सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जोसेफ की नियुक्ति पर आज कलीजियम की बैठक, केंद्र ने लौटाई थी सिफारिश

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नई दिल्ली
उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ को पदोन्नति देकर सुप्रीम कोर्ट भेजने की सिफारिश को केंद्र सरकार द्वारा कलीजियम को लौटाने के बाद बुधवार को एकबार फिर इस मसले पर कलीयिजम की बैठक हो रही है। बता दें कि केंद्र सरकार ने कुछ दिनों पहले ही जस्टिस केएम जोसेफ की पदोन्नति की सिफारिश को सुप्रीम कोर्ट को लौटा दिया था। केंद्र ने वरिष्ठता, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के संतुलन के साथ ही सुप्रीम कोर्ट की बेचों में SCs और STs के प्रतिनिधियों की मौजूदगी बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया था।
क्या है पूरा मामला
कलीजियम ने 10 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में उत्तराखंड के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ की नियुक्ति की भी सिफारिश की थी। जस्टिस जोसेफ और मल्होत्रा के प्रमोशन की सिफारिशें लगभग तीन महीने पहले की गई थीं। सुप्रीम कोर्ट कॉलिजियम की सिफारिश करने की फाइल 22 जनवरी को कानून मंत्रालय पहुंची। फरवरी के प्रथम सप्ताह में शुरू हुई स्वीकृति की प्रक्रिया में केवल इंदु मल्होत्रा का नाम आगे बढ़ सका है। सरकार का मानना है कि न्यायमूर्ति जोसेफ के नाम की सिफारिश करते समय कॉलेजियम ने वरिष्ठता और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को नजरअंदाज कर दिया है। वह 669 हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की वरिष्ठता सूची में 42वें नंबर पर हैं।
कलीजियम के ये हैं सदस्य
बता दें कि इस कलीजियम में चीफ जस्टिस दीपक मिश्र के अलावा जस्टिस जे चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ सदस्य हैंजस्टिस कुरियन जोसेफ ने केंद्र के फैसले पर जताई थी असहमति
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस कुरियन जोसेफ ने केंद्र के फैसले पर असहमति जताते हुए कहा है कि क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और वरिष्ठता सुप्रीम कोर्ट के जजों को चुनने का मुख्य मानदंड नहीं हो सकता है। जस्टिस जोसेफ ने कहा था कि बुधवार को SC कलीजियम की बैठक होने वाली है, जिसमें जस्टिस केएम जोसेफ के मुद्दे पर ‘तथ्य’ सामने रखे जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि ‘सरकार ने जिसे तथ्य माना है, वह तथ्य नहीं हैं और वास्तविक तथ्य उनके सामने रखे जाएंगे।’ सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा था कि वह कलीजियम की बैठक के नतीजे को लेकर काफी सकारात्मक हैं। उन्होंने कहा, ‘पहले की सिफारिश के पीछे के तथ्य और आंकड़े सरकार को समझाए जाएंगे। जब फैक्ट्स और फिगर्स सामने रखे जाएंगे, सरकार को अहसास होगा कि वास्तविक फैक्ट्स क्या हैं और इससे उनका नजरिया बदल सकता है।’

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