम वोट महत्वपूर्ण
तटीय कर्नाटक क्षेत्र में मुस्लिम वोट निर्णायक है। इस क्षेत्र में पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया और सोशिलिस्टर डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया जैसी पार्टियां सक्रिय हैं, जिनका जनाधार मुस्लिम वोट बैंक है। तटीय कर्नाटक मुस्लिम बहुल इलाका है। यहां से मुसलमान विदेशों में नौकरी और कारोबार करने गए और लौटकर क्षेत्र में आर्थिक तौर पर मजबूत उपस्थित बनाई।
भाजपा ने इस क्षेत्र में पकड़ बनाने को माइक्रो मैनजमेंट शुरू किया है। पार्टी ने केरल की तर्ज पर सुरक्षा यात्रा निकाली है। आरएसएस के नेता पर्दे के पीछे से हिंदुत्व और हिंदू कार्यकर्ताओं की हत्या के मुद्दे को उठा रहे हैं।

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