अलर्टः 4 राज्यों के लिए आंधी तूफान की ताजा चेतावनी, 2 दिनों में 124 की मौत

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उच्च न्याय पालिका में जजों की नियुक्तियों को लेकर न्याय पालिका और कार्यपालिका के बीच शुक्रवार को नई तू तू- मैं मैं हुई। केंद्र ने हाईकोर्ट के लिए बहुत कम नामों की सिफारिशें करने पर कोलेजियम पर सवाल उठाए हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कोलेजियम की सिफारिशों को लंबित रखने के लिए केंद्र को आड़े हाथ लिया है और पूछा कि उनपर अमल क्यों नहीं हो रहा।जस्टिस मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता की पीठ ने अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल से कहा, हमें बताएं, कितने नाम आपके पास लंबित हैं। तब अटॉर्नी जनरल ने कहा, मुझे इस बारे में जानकारी हासिल करनी होगी। इस पर तो पीठ ने व्यंग्य करते हुए कहा, जब यह सरकार पर आता है, तो आप कहते हैं कि हम मालूम करेंगे।पीठ ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब वेणुगोपाल ने कहा कि अदालत मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा हाईकोर्ट में जजों के रिक्त स्थानों के मामले की सुनवाई कर रही है। लेकिन तथ्य तो यह है कि जिन हाईकोर्ट में जजों के 40-40 पद रिक्त हैं, वहां भी कोलेजियम सिर्फ तीन-चार नामों की ही सिफारिश की रही है।अटॉर्नी जनरल ने कहा, कोलेजियम को व्यापक तस्वीर देखनी होगी और ज्यादा नामों की सिफारिश करनी होगी। कुछ हाईकोर्ट में 40 रिक्तियां हैं और कोलेजियम ने सिर्फ तीन नामों की ही सिफारिश की है। सरकार के बारे में कहा जा रहा है कि हम रिक्तयां भरने में ढिलाई कर रहे हैं। लेकिन कोलेजियम की सिफारिश ही नहीं होगी, तो कुछ भी नहीं किया जा सकता।कोलेजियम ने 19 अप्रैल को जस्टिस एम याकूब मीर और रामलिंगम सुधाकर को मेघालय हाईकोर्ट और मणिपुर हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की थी, जिन्हें अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। हालांकि, वेणुगोपाल ने पीठ से कहा कि दोनों सिफारिशों पर विचार किया जाएगा और जल्द आदेश जारी हो जाएंगे। इसपर पीठ ने पूछा कहा, जल्दी का मतलब क्या है, जल्दी तो तीन महीने भी हो सकती हैं। पीठ ने इसके साथ ही अटॉर्नी जनरल से मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा हाईकोर्ट में जजों के रिक्त पदों के बारे में 10 दिन में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने 17 अप्रैल को एक व्यक्ति की याचिका मणिपुर हाईकोर्ट से गुजरात हाईकोर्ट स्थानांतरित करने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान इस तथ्य का संज्ञान लिया था कि जजों के पद रिक्त होने की वजह से मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा हाईकोर्ट की स्थिति गंभीर है।तीनों हाईकोर्ट में आधे पद खाली
पीठ ने इस तथ्य को भी नोट किया था कि मणिपुर हाईकोर्ट के लिए स्वीकृत सात जजों के पदों में से दो पर ही नियुक्ति हुई है। इसी प्रकार मेघालय हाईकोर्ट में चार जजों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन अभी केवल एक जज कार्यरत है। इसी प्रकार त्रिपुरा हाईकोर्ट में चार पदों में से दो पदों पर ही जज कार्यरत हैं। सरकार लौटा चुकी जस्टिस जोसफ की फाइल
शीर्ष अदालत की यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है, क्योंकि केंद्र ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ को शीर्ष अदालत में लाने की कोलेजियम की सिफरिश को तीन महीने से भी अधिक समय लंबित रखने के बाद पिछले हफ्ते लौटा दिया था।

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