सीएम नीतीश समेत 11 विधान पार्षद सात मई को लेंगे शपथ, परिषद में नहीं दिखेंगे ये पुराने चेहरे

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मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्‍यमंत्री सुशील मोदी, राबड़ी देवी समेत 11 नव निर्वाचित विधान पार्षद सात मई को पद एवं गोपनीयता की शपथ लेंगे। कई पुराने चेहरे अब परिषद में नहीं दिखेंग
पटना । मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी एवं स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय समेत 11 नव निर्वाचित विधान पार्षद सात मई को पद एवं गोपनीयता की शपथ लेंगे। विधान परिषद के एनेक्सी भवन में शाम साढ़े चार बजे शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया जाएगा।विधान परिषद के उप सभापति हारुण रशीद ने बताया कि शपथ ग्रहण समारोह में सभी एमएलसी को आमंत्रित किया गया है। मौजूदा विधान पार्षदों का कार्यकाल छह मई को समाप्त हो जाएगा। राज्यपाल सत्यपाल मलिक द्वारा अधिकृत किए जाने के बाद उप सभापति हारुण रशीद नवनिर्वाचित पार्षदों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।नव निर्वाचित विधान पार्षदों में जदयू के दो, भाजपा और कांग्रेस से एक-एक नेता पहली बार विधान परिषद के लिए चुने गए। जबकि नीतीश कुमार, सुशील मोदी एवं राबड़ी की तीसरी तथा मंगल पांडेय की दूसरी पारी होगी। रामचंद्र पूर्वे की यह चौथी पारी है।अन्य सभी छह सदस्य पहली बार विधान परिषद के सदस्य बनेंगे। इसमें संजय पासवान, प्रेमचंद मिश्रा, रामेश्वर महतो, खालिद अनवर, खुर्शीद मोहसिन और संतोष सुमन शामिल हैं। एक विधायक वाली जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा की पहली बार परिषद में इंट्री होगी।
परिषद में अब नहीं दिखेंगे
छह मई को खाली हो रही 11 सीटों में से सिर्फ चार सदस्य ही दोबारा चुनकर आए हैं। शेष सात का कार्यकाल खत्म हो जाएगा। इनमें जदयू के संजय सिंह, उपेंद्र प्रसाद, चंदेश्वर चंद्रवंशी, राजकिशोर कुशवाहा एवं भाजपा के लालबाबू प्रसाद शामिल हैं। भाजपा के सत्येंद्र नारायण सिंह का निधन हो गया है, जबकि दल-बदल के कारण जदयू के नरेंद्र सिंह की सदस्यता पहले ही खत्म हो गई थी।
राबड़ी बनेंगी नेता प्रतिपक्ष
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नए सदस्यों के शपथ लेने के बाद 75 सदस्यों वाले उच्च सदन में विभिन्न दलों की संख्या प्रभावित होगी। सत्ताधारी दल जदयू परिषद में सबसे बड़ी पार्टी बनी रहेगी। जदयू के 32 और भाजपा के 22 सदस्य होंगे। 80 विधायकों वाली पार्टी राजद का परिषद में तीसरा स्थान होगा। नौ सदस्यों के बूते राबड़ी देवी को परिषद में नेता प्रतिपक्ष का दर्जा मिल जाएगा। अशोक चौधरी के साथ चार सदस्यों के दल बदल के कारण कांग्र्रेस के सिर्फ दो सदस्य ही बच गए थे। अब उनके तीन सदस्य हो जाएंगे।

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