खत्म होने के कगार है जेपी इन्फ्राटेक, कर्जदाताओं को मिलेगा बोली लगाने का पहला मौका?

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नई दिल्ली/मुंबई
जेपी ग्रुप की कंपनी जेपी इ्न्फ्राटेक अब लिक्विडेशन यानी खत्म होने के कगार पर है। अंतरिम रिजॉलूशन प्रफेशनल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को यह जानकारी दी गई कि कर्ज में डूबी रियलटी कंपनी का रिवाइवल का प्लान फेल हो गया है और इसकी समयसीमा भी खत्म होने वाली है। ऐसे में यह कंपनी अब खत्म हो सकती है और इसकी हिस्सेदारी संबंधित दावेदारों के बीच बांटी जा सकती है। जेपी इन्फ्राटेक कंपनी ने 2007 में नोएडा में लगभग 32000 फ्लैट का निर्माण शुरू किया, जिसमें से 9500 फ्लैट आवंटित किए गए। इसके अलावा अन्य फ्लैट अब तक फंसे हुए हैं।इन्सॉलवेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड, 2016 के तहत किसी कंपनी के दिवालिया होने के बाद उसका मामला नैशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल में जाने पर उसके रिवाइवल के लिए 270 दिनों का वक्त दिया जाता है। यह समयसीमा शनिवार यानी 12 मई को समाप्त हो रही है। बुधवार को जेपी इन्फ्राटेक ने लक्षद्वीप की 7350 करोड़ रुपये की बोली को अपर्याप्त बताते हुए खारिज कर दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में रिजॉलूशन प्रफेशनल की ओर से यह बात कही गई। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में रियलटी प्रॉजेक्ट्स में जेपी इन्फ्राटेक की बड़ी हिस्सेदारी रही है।इस पूरी प्रक्रिया से जुड़े एक शख्स ने बताया, ‘यह स्पष्ट है कि अंतरिम रिजॉलूशन प्रफेशनल कंपनी को खत्म करने की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा सकता। वह सिर्फ ट्राइब्यूनल को इस संबंध में तथ्यों की जानकारी देने का काम करता है कि 270 दिनों में भी कैसे रिवाइवल का प्लान पूरा नहीं हो सका। कानून के अनुसार ऐसे मामलों में खासी लंबी प्रक्रिया होती है और कई पहलुओं को चेक किया जाता है। इसे लेकर एक साथ दो तरफ से प्रक्रिया चल रही है। पहली नैशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल में और दूसरी सुप्रीम कोर्ट में।’हालांकि कंपनी के खत्म होने की आशंका के बीच चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि प्राथमिक लक्ष्य फ्लैट बायर्स को राहत दिलाना है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में अब तक 16 मई को विस्तृत सुनवाई होगी। लिक्विडेशन का अर्थ यह होगा कि कंपनी असेट्स को बेचा जाएगा और कर्जधारकों के पास इसका पहला अधिकार होगा।
कंपनी पर है 9,800 करोड़ रुपये का कर्ज
कंपनी पर 9,800 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है। कंपनी पर जिन बैंकों का कर्ज बकाया है, उनमें आईडीबीआई बैंक, आईआईएफसीएल, ऐक्सिस बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, कॉर्पोरेशन बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, आईएफसीआई बैंक, जे ऐंड के बैंक, एलआईसी, एसबीआई, सिंडिकेट बैंक और यूनियन बैंक शामिल हैं।

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