येदियुरप्पा का सियासी सफर: क्लर्क से मुख्यमंत्री पद तक

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कर्नाटक में सियासी खींचतान के बीच बीजेपी नेता येदियुरप्पा तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने। बुधवार, 17 मई को सुबह 9 बजे उन्होंने कर्नाटक राजभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। मुख्यमंत्री पद पर काबिज येदियुरप्पा का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। चावल की मील में काम करने वाला एक शख्स मुख्यमंत्री की कुर्सी तक कैसे पहुंचा जानें :
येदियुरप्पा का जन्म 27 फरवरी 1943 में मांड्या जिले के बुकानाकेरे में लिगांयत परिवार में हुआ। 1965 में सामाजिक कल्याण विभाग में क्लर्क के रूप में नियुक्त येदियुरप्पा नौकरी छोड़कर शिकारीपुरा चले गए। वहां उन्होंने वीरभद्र शास्त्री की शंकर चावल मिल में एक क्लर्क के रूप में काम किया। 1970 में उन्होंने सार्वजनिक सेवाएं शुरू की, जिसके 0आ जिसके बाद प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। ऐसे में जेडीएस और बीजेपी ने अपने मतभेद दूर किए और मिलकर सर%ाजनीति में सक्रिय हो गए। साल 1983 में वह पहली बार विधानसभा पहुंचे। येदियुरप्पा कॉलेज के दिनों में आरएसएस का हिस्सा भी रह चुके हैं। साल 2007 में कर्नाटक की राजनीति में उलटफेर हुआ जिसके बाद प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। ऐसे में जेडीएस और बीजेपी ने अपने मतभेद दूर किए और मिलकर सरकार बनाई। येदियुरप्पा के लिए यह लकी साबित हुआ और 12 नवंबर 2007 को वह राज्य के मुख्यमंत्री बने।
येदियुरप्पा ने ली CM पद की शपथ,15 दिनों में साबित करना होगा बहुमत
येदियुरप्पा बीजेपी के ऐसे नेता हैं जिनकी बदौलत बीजेपी ने दक्षिण भारत में ना सिर्फ जीत का स्वाद चखा बल्कि सत्ता पर शासन भी किया। हालांकि, वह ज्यादा दिन तक इस कुर्सी पर बने नहीं रह पाए और जेडीएस से मंत्रालयों के प्रभार को लेकर हुए विवाद के बाद 19 नवंबर 2007 को ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।साल 2008 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने वहां जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए सरकार बनाई और इस बार फिर येदियुरप्पा बीजेपी के चेहरे के तौर पर सीएम बने। लेकिन तीन साल दो महीने का उनका कार्यकाल काफी विवादों में रहा। कथित भूमि घोटाले से लेकर खनन घोटाले तक में उनका नाम आता रहा। इस दौरान लोकायुक्त की रिपोर्ट आने के बाद उनकी कुर्सी चली गई। कुर्सी जाने के बाद येदियुरप्पा ने खुद को बीजेपी से अलग कर दिया।
कर्नाटक:येदियुरप्पा की शपथ पर रोक नहीं
इसके बाद लगा कि वो लिंगायत फैक्टर के साथ अपने बल पर राजनीति करेंगे। लेकिन, बीजेपी को यह समझते देर नहीं लगी कि येदियुरप्पा के बिना राज्य में उसका कोई जनाधार नही रह जाएगा। ऐसे में 2018 में भी बीजेपी ने उन्हें अपना सीएम पद का उम्मीदवार बनाया, और बीजेपी का ये दांव काम कर गया। येदियुरप्पा पर लगाए इस दांव की बदौलत बीजेपी एक बार फिर कर्नाटक में सरकार बनाने जा रही है।

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