सरकार ने जारी किया निर्देश, सिम कार्ड लेने के लिए आधार जरूरी नहीं

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नई दिल्लीः अब सिम कार्ड लेने के लिए आधार कार्ड की जरूरत नहीं पड़ेगी. टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक सरकार ने मोबाइल ऑप्रेटर्स को निर्देश जारी कर पहचान के लिए अन्य दस्तावेज जैसे ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट और वोटर आईडी कार्ड को भी स्वीकार करने के लिए कहा है. टेलिकॉम सचिव अरुण सुंदराजन ने बताया कि मोबाइल कंपनियों को तुरंत प्रभाव से निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया है ताकि कस्टमर्स को परेशानी का सामना न करना पड़े.
निर्देश जारी
टेलिकॉम सचिव का कहना है कि मंत्रालय की ओर से सभी टेलिकॉम कंपनियों को निर्देश जारी किए गए हैं जिसमें कहा गया है कि किसी व्यक्ति के पास आधार कार्ड न होने की स्थिति में उसे सिम देने से मना न करें. उन्होंने बताया कि सरकार ने केवाईसी (नो योर कस्टमर) के अन्य फॉर्म्स और दस्तावेज स्वीकार करने को के लिए कहा है.
आधार कार्ड से सत्यापन पर जोर देती थीं कंपनियां
गौरतलब है कि मोबाइल कंपनियां टेलिकॉम विभाग द्वारा पहले दिए गए निर्देशों के आधार पर आधार कार्ड के माध्यम से सत्यापन पर जोर देती थीं. टेलिकॉम विभाग का कहना था कि उसने लोकनीति फाउंडेशन के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही ये निर्देश जारी किए थे लेकिन शीर्ष न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया कि उसने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा था सवाल
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मोबाइल फोन को आधार से अनिवार्य रूप से जोड़ने के सरकार के फैसले पर सवाल खड़े किए थे और कहा था कि उपयोगकर्ताओं के अनिवार्य सत्यापन पर उसके पिछले आदेश को औजार के रूप में प्रयोग किया गया. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा कि लोकनीति फाउंडेशन द्वारा दायर जनहित याचिका पर उसके आदेश में कहा गया था कि मोबाइल के उपयोगकर्ताओं को राष्ट्र सुरक्षा के हित में सत्यापन की जरूरत है.
यह पीठ आधार और इसके 2016 के एक कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. पीठ ने कहा, ‘‘असल में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया लेकिन आपने इसे मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए आधार अनिवार्य करने के लिए औजार के रूप में प्रयोग किया.
क्या कहा था कोर्ट ने
पीठ ने कहा, ‘‘आप टेलिकॉम सेवा प्राप्त करने वालों के लिए मोबाइल फोन से आधार को जोड़ने के लिए शर्त कैसे लगा सकते हैं?’’ पीठ ने कहा कि लाइसेंस समझौता सरकार और सेवा प्रदाताओं के बीच है. यूआईडीएआई के वकील द्विवेदी ने कहा कि आधार योजना का लगातार दो सरकारों ने समर्थन किया और शीर्ष अदालत में एक पक्षकार के लिए इसका विरोध करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल मंत्रियों के उस अधिकार प्राप्त समूह का हिस्सा थे जिसने आधार के मुद्दे पर गौर किया था.

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