केरल में पहली ट्रांसजेंडर मैरिज ने पेश की मिसाल, एक दूजे के हुए ईशान और सूर्या

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तिरुवनंतपुरम
केरल में सामाजिक न्याय और प्यार की एक अनोखी मिसाल पेश करते हुए दो ट्रांसजेंडर गुरुवार को शादी के अटूट बंधन में बंध गए। तिरुवनंतपुरम के नैशनल क्लब में आयोजित हुई इस अनोखी शादी में करीब 500 मेहमान शामिल हुए और इस नवदंपती को अपना आशीर्वाद भी दिया। मेल से फीमेल बनीं सूर्या और फिमेल से मेल बने ईशान की इस अनोखी शादी को राज्य की पहली ट्रांसजेंडर मैरिज के रूप में मान्यता भी दे दी गई।केरल में हुई इस शादी के बाद परिणय सूत्र में बंधे ईशान एक उद्यमी हैं, जबकि सूर्या एक टीवी ऐंकर के रूप में काम करती हैं। काफी लंबे समय से एक दूसरे को जानने वाले सूर्या और ईशान ने स्पेशल मैरिज ऐक्ट के तहत एक दूसरे से शादी की है, जिसके बाद इसे केरल राज्य की पहली ट्रांसजेंडर मैरिज के रूप में मान्यता दी गई है।
इस शादी के कई लोग गवाह बने
ईशान और सूर्या की इस शादी में केरल के तमाम विशिष्ट लोगों समेत कुल 500 मेहमान शामिल हुए और इस दौरान कई लोगों ने उन दोनों के फैसले की प्रशंसा भी की।
‘करना पड़ा समाज और परिवार के विरोध का सामना’
इस विवाह के बाद सूर्या और ईशान ने बताया कि उन्हें अपनी शादी से पहले कई बार पारिवारिक और सामाजिक विरोध का सामना करना पड़ा। दंपती ने बताया कि ईशान के मुस्लिम समुदाय से होने के कारण सूर्या का परिवार पहले इस शादी के लिए राज़ी नहीं था, जिसके कारण उन्हें लंबे समय तक अपनी शादी के लिए सामाजिक और पारिवारिक विरोध का सामना करना पड़ा।
दोनों के लिए यह पल कुछ खास था
तमाम प्रयासों के चलते दोनों के परिवार इस शादी के लिए राजी हुए, जिसके बाद गुरुवार को पूरे रीति-रिवाज के साथ विवाह की रस्मों को पूरा किया गया।
ट्रांसजेडर वेलफेयर बोर्ड के सदस्य हैं ईशान और सूर्या
ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड के सदस्य हैं ईशान और सूर्या बता दें कि गुरुवार को परिणय सूत्र में बंधे सूर्या और ईशान फिलहाल सरकार के ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड की सदस्य भी हैं। सूर्या का कहना है कि उनकी और ईशान की शादी से लोगों का ट्रांसजेंडर्स के प्रति नजरिया बदल सकेगा और उनके जैसे कई और ट्रांसजेंडर भी इसके बाद शादी के पवित्र बंधन में बंध सकेंगे।
गौरतलब है कि साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर्स को थर्ड जेंडर की संज्ञा देते हुए इन्हें मान्यता प्रदान की थी। इस फैसले में कोर्ट ने सरकार से ऐसे लोगों के लिए नियमों में संशोधन करने और इन्हें हर क्षेत्र में समान मौके देने का प्रयास करने की भी बात कही थी।

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