परमाणु समझौते पर बढ़ा विवाद, क्या यूरोप को महंगा पड़ेगा ईरान का साथ

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वॉशिंगटन। अमेरिका ने ईरान परमाणु समझौते से हटने के बाद अब ईरान के साथ कारोबार करने वाली यूरोपीय कंपनियों पर पाबंदियां लगाने की धमकी दी है। वहीं दूसरी ओर फ्रांस और ब्रिटेन इस समझौते के साथ बने रहना चाहते हैं।अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने कहा कि इस बात की संभावना है कि अमेरिका ईरान के साथ कारोबार करने वाली यूरोपीय कंपनियों पर पाबंदियां लगाए। बोल्टन ने अमेरिकी समाचार चैनल सीएनएन को दिए गए साक्षात्कार में यह बात कही। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पेओ को उम्मीद है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान के साथ नया परमाणु समझौता कर सकेंगे।गौरतलब है कि अमेरिका के ईरान परमाणु समझौते से हटने के बाद भी अन्य यूरोपीय देशों अभी भी समझौते को बरकरार रखे हुए हैं। अमेरिका के ईरान परमाणु समझौते के हटने के बावजूद चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन, जर्मनी और ईरान अभी भी इस समझौते के साथ हैं।परमाणु समझौते पर फ्रांस और ब्रिटेन रहेंगे सा‍थ : फ्रांस का मानना है कि अमेरिका के ईरान परमाणु समझौते से हटने के बावजूद यह समझौता ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने में अभी कारगर है। फ्रांस के विदेश मंत्री जेन-यवेस ड्रेन ने कल कहा कि फ्रांस ईरान परमाणु समझौते के साथ बने रहना चाहता है, ताकि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोका जा सके।ड्रेने ने आयरलैंड का राजधानी डबलिन में कहा, हमारा मानना है कि परमाणु प्रसार के खिलाफ लड़ाई बहुत महत्वपूर्ण है। ब्रिटेन ने ईरान से कहा है कि ईरान समझौते से जुड़े सभी यूरोपीय देश और ब्रिटेन इसके प्रति प्रतिबद्ध हैं और ईरान को समझौते की शर्तों का पालन करते हुए इसके साथ बने रहना चाहिए। ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने कल ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी से बातचीत में यह प्रतिबद्धता व्यक्त की।
रुहानी ने श्रीमती मे के कार्यालय द्वारा दोनों नेताओं की बातचीत की जानकारी देते हुए कहा, दोनों नेता दोनों देशों के बीच वार्ता जारी रखने के महत्व और मंगलवार को बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और ईरान के विदेश मंत्रियों की मुलाकात को लेकर पर सहमत हैं।

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