तीसरी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने येदियुरप्पा,राज्यपाल ने दिलाई पद व गोपनीयता की शपथ, 15 दिनों में साबित करना होगा बहुमत

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कर्नाटक में राज्यपाल ने सबसे पहले भाजपा को सरकार बनाने का निमंत्रण दिया तो आधी रात को ही कांग्रेस और जेडीएस (जनता दल सेक्युलर) सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। आधी रात से सुबह तक बैठी सुप्रीम कोर्ट ने येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर रोक तो नहीं लगाई लेकिन दोनों पक्षों को अपने विधायकों की लिस्ट सौंपने को कहा। हालांकि इस दौरान येदियुरप्पा अपने तय समय पर शपथ ली और तीसरी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने।कांग्रेस-जनता दल सेक्यूलर (जद एस) के अनुरोध पर मध्य रात्रि को सुनवाई के लिए गठित न्यायमूर्ति ए के सिकरी, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की खंडपीठ ने रात करीब सवा दो बजे से सुबह साढ़े पांच बजे तक चली सुनवाई के बाद कहा कि वह राज्यपाल के आदेश पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं है, इसलिए वह येदियुरप्पा के शपथ-ग्रहण पर रोक नहीं लगायेगी, लेकिन भाजपा नेता का मुख्यमंत्री पद पर बने रहना इस मामले के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।कांग्रेस एवं जद(एस) गठबंधन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, भाजपा विधायकों की ओर से पूर्व एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी और केंद्र सरकार की ओर से एटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल तथा अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल- तुषार मेहता एवं मनिन्दर सिंह की दलीलें सुनने के बाद कोर्टे ने प्रदेश भाजपा को नोटिस जारी करके उसे शुक्रवार को साढ़े 10 बजे तक राज्यपाल वजूभाई वाला को 15 मई को सौंपी गयी चिट्ठी की प्रति जमा कराने को कहा है। इस मामले की सुनवाई कल साढे 10 बजे के लिए निर्धारित की गयी है।गौरतलब है कि कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन ने राज्यपाल की ओर से येदियुरप्पा को शपथ के लिए आमंत्रित किये जाने के बाद शीर्ष अदालत के अतिरिक्त रजिस्ट्रार का दरवाजा खटखटाया था। इस मामले को तत्काल मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के आवास ले जाया गया और उन्होंने सारी औपचारिकताएं पूरी करते हुए रात में ही सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति सिकरी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय खंडपीठ गठित की थी।इससे पहले भाजपा विधायक सुरेश कुमार ने ट्वीट किया था कि कल सुबह 9.30 बजे येदियुरप्पा लेंगे सीएम पद की शपथ। उन्होंने आम लोगों को भी इस मौके पर मौजूद रहने को कहा था। उन्होंने ट्वीट में लिखा था कि सरकार बनाने को लेकर भाजपा अब आश्वस्त है।कांग्रेस ने कहा कि राज्यपाल वजुभाई वाला कांग्रेस-जदएस गठबंधन को सरकार गठन के लिए आमंत्रित करने को संवैधानिक रूप से बाध्य हैं और अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो यह राज्य में खरीद-फरोख्त को बढ़ावा देना होगा। उसने यह भी कहा कि अगर राज्यपाल इस गठबंधन को न्योता नहीं देते हैं तो फिर राष्ट्रपति या न्यायालय के पास जाने का विकल्प खुला हुआ है।राज्यपाल की ओर से बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने का मौका देने से जुड़ी अटकलों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पी चिदंबरम, कपिल सिब्बल, रणदीप सुरजेवाला और विवेक तन्खा ने कहा कि राज्यपाल के फैसले की आधिकारिक घोषणा के बाद पार्टी इन दो विकल्पों को लेकर निर्णय करेगी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में यह भी कहा कि अगर राजपाल चाहें तो उनके समक्ष 117 विधयकों की पेशी कराई जा सकती है। सिब्बल ने गोवा के मामले में उच्चतम न्यायालय की एक टिप्पणी का हवाला दिया और कहा कि कर्नाटक के राज्यपाल बहुमत वाले गठबंधन को सरकार बनाने का न्यौता देने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य हैं।चिदंबरम ने कहा, ‘कांग्रेस और जदएस ने कर्नाटक में चुनाव बाद गठबंधन किया है। लेकिन राज्यपाल ने कुमारस्वामी को सरकार बनाने का अब तक न्यौता नहीं दिया। यह पता चल रहा है कि राज्यपाल ने शायद येदियुरप्पा को बुलाया है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं है। इसलिए हम अब तक यह मानकर चल रहे हैं कि राज्यपाल ने अब तक कोई फैसला नहीं किया।’राज्यपाल का भाजपा को सरकार बनाने के लिए भेजा गया पत्र सामने आते ही कांग्रेस ने भाजपा पर संविधान की मर्यादा भंग करने का आरोप लगाया है। जवाब में भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि कांग्रेस हमें संविधान की मर्यादा न सिखाए। संविधान की धज्जिया उड़ाना कांग्रेस का इतिहास रहा है। कांग्रेस लोकतंत्र की दुहाई न दे। बीजेपी की सरकार को कांग्रेस ने बर्खास्त किया था। कांग्रेस ने आपातकाल लगाकर कैसे संविधान की रक्षा की थी? कांग्रेस ने सरकार बर्खास्त कराकर राष्ट्रपति शासन लगाए।

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